यूरोपीय विमान निर्माता कंपनी एयरबस का मानना है कि भारत में रीजनल टर्बोप्रॉप बाजार बढ़ेगा और देश के विमानन तंत्र को और ज्यादा लोकतांत्रिक बनाएगा। यह बात कंपनी के भारत और दक्षिण एशिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक जर्गेन वेस्टरमेयर ने गुरुवार को कही।
बुधवार को, बोइंग कमर्शियल एयरप्लेन्स में भारत और यूरेशिया के प्रबंध निदेशक (मार्केटिंग) अश्विन नायडू ने कहा था कि अगले 20 साल में भी भारत में रीजनल जेट्स की संख्या 10 से ज्यादा होने की संभावना नहीं है, क्योंकि एक रूट पर प्रति सीट उनकी लागत ज्यादातर एयरलाइंस के लिए फायदेमंद नहीं है।
एयरबस और बोइंग की ये टिप्पणियां ब्राजील की एयरक्राफ्ट निर्माता कंपनी एम्ब्रेयर और अदाणी डिफेंस ऐंड एरोस्पेस द्वारा मंगलवार को भारत में एक रीजनल जेट निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए एक समझौता किए जाने के बाद सामने आई हैं।
गुरुवार को विंग्स इंडिया 2026 समिट में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान वेस्टरमेयर ने कहा, ‘हम आम तौर पर क्षेत्रीय बाजार और क्षेत्रीय एयर ट्रैफिक को आगे वृद्धि के लिए एक अच्छे मौके के तौर पर देखते हैं। मुझे कहना होगा कि एयरबस के बड़े पोर्टफोलियो में, हमारे पास एटीआर (रीजनल जेट) एक प्रोडक्ट के तौर पर है, जो मेरी राय में, रीजनल ट्रैफिक को सपोर्ट करने में सबसे बेहतर है। इस (एटीआर विमान) को सपोर्ट करने के लिए एक इकोसिस्टम मौजूद है। इसकी प्रतिस्पर्धी क्षमता बहुत अच्छी है।’
भारत में, एयरबस क्षेत्रीय विमानन खंड में बोइंग के मुकाबले ढांचे के हिसाब से बेहतर स्थिति में है, क्योंकि इसका एटीआर से मजबूत जुड़ाव है। एटीआर एक फ्रेंच-इटैलियन टर्बोप्रॉप निर्माता है जिसमें एयरबस की 50 फीसदी हिस्सेदारी है।
बोइंग के नायडू ने बुधवार को कहा था कि भारत में रीजनल जेट्स को आर्थिक और एयरपोर्ट क्षमता की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि रूट छोटे विमानों के लिए जल्दी ही छोटे पड़ जाते हैं, जिससे लंबी अवधि के परिचालन के लिए सिंगल-आइजल प्लेन ज्यादा फायदेमंद होते हैं।