अर्थव्यवस्था

2011 का दौर खत्म, 2024 से तय होगी महंगाई, जानिए नई CPI में क्या बदलेगा

अब जेब का हिसाब और सटीक, सरकार ने सीपीआई अपडेट की प्रक्रिया तेज की

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- January 30, 2026 | 3:11 PM IST

महंगाई कितनी बढ़ी, कितना दबाव जेब पर पड़ा और रोजमर्रा का खर्च कितना बदला, इन सबका जवाब देने वाला सबसे अहम पैमाना उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI अब बदलने जा रहा है। बदलती जीवनशैली, खर्च के नए तरीके और डिजिटल अर्थव्यवस्था के असर को देखते हुए सरकार ने CPI के आधार वर्ष को अपडेट करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

2011 की जगह 2024 होगा नया आधार

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा गठित विशेषज्ञ समूह ने सीपीआई का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2023-24 करने की सिफारिश की है। इस पर तैयार रिपोर्ट को सार्वजनिक कर दिया गया है। एसबीआई रिसर्च की ईकोरैप रिपोर्ट के मुताबिक, यह बदलाव इसलिए जरूरी है क्योंकि बीते एक दशक में घरों का खर्च करने का तरीका काफी बदल चुका है।

क्या है नई CPI सीरीज

नई सीरीज का नाम सीपीआई 2024 रखा गया है। इसमें साल 2024 को आधार माना जाएगा और उसकी कीमत को 100 मानकर आगे के सालों में महंगाई की तुलना की जाएगी। इसमें कुल 358 वस्तुएं और सेवाएं शामिल की गई हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार वर्गीकृत किया गया है। पुरानी सीरीज के मुकाबले इसमें सेवाओं और नई खपत श्रेणियों को ज्यादा जगह दी गई है।

सरकार के अनुसार पहला सीपीआई 2024 आंकड़ा 12 फरवरी 2026 को जारी किया जाएगा। इसमें जनवरी 2025 से सूचकांक के आंकड़े शामिल होंगे, जबकि जनवरी 2026 की महंगाई दर भी उसी दिन सामने आएगी। इसके साथ ही ग्रामीण, शहरी और संयुक्त स्तर पर जनवरी 2013 से पुराने आंकड़े भी जारी किए जाएंगे।

कैटेगरी पुराना वजन (2011-12) नया वजन (2023-24)
खाद्य और पेय पदार्थ 45.86 36.75
पान, तंबाकू और नशीले पदार्थ 2.38 2.99
कपड़े और जूते 6.53 6.38
आवास, पानी, बिजली, गैस और अन्य ईंधन 16.91 17.66
फर्नीचर, घरेलू उपकरण और रखरखाव 3.80 4.47
स्वास्थ्य 5.89 6.10
परिवहन, सूचना और संचार 8.59 12.41
मनोरंजन, खेल और संस्कृति 1.68 4.86
शिक्षा सेवाएं 4.46 3.33
व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सेवाएं 3.89 5.04
कुल 100.00 100.00

महंगाई के आंकड़ों पर क्या पड़ेगा असर

एसबीआई रिसर्च का आकलन है कि नए वजन के आधार पर कुल सीपीआई में 20 से 30 बेसिस प्वाइंट की हल्की बढ़ोतरी देखी जा सकती है। हालांकि जिन महीनों में खाद्य महंगाई ज्यादा रहती है, वहां नई सीपीआई दर पहले की तुलना में कुछ कम दिख सकती है।

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नई सीपीआई में यह साफ झलकता है कि लोगों का खर्च अब किस दिशा में बढ़ रहा है। खाद्य और पेय पदार्थों का वजन घटाया गया है, जबकि ट्रांसपोर्ट, सूचना और संचार सेवाओं का हिस्सा बढ़ाया गया है। मनोरंजन, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी पहले के मुकाबले ज्यादा महत्व दिया गया है।

ऑनलाइन कीमतें भी बनेंगी महंगाई का हिस्सा

पहली बार सीपीआई में ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म से कीमतें जुटाई जाएंगी। 25 लाख से ज्यादा आबादी वाले 12 बड़े शहरों में ऑनलाइन कीमतों को हर हफ्ते रिकॉर्ड किया जाएगा। मोबाइल सेवाएं, ओटीटी प्लेटफॉर्म और हवाई किराए जैसी सेवाओं की कीमतें भी सीधे ऑनलाइन स्रोतों से ली जाएंगी।

सोना, चांदी और बिजली के लिए नया तरीका

अब सीपीआई में सोने और चांदी के वही गहने शामिल होंगे जो बाजार में आमतौर पर मिलते हैं, जिससे कीमतों की तुलना आसान हो सके। बिजली के दाम अलग अलग खपत स्तर के हिसाब से दर्ज किए जाएंगे, जबकि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी जैसी कीमतें केंद्र स्तर पर जुटाई जाएंगी।

विशेषज्ञ समूह ने साफ किया है कि नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए आवास और मुफ्त सामाजिक योजनाओं का लाभ नई सीपीआई सीरीज में शामिल नहीं किया जाएगा।

क्यों जरूरी है यह बदलाव

विशेषज्ञों का कहना है कि आज की अर्थव्यवस्था में डिजिटल सेवाएं, ऑनलाइन खरीदारी और ट्रांसपोर्ट का खर्च तेजी से बढ़ा है। ऐसे में सीपीआई का नया आधार महंगाई की सही तस्वीर पेश करेगा और नीतिगत फैसलों के लिए ज्यादा भरोसेमंद आंकड़े उपलब्ध कराएगा।

First Published : January 30, 2026 | 3:11 PM IST