भारत इस साल और अगले साल सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था (Economy) बना रहेगा और लगातार मजबूत सरकारी खर्च से इकॉनमी को बढ़ावा मिलेगा। रॉयटर्स के सर्वे में शामिल अर्थशास्त्रियों ने यह बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि मुद्रास्फीति फिर से बढ़ने की संभावना नहीं है।
भारतीय अर्थव्यवस्था ने मार्च के अंत तक इस वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सरकार ने मई में होने वाले राष्ट्रीय चुनाव के मद्देनजर विकास की गति को बढ़ाने के लिए पहले से ही खर्च को बढ़ाया है।
अधिकांश सरकारी खर्च बुनियादी ढांचे के निर्माण में
हाल के वर्षों में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का अधिकांश सरकारी खर्च बुनियादी ढांचे के निर्माण में गया है। निजी निवेश और रोजगार सृजन पिछड़ गया है, जिससे पता चलता है कि सरकार आर्थिक वृद्धि में बड़ी भूमिका निभाना जारी रखेगी।
चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था 6.9 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी
10 से 23 जनवरी के बीच 54 अर्थशास्त्रियों के सर्वे में अनुमान जताया गया है कि की गई कि चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था 6.9 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, जो दिसंबर के सर्वेक्षण में 6.7 फीसदी के पुराने अनुमान से ज्यादा है।
इसके बाद अगले वित्त वर्ष 2024-25 में अर्थव्यवस्था के 6.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया है, जो पिछले सर्वेक्षण के समान ही है।
महंगाई के नरम होने की उम्मीद
इस बीच भारत में खाद्य कीमतों के दबाव के कारण मुद्रास्फीति दिसंबर में चार महीनों में सबसे तेज गति से बढ़कर 5.69 प्रतिशत हो गई। अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि यह जल्द ही कम हो जाएगी।
पैंथियन मैक्रोइकॉनॉमिक्स के मुख्य उभरते एशिया अर्थशास्त्री मिगुएल चान्को ने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि मुद्रास्फीति शॉर्ट टर्म में काफी हद तक कम हो जाएगी और पहले से ही कम मुख्य मुद्रास्फीति के साथ नीचे की ओर बढ़ेगी।”