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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर इस हफ्ते बड़ी वार्ता, टैरिफ संकट खत्म करने की कोशिश तेज

ये अमेरिकी अधिकारियों का दूसरा दौरा है, जब से रूस से कच्चा तेल खरीदने की वजह से भारत के सामान पर अमेरिका ने 25 फीसदी टैरिफ और अतिरिक्त 25 फीसदी पेनल्टी लगा दी है

Last Updated- December 08, 2025 | 8:22 PM IST
India US Trade Deal
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

नई दिल्ली में इस हफ्ते भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर अहम बातचीत होने वाली है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय की एक टीम 9 से 11 दिसंबर तक भारत आएगी। इस टीम की अगुवाई डिप्टी यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव रिक स्विट्जर कर रहे हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, 10 और 11 दिसंबर को सभी व्यापार से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी।

इस टीम में अमेरिका के मुख्य वार्ताकार और दक्षिण व मध्य एशिया के लिए असिस्टेंट यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ब्रेंडन लिंच भी शामिल होंगे। वे भारत के मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य विभाग के जॉइंट सेक्रेटरी दर्पण जैन से मिलेंगे। वहीं, रिक स्विट्जर खुद भारत के कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल से बात करेंगे। ये मीटिंग इसलिए खास है क्योंकि दोनों देश समझौते के पहले चरण को जल्द पूरा करने की कोशिश में जुटे हैं।

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टैरिफ की टेंशन के बीच वार्ता

ये अमेरिकी अधिकारियों का दूसरा दौरा है, जब से रूस से कच्चा तेल खरीदने की वजह से भारत के सामान पर अमेरिका ने 25 फीसदी टैरिफ और अतिरिक्त 25 फीसदी पेनल्टी लगा दी है। पिछली बार अमेरिकी टीम 16 सितंबर को भारत आई थी। उसके कुछ दिन बाद, 22 सितंबर को कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल भी अमेरिका गए थे और वहां व्यापार बातचीत की थी। गोयल इससे पहले मई में भी वॉशिंगटन जा चुके हैं।

कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने हाल ही में कहा है कि भारत को उम्मीद है कि इस साल के अंत तक अमेरिका के साथ एक फ्रेमवर्क व्यापार समझौता हो जाएगा, जो भारतीय निर्यातकों के लिए टैरिफ की समस्या को फायदा पहुंचाते हुए हल करेगा। उनका कहना है कि पूरा द्विपक्षीय व्यापार समझौता तो वक्त लेगा, लेकिन फ्रेमवर्क डील से आपसी टैरिफ की चुनौती दूर हो सकती है।

दरअसल, भारत और अमेरिका दो अलग-अलग ट्रैक पर बात कर रहे हैं। एक टैरिफ दूर करने वाला फ्रेमवर्क समझौता और दूसरा बड़ा व्यापार समझौता चाह रहा है। फरवरी में दोनों देशों के नेताओं ने अधिकारियों को समझौता करने का निर्देश दिया था। योजना थी कि 2025 के पतझड़ तक पहला चरण पूरा हो जाए। इसको लेकर अब तक छह राउंड की वार्ताएं हो चुकी हैं।

इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार को 2030 तक दोगुना से ज्यादा करके 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है, जबकि अभी ये करीब 191 अरब डॉलर का है। 2024-25 में लगातार चौथे साल अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझेदार रहा, जहां द्विपक्षीय व्यापार 131.84 अरब डॉलर का था। इसमें भारत का निर्यात 86.5 अरब डॉलर रहा। अमेरिका भारत के कुल माल निर्यात का करीब 18 फीसदी लेता है, जबकि आयात में 6.22 फीसदी और कुल व्यापार में 10.73 फीसदी हिस्सा है।

निर्यातकों का कहना है कि समझौता जरूरी है क्योंकि अक्टूबर में अमेरिका जाने वाला भारतीय सामान लगातार दूसरे महीने घटा और 8.58 फीसदी गिरकर 6.3 अरब डॉलर रह गया। इसका बड़ा कारण वॉशिंगटन की तरफ से लगाई गई भारी टैरिफ है।

(PTI के इनपुट के साथ)

First Published - December 8, 2025 | 8:01 PM IST

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