केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि सरकार देश के 500 विश्वविद्यालयों के छात्रों को ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (जीपीयू), स्वदेशी डेटासेट्स और अन्य आर्टिफिशल इंटेलिजेंस टूल उपलब्ध कराएगी।
वैष्णव ने कहा कि ये टूल और जीपीयू विश्वविद्यालयों को उसी ढांचे के अंतर्गत दिए जाएंगे, जिसके तरह सरकार ने देशभर के 300 से अधिक विश्वविद्यालयों को सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रिकल डिस्चार्ज मशीनिंग (ईडीएम) उपकरण उपलब्ध कराए हैं।
उन्होंने कहा कि छात्रों को एआई में प्रशिक्षित करने के लिए सरकार विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने पर काम कर रही है। वैष्णव ने कहा, ‘हम एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराएंगे, जहां छात्रों को एआई के अवसरों में बहुत अच्छी ट्रेनिंग मिल सके।’
उन्होंने कहा कि सरकार इंडिया एआई मिशन के तहत बड़े शोध कार्यक्रम भी शुरू करेगी। इससे पहले मंगलवार को वैष्णव ने कहा था कि 16 से 20 फरवरी तक दिल्ली में आयोजित हो रही आगामी एआई इम्पैक्ट समिट दुनिया का सबसे बड़ा एआई कार्यक्रम होगा, जिसमें 1 लाख से अधिक लोग भाग लेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि अगले छह महीनों में सरकार इंडिया एआई मिशन का दूसरा चरण शुरू करने की योजना बना रही है। वैष्णव ने कहा कि एआई इम्पैक्ट समिट में पिछले दो वर्षों में गूगल, एमेजॉन, माइक्रोसॉफ्ट और अन्य कंपनियों द्वारा किए गए लगभग 70 अरब डॉलर के निवेश के दोगुना होने की संभावना है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि एआई इम्पैक्ट समिट पांच दिवसीय आयोजन के दौरान 10 ठोस नतीजे सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘हम इस समिट के माध्यम से तकनीक, विशेषकर एआई को लोकतांत्रिक बनाना चाहते हैं।’