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जून में विनिर्माण गतिविधियां 14 महीने की ऊंचाई पर, निर्यात और रोजगार से मिला बल

जून 2025 में भारत की विनिर्माण गतिविधियों ने 14 महीनों की सबसे तेज़ रफ्तार पकड़ी, निर्यात ऑर्डर और रोजगार में जबरदस्त बढ़ोतरी से उत्पादन में जोरदार उछाल आया।

Last Updated- July 01, 2025 | 10:48 PM IST
Manufacturing Sector
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

विनिर्माण गतिविधियों में जून के दौरान पिछले 14 महीने की सबसे तेज रफ्तार दर्ज की गई। एसऐंडपी ग्लोबल के सर्वेक्षण में आज बताया गया कि जून में निर्यात काफी तेज रहा और रोजगार में भी बढ़ोतरी हुई।

कारखानों में होने वाली हलचल की बानगी देने वाला एसऐंडपी ग्लोबल का एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) जून में बढ़कर 58.4 पर पहुंच गया, जो मई में 57.6 था। विनिर्माण बढ़ता है तो पीएमआई 50 के ऊपर रहता है और इसका 50 के नीचे जाना दर्शाता है कि विनिर्माण कमजोर पड़ा है। मगर पिछले 48 महीने से इसके आंकड़े विनिर्माण में तेजी ही दिखा रहे हैं।

सर्वे में कहा गया है, ‘पिछले 20 साल के सर्वेक्षण में यह जून उन महीनों में शुमार रहा, जब कंपनियों ने बाहर से आने वाले ऑर्डरों में सबसे तेज इजाफा देखा। कारखानों ने भी पिछले 14 महीनों में सबसे ज्यादा कच्चा माल इसी महीने खरीदा। इससे उनका स्टॉक भी काफी बढ़ गया।’

उत्पादन की मात्रा भी अप्रैल 2024 के बाद सबसे तेज रफ्तार से बढ़ी क्योंकि कारखानों ने ज्यादा कारगर तरीके से काम किया, मांग तेज रही और बिक्री में भी वृद्धि देखी गई। इस तेजी को सबसे बड़ा सहारा इंटरमीडिएट वस्तु बनाने वालों से मिला मगर उपभोक्ता और पूंजीगत वस्तुओं में सुस्ती रही। सर्वे में कहा गया है, ‘जून में नए निर्यात ऑर्डर बहुत तेजी से बढ़े। पीएमआई के आंकड़े जुटाने का काम मार्च 2005 से शुरू किया गया था और उसके बाद से विनिर्माण में तीसरी सबसे ज्यादा तेजी जून में ही दिखी। कंपनियों के पास दुनिया भर से मांग आई और अमेरिका उसमें प्रमुख रहा।’

एचएसबीसी में चीफ इंडिया इकनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, ‘मांग मजबूत रहने से उत्पादन, नए ऑर्डरों और रोजगार में भी इजाफा हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से खास तौर पर मांग ज्यादा रही, जिसे पूरा करने के लिए भारतीय विनिर्माण फर्मों को अपना स्टॉक इस्तेमाल करना पड़ा और तैयार माल का स्टॉक घटता रहा। कच्चे माल के दाम घटे और औसत बिक्री मूल्य बढ़ा क्योंकि कुछ विनिर्माताओं ने बढ़ती लागत का थोड़ा हिस्सा अपने ग्राहकों पर डाला।’

First Published - July 1, 2025 | 10:48 PM IST

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