पीरामल फार्मा ने गुरुवार को कहा कि उसे अपने ठेके पर उत्पाद विकास एवं उत्पादन (सीडीएमओ) व्यवसाय की मांग में सुधार के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं, भले ही इस सेगमेंट को साल भर इन्वेंट्री कम होने और शुरुआती ऑर्डर मिलने में धीमी गति के कारण दबाव का सामना करना पड़ा।
तिमाही नतीजों की घोषणा के बाद मीडिया से बातचीत में कंपनी की अध्यक्ष नंदिनी पीरामल ने कहा कि प्रस्तावों के अनुरोध (आरएफपी) में तेजी आई है, साथ ही अमेरिका में बायोफार्मा फंडिंग की स्थिति में सुधार हो रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि आरएफपी को ठोस ऑर्डर में बदलने में आमतौर पर समय लगता है। उन्होंने कहा, ‘ये रिकवरी के शुरुआती संकेत हैं। आरएफपी में वृद्धि हुई है, लेकिन ऑर्डर में बदलने में लगभग छह महीने लगेंगे।’
पीरामल फार्मा ने वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में समेकित आधार पर 136 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को 3.6 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था। परिचालन से राजस्व 3 फीसदी घटकर 2,139.8 करोड़ रुपये रह गया, जो वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में 2,204 करोड़ रुपये था। पीरामल फार्मा ने बुधवार देर रात नतीजों की घोषणा की। गुरुवार को कंपनी का शेयर 0.39 प्रतिशत गिर गया और दिन के कारोबार के आखिर में बीएसई पर 153.65 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुआ।
कंपनी ने खराब प्रदर्शन का मुख्य कारण अपने एक बड़े ऑन-पेटेंट कमर्शियल प्रोडक्ट में लगातार इन्वेंट्री कम होना बताया, जिससे उसके सीडीएमओ व्यवसाय पर असर पड़ा।
तीसरी तिमाही में कंपनी के सीडीएमओ व्यवसय से राजस्व पिछले साल की तुलना में 9 प्रतिशत घटकर 1,166 करोड़ रुपये रह गया।
नंदिनी ने सीडीएमओ के लिहाज से यह साल कमजोर करार दिया, हालांकि अमेरिकी बायोटेक फंडिंग में सुधार, विलय और अधिग्रहण तथा आईपीओ गतिविधि को मध्यावधि मांग के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि पीरामल फार्मा को ज्यादा आरएफपी गतिविधि दिख रही है।