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चाबहार पोर्ट में 37 करोड़ डॉलर का निवेश होगा

इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (आईजीपीएल) को उम्मीद है कि पहले वर्ष में 30,000 ट्वेंटी-फुट इक्विवैलेंट यूनिट्स (टीईयू) या कंटेनर का ट्रैफिक आने की उम्मीद है।

Last Updated- May 14, 2024 | 10:41 PM IST
India, Iran signed long term operation agreement of terminal in Chabahar, trade will increase between 8 countries भारत, ईरान ने चाबहार में टर्मिनल के लॉन्ग टर्म ऑपरेशन समझौते पर हस्ताक्षर किए, 8 देशों के बीच बढ़ेगा व्यापार

ईरान के चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) के संचालन के लिए भारत के 10 साल के द्विपक्षीय समझौते से करीब 37 करोड़ डॉलर का निवेश होने की उम्मीद है। बिज़नेस स्टैंडर्ड को प्राप्त जानकारी के अनुसार इसमें भारत वहां आधारभूत ढांचे के लिए 12 करोड़ डॉलर का प्रत्यक्ष निवेश करेगा और 25 करोड़ डॉलर रा​शि ईरान को ऋण के रूप में दी जाएगी।

बंदरगाह के विकास के लिए भारत की 12 करोड़ डॉलर की प्रतिबद्धता है। इसके तहत भारत उन्नत उपकरण जैसे ‘रेल माउंटिड क्वे क्रेन’, ‘रबड़ टायर वाली गैंट्री क्रेन’ (ट्रांसट्रेनर), ‘रीच स्टैकर’, ‘फ्रोकलिफ्ट’ आदि खरीदेगा। इस कोष का इस्तेमाल संबंधित आधारभूत ढांचे के विकास में भी किया जाएगा।

अभी यह समझौता एक दशक के लिए है। इस मामले से जुड़े अधिकारियों के अनुसार इस एक दशक के समझौते को आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है और इससे भारत बंदरगाह संचालन के मध्यम अवधि के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सकता है।

इसमें मध्यस्थता ढांचे पर सर्वसम्मति की कमी सहित प्रमुख चिंताओं को हल किया गया है। मध्यस्थता ढांचे संबंधित मुद्दे पर पहले सर्वसम्मति नहीं बन पाई थी। दरअसल ईरान ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के प्रारूप को नकार दिया था और इसके लिए ईरान ने संवैधानिक संशोधन की जरूरत बताई थी। दूसरी तरफ, भारत विवाद समाधान में पारदर्शिता के लिए मध्यस्थता के उपबंध पर खासा जोर दे रहा था।

अधिकारियों के मुताबिक सोमवार को हुए हस्ताक्षर के अनुसार मध्यस्थता संबंधित मामले सिंगापुर के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (एसआईएसी) को भेजे जाएंगे। बातचीत की प्रक्रिया के बाद के चरण में कार्गो आवाजाही से संबंधित मसलों पर भी चर्चा हुई।

सूत्रों के मुताबिक ईरान ने रियायत आधारित बंदरगाह समझौते में न्यूनतम गारंटीड ट्रैफिक (एमजीटी) पर जोर दिया है। न्यूनतम कार्गो जरूरतों को पूरा नहीं करने की स्थिति में रियायत हासिल करने वाले पर दंड लग सकता है।

अ​धिकारी के अनुसार हस्ताक्षर किए गए चाबहार समझौते के अनुसार कार्गो लक्ष्य का उपबंध भी शामिल किया जा सकता है लेकिन ट्रैफिक का लक्ष्य हासिल नहीं होने की स्थिति में कोई दंड नहीं लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि गैर बाध्यकारी कार्गो लक्ष्य की बदौलत वाणिज्यिक हितों को आगे बढ़ाने और भविष्य में विवादों को कम करने में मदद मिलती है।

इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (आईजीपीएल) को उम्मीद है कि पहले वर्ष में 30,000 ट्वेंटी-फुट इक्विवैलेंट यूनिट्स (टीईयू) या कंटेनर का ट्रैफिक आने की उम्मीद है।

First Published - May 14, 2024 | 10:21 PM IST

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