facebookmetapixel
Advertisement
ऑल टाइम हाई के करीब Oil Stock पर ब्रोकरेज सुपर बुलिश, कहा- खरीद लें, 65% और चढ़ने का रखता है दमBharat PET IPO: ₹760 करोड़ जुटाने की तैयारी, सेबी में DRHP फाइल; जुटाई रकम का क्या करेगी कंपनीतेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेज

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा बोले- ब्याज दर में कटौती का असर दिखने लगा, लोन हुआ सस्ता और क्रेडिट डिमांड हुई तेज

Advertisement

RBI गवर्नर ने कहा कि दर कटौती से लोन सस्ता हुआ है, जिससे क्रेडिट ग्रोथ में तेजी आई और महंगाई पर नियंत्रण हुआ है।

Last Updated- July 26, 2025 | 3:08 PM IST
Sanjay Malhotra
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा | फाइल फोटो

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि फरवरी और अप्रैल में की गई ब्याज दरों में कटौती का असर अब पूरी तरह दिख रहा है। इससे बैंकों के नए लोन की दरें कम हुई हैं और अर्थव्यवस्था में कर्ज की मांग बढ़ रही है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस द्वारा आयोजित एक बैंकिंग समिट में बोलते हुए मल्होत्रा ने बताया कि जून के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, नए लोन की ब्याज दरें कम से कम 50 बेसिस पॉइंट्स यानी 0.5 फीसदी कम हो गई हैं। उन्होंने कहा कि 50 बेसिस पॉइंट्स की दर कटौती के दो महीने के भीतर ही इसका पूरा असर दिखना शुरू हो गया है, जो कर्ज और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।

गवर्नर ने यह भी साफ किया कि भविष्य में ब्याज दरों में और कटौती का फैसला आर्थिक विकास और महंगाई की स्थिति को देखकर लिया जाएगा। फरवरी से अब तक RBI की मौद्रिक नीति समिति ने रीपो रेट में कुल 100 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। जून की नीति में 50 बेसिस पॉइंट्स की कटौती के साथ ही समिति ने नीति के रुख को ‘उदार’ से बदलकर ‘तटस्थ’ कर दिया। इस बदलाव पर मल्होत्रा ने कहा कि तटस्थ रुख का मतलब यह नहीं है कि दरों में कटौती बंद हो जाएगी। बल्कि, अब दरों को बढ़ाने, घटाने या यथास्थिति बनाए रखने की पूरी गुंजाइश है। हालांकि, उन्होंने माना कि और कटौती के लिए पहले की तुलना में ज्यादा मजबूत आधार चाहिए होगा।

Also Read: ‘नीतिगत दर में कटौती का दिखा असर’, बोले RBI गवर्नर- इससे लोन हुआ सस्ता और क्रेडिट ग्रोथ में आई तेजी

महंगाई पर नजर, विकास को सहारा

मल्होत्रा ने कहा कि RBI का मुख्य लक्ष्य कीमतों को स्थिर रखना है, लेकिन यह आर्थिक विकास के लक्ष्य के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा, “वित्तीय स्थिरता के लिए आर्थिक विकास जरूरी है।” गवर्नर ने यह भी जोड़ा कि महंगाई के खिलाफ जंग अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा, “हमने महंगाई पर एक लड़ाई जंग जीत ली है, लेकिन अभी भी हमें और काम करना होगा। हमारी नजर हमेशा महंगाई पर रहेगी।” RBI ने वित्त वर्ष 2026 के लिए महंगाई दर 3.7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। पिछले महीने हेडलाइन महंगाई छह साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थी।

बैंकिंग नियमों पर बात करते हुए मल्होत्रा ने कहा कि RBI पुराने नियमों को आसान करने पर काम करेगा। इसके लिए एक रेगुलेटरी रिव्यू सेल बनाया जाएगा, जो नियमों की समय-समय पर समीक्षा करेगा, पुराने नियम हटाएगा और जरूरी बदलाव करेगा ताकि वित्तीय स्थिरता को और मजबूत किया जा सके।

भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते पर बोलते हुए मल्होत्रा ने कहा कि देश को ऐसे और समझौतों की जरूरत है। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि यह समझौता हमारे लिए फायदेमंद होगा। वैश्विक स्तर पर बहुपक्षीय व्यापार कम हो रहा है, इसलिए ऐसे समझौते अब जरूरी हैं।”

Advertisement
First Published - July 26, 2025 | 3:08 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement