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भारत की सबसे बड़ी फर्टिलिटी क्लीनिक चेन Indira IVF को खरीदने के लिए होड़, कई वैश्विक फंड लाइन में

Last Updated- June 07, 2023 | 10:58 PM IST

भारत की सबसे बड़ी फर्टिलिटी क्लीनिक श्रृंखला इंदिरा आईवीएफ को खरीदने के लिए वैश्विक फंड कतारबद्ध हो रहे हैं। हालिया खबरों से पता चलता है कि बैरिंग पीई एशिया ईक्यूटी, ब्लैकस्टोन, बैन कैपिटल, एडवेंट इंटरनैशनल और टीपीजी कैपिटल ने इंदिरा आईवीएफ में बहुलांश हिस्सेदारी हासिल करने के लिए गैर-बाध्यकारी बोलियां पेश की हैं।

इस सौदे में श्रृंखला का मूल्य 8,000 करोड़ रुपये से 10,000 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है और नया निवेशक 60 प्रतिशत तक की नियंत्रित हिस्सेदारी पर विचार कर रहा है।

इस श्रृंखला में इतनी ज्यादा दिलचस्पी होने की एक अच्छी वजह है। अगर आप केवल महानगरों पर ही नजर डालें, तो छह जोड़ों में से एक जोड़ा इनफर्टिलिटी (बांझपन) से प्रभावित है। इसलिए भारत में फर्टिलिटी क्लीनिकों के बढ़ते बाजार की गुंजाइश काफी ज्यादा है। अब तो और भी ज्यादा है क्योंकि केंद्र सरकार सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (एआरटी) के लिए नियमों को कड़ा करने के लिए कदम उठा रही है।

सरकार के इस कदम से सबसे ज्यादा फायदा संगठित कंपनियों को होगा और इन संगठित कंपनियों में 1,200 करोड़ वाली उदयपुर की इंदिरा आईवीएफ फर्टिलिटी क्लीनिक की श्रृंखला सबसे बड़ी है। वर्तमान में इसके पास भारतीय आईवीएफ बाजार की 16 से 17 प्रतिशत हिस्सेदारी है तथा देश भर में 116 क्लीनिक चलाती है। कुछ समय से यह साझेदारी के जरिये भी विस्तार करना चाह रही है।

टीए एसोसिएट्स द्वारा समर्थित इंदिरा आईवीएफ के मुख्य कार्याधिकारी और सह-संस्थापक क्षितिज मुर्डिया ने अप्रैल में बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया था कि उनके 50 प्रतिशत से अधिक केंद्र अब मध्य और छोटे शहरों तथा कस्बों में हैं।

उन्होंने कहा था कि डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के अनुमान के अनुसार भारत में छह जोड़ों में से एक जोड़ा (महानगरों में) इनफर्टिलिटी से पीड़ित है और इनफर्टिलिटी जितनी शहरी समस्या है, उतनी ही ग्रामीण समस्या भी है।

संगठित आईवीएफ क्षेत्र, जिसकी 6,000 करोड़ रुपये वाले इस बाजार में 17 से 18 प्रतिशत की हिस्सेदारी है, 15 से 20 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। यह संपूर्ण उद्योग, जिसमें एकल चिकित्सक क्लीनिक, असंगठित कंपनियां और संगठित श्रृंखलाएं शामिल हैं, 12 से 15 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।

आईवीएफ के प्रत्येक चक्र की लागत लगभग 1.7 लाख रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक की रहती है। गर्भावस्था के नौ महीने की अवधि को ध्यान में रखें, तो एक से डेढ़ लाख रुपये और जुड़ जाते हैं। भारत में सालाना 2,00,000 से 2,50,000 या अधिक आईवीएफ चक्र दर्ज किए जाते हैं।

First Published - June 7, 2023 | 10:58 PM IST

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