facebookmetapixel
दावोस में ट्रंप ने ग्रीनलैंड अधिग्रहण की मांग दोहराई, बल प्रयोग से इनकार कियाटाटा कम्युनिकेशंस ने गणेश लक्ष्मीनारायणन को MD और CEO नियुक्त किया; Q3 में लाभ 54% बढ़ाQ3 Results: जिंदल स्टेनलेस का लाभ 26.6% बढ़ा, जानें डॉ. रेड्डीज, एचपीसीएल समेत अन्य कंंपनियों का कैसा रहा रिजल्टEternal Q3 results: क्विक कॉमर्स की रफ्तार से मुनाफा 73% उछला, ब्लिंकइट ने पहली बार एबिटा लाभ कमायाएआई रेगुलेशन में जोखिम आधारित मॉडल अपनाएगा TRAI, कम जोखिम वाले उपयोग पर होगा स्व-विनियमनCAFE-3 नियमों में बड़ा बदलाव संभव: छोटी पेट्रोल कारों की विशेष छूट हटाने की तैयारी में BEE5 साल में सबसे कमजोर कमाई सत्र: सेंसेक्स कंपनियों की EPS ग्रोथ सुस्तIMF का अलर्ट: AI बना ग्लोबल ग्रोथ का नया इंजन, लेकिन ‘डॉट-कॉम’ जैसे बुलबुले का खतरा भीजिसकी कामना करें, सोच-समझकर करें: ‘नियम-आधारित व्यवस्था’ से परे की दुनियाटैक्स संधियों पर संदेह भारत की ग्रोथ स्टोरी को कमजोर कर सकता है

रिन्यूएबल एनर्जी को भारी कर्ज देगी REC! लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का होगा निवेश

REC इन कंपनियों की हरित परियोजनाओं को कर्ज देगी। इनमें सौर, पवन, हरित हाइड्रोजन, डीकार्बनाइजेशन, बैटरी भंडारण सहित विभिन्न परियोजनाएं शामिल हैं।

Last Updated- July 20, 2023 | 10:36 PM IST
Green Energy
BS

बिजली क्षेत्र को ऋण देने वाली अग्रणी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) आरईसी लिमिटेड (REC Ltd) और 20 रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों के बीच समझौते होने की खबर है। इन ऊर्जा कंपनियों में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां भी हैं और निजी कंपनियां भी।

REC इन कंपनियों की हरित परियोजनाओं को कर्ज देगी। इनमें सौर, पवन, हरित हाइड्रोजन, डीकार्बनाइजेशन, बैटरी भंडारण सहित विभिन्न परियोजनाएं शामिल हैं। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इन परियोजनाओं के लिए लगभग 2 लाख करोड़ रुपये निवेश किए जाएंगे।

भारत इस वर्ष G-20 समूह की अध्यक्षता कर रहा है और यह MoU इस सम्मेलन से जुड़ी चर्चा का हिस्सा हैं। एनर्जी ट्रांजिशन वर्किंग ग्रुप की चौथी एवं अंतिम बैठक गोवा में चल रही है। इस मामले से वाकिफ सूत्रों ने कहा कि MoU के तहत भारत में काम कर रही देसी और विदेशी दोनों तरह की कंपनियों को कर्ज मिलेगा।

Also read: प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल निवेश पहली छमाही में 23 फीसदी घटकर 27.5 अरब डॉलर पर

इन परियोजनाओं के लिए कम ब्याज दरों पर कर्ज दिया जाएगा। कर्ज में मिलने वाली रकम इस क्षेत्र में आने वाली नई और महंगी प्रौद्योगिकी के लिए धन की कमी को पाटेगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ब्याज दर ताप विद्युत परियोजनाओं को दिए जाने वाले कर्ज की ब्याज दर से वैसे भी कम होती है। इस कर्ज का मकसद बड़े आकार की परियोजनाओं, खासकर नई तकनीक वाली परियोजनाओं की लागत का अंतर पाटना है।’

सूत्रों ने कहा कि REC अपने पोर्टफोलियो में हरित परियोजनाओं की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है। REC आम तौर पर ताप विद्युत परियोजनाओं एवं बिजली वितरण क्षेत्रों के लिए कर्ज देती रही है। REC कई केंद्र प्रायोजित योजनाएं भी चला रही हैं। इनके तहत राज्य ऊर्जा एवं बिजली विभागों को अनुदान दिए जाते हैं। मगर कंपनी अब केवल इन क्षेत्रों पर ही केंद्रित नहीं रहकर अपने कारोबार में विविधता लाने में जुट गई है।

Also read: भारत की अर्थव्यवस्था ‘महान शक्ति’ बनने की राह पर, 2050 तक अमेरिका को देगी टक्कर: वुल्फ

REC के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक विवेक कुमार देवांगन ने मई में कहा था कि कंपनी अपने ऋण खाते में हरित ऊर्जा क्षेत्रों की हिस्सेदारी 2030 तक मौजूदा 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत तक पहुंचाना चाहती है। देवांगन ने तब कहा था, ‘हमारे खाते परंपरागत या कोयले से चलने वाली परियोजनाओं की हिस्सेदारी 39 प्रतिशत और अक्षय ऊर्जा की 6.8 प्रतिशत है। वर्ष 2030 तक अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाकर 30 प्रतिशत तक करेंगे।‘

REC ने MoU से जुड़ी खबरों पर पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। मगर सूत्रों ने संकेत दिए कि कंपनी विदेश से रकम जुटाने और भारत में सस्ते ऋण देने की संभावनाओं पर विचार कर रही है।

First Published - July 20, 2023 | 10:36 PM IST

संबंधित पोस्ट