प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
केंद्र सरकार की फंडिंग वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की कुल लागत में दिसंबर में लगभग 18.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, क्योंकि लागत बढ़ने से 1392 परियोजनाओं की 29.7 लाख करोड़ रुपये की मूल लागत का संशोधित अनुमान बढ़कर बढ़कर 35.1 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह जानकारी सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (मॉस्पी) की 150 करोड़ रुपये और उससे अधिक की लागत वाली केंद्रीय क्षेत्र की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर ताजा फ्लैश रिपोर्ट के डेटा से मिली है। हालांकि, दिसंबर में लागत बढ़ने की रफ्तार, नवंबर के 22 प्रतिशत से क्रमिक रूप से कम हुई।
हालांकि, अगर पूर्ण संख्या में देखें तो मूल अनुमान से लागत में जो बढ़ोतरी हुई है वह 5.42 लाख करोड़ रुपये थी जो एक महीने पहले 5.37 लाख करोड़ रुपये थी।
जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग ने मंत्रालयों में सबसे अधिक लागत बढ़ने की सूचना दी है। इस विभाग में संशोधित लागत, शुरुआती अनुमानों से दोगुनी से भी अधिक हो गई और 99,854 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई जो 102 प्रतिशत की वृद्धि है और नवंबर के स्तर के बराबर है। दूरसंचार विभाग 1.22 लाख करोड़ रुपये की रकम के साथ 80.36 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि खनन मंत्रालय ने लगभग 27.7 प्रतिशत या 2,380.14 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की मौजूदा केंद्रीय परियोजनाओं में सबसे बड़ी हिस्सेदारी है और इसकी लागत मूल व्यय से 1.96 प्रतिशत बढ़ गई, जिसका अर्थ यह है कि लगभग 10,358 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई। इसी तरह, रेलवे, इस्पात, बिजली और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के तहत परियोजनाओं में लागत क्रमशः 21.4 प्रतिशत, 16.6 प्रतिशत, 15.8 प्रतिशत और 15.5 प्रतिशत बढ़ गई।
इसके विपरीत, उच्च शिक्षा और खेल जैसे कुछ ही मंत्रालयों ने बचत दर्ज की है जिनमें उनके संशोधित व्यय, मूल अनुमानों से क्रमशः 1.77 प्रतिशत और 32.5 प्रतिशत कम रहे।