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भारत का निर्यात घटा, व्यापार घाटा 9 महीने की ऊंचाई पर; चीन समेत तमाम देशों के लिए FDI नियमों में बदलाव की भी तैयारी

निर्यातकों के संगठन फियो के अध्यक्ष ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार बाधाओं के साथ कच्चे तेल, कमोडिटी एवं धातुओं की कीमतों में भारी गिरावट के कारण निर्यात में कमी आई।

Last Updated- August 14, 2024 | 10:47 PM IST
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दुनिया भर में मांग घटने और भू-राजनीतिक चुनौतियां होने के कारण निर्यात की रफ्तार सुस्त पड़ती दिख रही है। जुलाई में भारत से होने वाला निर्यात 1.48 फीसदी घटकर 33.98 अरब डॉलर रहा। निर्यात की यह रफ्तार पिछले आठ महीनों में सबसे कम रही।

वाणिज्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई में आयात 7.46 फीसदी इजाफे के साथ 57.48 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इससे व्यापार घाटा 23.5 अरब डॉलर हो गया। पिछले साल जुलाई में देश को 19 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ था।

वाणिज्य सचिव सुनील बड़थ्वाल ने कहा कि जुलाई में वस्तुओं के निर्यात में 4 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई, मगर कुल निर्यात गिर गया। इसकी मुख्य वजह कच्चे तेल का आयात बढ़ना और कमजोर मांग के कारण पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात घटना है।

बड़थ्वाल ने कहा, ‘पेट्रोलियम निर्यात में गिरावट की कई वजहें हैं। पहली वजह कीमतों में गिरावट है और दूसरी वजह कुछ उत्पादों की मांग में कमी है। तीसरा कारण देश के भीतर पेट्रोलियम उत्पादों की खपत बढ़ना भी है, जिसके कारण निर्यात के लिए कम पेट्रो उत्पाद बचे।’

कुल निर्यात में पेट्रोलियम उत्पादों की हिस्सेदारी 15 फीसदी से अ​धिक है। जुलाई में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 22 फीसदी गिरकर 5.23 अरब डॉलर रहा और कच्चे तेल तथा पेट्रोलियम का आयात 17.4 फीसदी बढ़कर 13.87 अरब डॉलर हो गया।

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि तेल तथा दूसरे उत्पादों के मामले में घाटा बढ़ने से जुलाई 2023 के मुकाबले जुलाई 2024 में वस्तु व्यापार घाटा बढ़ गया। उन्होंने कहा, ‘तेल आयात पर खर्च बढ़ने से पता चलता है कि अधिक मात्रा में तेल मंगाया गया, दुनिया भर में उसकी कीमत बढ़ गईं और छूट भी कम हो रही है।’

पेट्रोलियम और रत्नाभूषण के अलावा दूसरे क्षेत्रों को निर्यात की सेहत बताने वाला सही पैमाना कहा जाता है। यह निर्यात जुलाई में 5.7 फीसदी बढ़कर 26.92 अरब डॉलर हो गया। इसमें इजाफे को रफ्तार देने वाली इंजीनियरिंग वस्तु (3.66 फीसदी), इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तु (37.31 फीसदी), औष​धि (8.36 फीसदी) और कपड़ा (11.84 फीसदी) रहीं।

कच्चे तेल एवं पेट्रोलियम उत्पादों के अलावा इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं (11.54 फीसदी), अलौह धातु (17.4 फीसदी), लौह एवं इस्पात (5.22 फीसदी), प्ला​स्टिक सामग्री (6.67 फीसदी) और कार्बनिक एवं अकार्बनिक रसायन (8.1 फीसदी) का आयात ज्यादा रहा। जुलाई में सोने का आयात 10.65 फीसदी घटकर 3.13 अरब डॉलर रह गया। मगर नायर ने कहा कि केंद्रीय बजट के बाद सीमा शुल्क घटाए जाने का कारण अगले कुछ महीनों में सोने का आयात बढ़ सकता है। अप्रैल से जुलाई की अव​धि में हर महीने 3 से 3.4 अरब डॉलर के सोने का ही आयात हुआ।

निर्यातकों के संगठन फियो के अध्यक्ष अ​श्विनी कुमार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार बाधाओं के साथ कच्चे तेल, कमोडिटी एवं धातुओं की कीमतों में भारी गिरावट के कारण निर्यात में कमी आई। उन्होंने कहा, ‘कुछ निर्यातकों ने देसी बाजार का रुख किया है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय माल भाड़े में जबरदस्त वृद्धि के कारण निर्यात में मुनाफा काफी कम हो गया है।’

जुलाई में सेवाओं का निर्यात 8.4 फीसदी बढ़कर 28.43 अरब डॉलर हो गया, जबकि सेवाओं का आयात 5.9 फीसदी बढ़कर 14.55 अरब डॉलर हो गया। इससे 13.88 अरब डॉलर का अ​धिशेष रहा। मगर जुलाई के लिए सेवाओं के निर्यात का आंकड़ा अनुमानित है, जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़े जारी होने के बाद संशोधन किया जाएगा।

इस बीच उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) चीन सहित तमाम देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति बदलने की तैयारी कर रहा है। एक वरिष्ठ सरकारी अ​धिकारी ने बताया कि DPIIT दिशानिर्देश तैयार कर रहा है और इसके लिए हितधारकों की राय भी ली जा रही है।

First Published - August 14, 2024 | 10:47 PM IST

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