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देश में बनेगा ‘स्पेस इंटेलिजेंस’ का नया अध्याय, ULOOK को ₹19 करोड़ की फंडिंग

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SpaceTech इस फंड का इस्तेमाल शोध-विकास तेज़ करने, तकनीकी टीम बढ़ाने और अपने सैटेलाइट सिस्टम्स के प्रोटोटाइप तैयार करने में करेगी।

Last Updated- November 08, 2025 | 3:03 PM IST
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बेंगलुरु स्थित स्पेस इंटेलिजेंस कंपनी ULOOK Technologies ने रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) सेंसिंग और स्पेक्ट्रम जागरूकता के लिए काम करने वाले स्वायत्त सैटेलाइट स्वार्म विकसित करने के उद्देश्य से ₹19 करोड़ की सीड फंडिंग जुटाई है। यह राउंड growX ventures और InfoEdge Ventures ने नेतृत्व किया।

कंपनी का कहना है कि यह निवेश ULOOK के इंडियन-निर्मित RF इंटेलिजेंस समाधान को तेजी से विकसित करने में मदद करेगा। कंपनी का उद्देश्य देश की स्पेस और सुरक्षा से जुड़े तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है।

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ULOOK के सह-संस्थापक और सीईओ सिद्धेश नायक ने बताया कि विदेशों के एडवांस स्पेस प्रोग्राम और भारत के एरियल प्रोजेक्ट्स में काम करने का अनुभव होने के बाद भी वे मानते हैं कि जटिल डीप-टेक समाधान भारत में ही लागत प्रभावी तरीके से बनाए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब नियामकीय माहौल ऐसी कंपनियों के लिए अनुकूल है और वे यहां सफल हो सकती हैं।

कंपनी इस फंड का इस्तेमाल शोध-विकास तेज करने, तकनीकी टीम बढ़ाने और अपने सैटेलाइट सिस्टम्स के प्रोटोटाइप तैयार करने में करेगी।

InfoEdge के संस्थापक संजीव बिखचंदानी ने कहा कि अगला दशक भारत में गहरी तकनीक (Deeptech) के लिए बहुत अहम होगा। इसके लिए धैर्य, लंबा समय और ऐसे संस्थापक चाहिए जो रिसर्च को असली तकनीक में बदल सकें। उन्होंने ULOOK की टीम की काबिलियत, उनके इंजीनियरिंग ज्ञान और स्पष्ट योजना की तारीफ की। उन्होंने कहा कि ULOOK ने ऐसे उपकरण बना लिए हैं जो अंतरिक्ष के मानक पर खरे उतरते हैं, और यह इस स्तर पर काफी दुर्लभ है।

GrowX Ventures के पार्टनर मनीष गुप्ता ने कहा कि ULOOK का काम स्मार्ट और अपने आप काम करने वाले उपग्रह बनाने का है। उन्होंने कहा कि टीम का अनुभव और मिशन बहुत स्पष्ट है, यही चीज उन्हें सबसे ज्यादा आकर्षित कर रही है।

ULOOK की स्थापना नाइक और अधीश बोरतकार ने की है। टीम के पास कई नजदीकी पृथ्वी कक्षा (LEO) के उपग्रह, ड्रोन फ्लीट और उच्च-ऊंचाई वाले उपग्रह तकनीक का अनुभव है।

कंपनी का खास पेलोड सिस्टम “PulseTrack” छोटे उपग्रहों, ड्रोन और उच्च-ऊंचाई वाले प्लेटफॉर्म पर काम करता है। यह समुद्री निगरानी, छुपे हुए जहाज़ों का पता लगाना, आपदा में मदद और पर्यावरण निगरानी में इस्तेमाल हो सकता है।

ULOOK की बड़ी खोज “RF Fingerprinting from Space” है। इसका मतलब है कि वे अंतरिक्ष से रेडियो सिग्नल की पहचान करके स्रोत और उसकी गतिविधि को समझ सकते हैं। इससे देशों को अपने रेडियो नेटवर्क और सुरक्षा को बेहतर तरीके से देखने और सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

कुल मिलाकर, निवेशकों ने ULOOK की तकनीक, टीम और मिशन को देखकर इसमें निवेश किया है।

भारतीय स्पेसटेक कंपनी ULOOK ने अपनी वैश्विक दृष्टि साझा करते हुए बताया कि वह भारत से दुनिया के लिए स्पेस टेक्नोलॉजी विकसित कर रही है। कंपनी के सह-संस्थापक और CTO बोराटकर ने कहा, “अंतरिक्ष अपने स्वभाव में वैश्विक है। हमारा लक्ष्य भारतीय प्रतिभा और तकनीक के साथ विश्व स्तरीय क्षमताओं का निर्माण करना है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के अनुरूप हो।”

अगले 12–18 महीनों में ULOOK स्वार्म ऑटोनॉमी, इंटर-सैटेलाइट लिंक और ऑनबोर्ड AI के क्षेत्र में बड़े प्रयोग करेगी। इसके तहत कंपनी अपना पहला RF-सेंसिंग सैटेलाइट स्वार्म लॉन्च करेगी। इसके साथ ही कंपनी एरियल टेस्टिंग प्रोग्राम्स को भी बढ़ाएगी और अपने शोध व इंजीनियरिंग क्षमताओं को मजबूत करेगी। यह कदम कंपनी को प्रोटोटाइप से कमर्शियल लॉन्च तक ले जाने में मदद करेगा, जिसमें राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान, रक्षा क्षेत्र और रणनीतिक उद्योग साझेदार शामिल होंगे।

ULOOK ने अपनी नई फंडिंग का एक बड़ा हिस्सा प्रतिभा भर्ती पर खर्च करने का प्लान बनाया है। कंपनी का लक्ष्य है कि वह RF सिस्टम डिज़ाइन, एम्बेडेड सिस्टम, AI/ML एनालिटिक्स और सैटेलाइट मिशन इंजीनियरिंग में माहिर पेशेवरों और युवा नवाचारकों की टीम तैयार करे। इसके अलावा फंड का उपयोग पेलोड क्वालिफिकेशन, हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और UAV-आधारित टेस्टिंग में भी किया जाएगा, जिससे तकनीक को वास्तविक परिस्थितियों में परखा जा सके और इसे TRL-3 से TRL-7 तक विकसित किया जा सके।

इस फंडिंग के साथ ULOOK उन भारतीय स्पेसटेक स्टार्टअप्स में शामिल हो गई है, जो वैश्विक स्तर पर समाधान तैयार कर रहे हैं। स्पेस, AI और एडवांस्ड सेंसिंग के संगम पर आधारित ULOOK की तकनीकें भारत के इनोवेशन-आधारित स्वराज्य की दिशा को मजबूत करती हैं और देश को अगली पीढ़ी के स्पेस सिस्टम बनाने, संचालित करने और वैश्विक सिचुएशनल अवेयरनेस बढ़ाने में सक्षम बनाती हैं।

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First Published - November 8, 2025 | 2:52 PM IST

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