facebookmetapixel
Home Loan: ₹15 लाख बचाने का फॉर्मूला, जिसे 90% लोग नजरअंदाज करते हैंIndia-US Trade Deal: 30 ट्रिलियन डॉलर का US बाजार भारत के लिए खुला, किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित- गोयलविमानन सुरक्षा पर उठे सवाल: क्या निजी चार्टर उड़ानों के लिए सख्त होंगे DGCA के नियम?India-US Trade Deal: भारत-US व्यापार संबंधों में नई शुरुआत, अंतरिम समझौते का खाका तयIT शेयरों में कोहराम: AI के बढ़ते प्रभाव से हिला निवेशकों का भरोसा, एक हफ्ते में डूबे ₹6.4 लाख करोड़NBFCs के लिए RBI की बड़ी राहत: ₹1000 करोड़ से कम संपत्ति वाली कंपनियों को पंजीकरण से मिलेगी छूटRBI Monetary Policy: रीपो रेट 5.25% पर बरकरार, नई GDP सीरीज आने तक ‘तटस्थ’ रहेगा रुखट्रंप ने फिर किया दावा: मैंने रुकवाया भारत-पाकिस्तान के बीच ‘परमाणु युद्ध’, एक दिन में दो बार दोहरायाइस्लामाबाद में बड़ा आत्मघाती हमला: नमाज के दौरान शिया मस्जिद में विस्फोट, 31 की मौतखरगे का तीखा हमला: पीएम के 97 मिनट के भाषण में कोई तथ्य नहीं, सवालों से भाग रही है सरकार

पश्चिम एशिया में तनाव से भारत के तेल आपूर्ति पर कोई प्रभाव नहीं, रूस और खाड़ी देश बने सहारा

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद भारत की कच्चे तेल और एलएनजी आपूर्ति स्थिर बनी हुई है, रूस और खाड़ी देशों से आयात व्यवस्था मजबूत और संतुलित बनी हुई है।

Last Updated- June 13, 2025 | 11:03 PM IST
Crude Oil
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पश्चिम एशिया में ताजा तनाव से भारत की कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना नहीं है। आपूर्ति व्यवस्था व्यापक और मजबूत बनी हुई है और खाड़ी से आयात में व्यवधान पैदा नहीं होगा।  पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘कच्चे तेल का आयात प्रभावित होने की उम्मीद नहीं है। हमारे पास अपनी मध्यम अवधि की मांग के अनुमान के अनुरूप अच्छा स्टॉक भी उपलब्ध है। हम पूरी स्थिति पर नजर रख रहे हैं।’ उन्होंने बताया कि ताजा संकट से आयात को सीधे तौर पर कोई खतरा नहीं है, क्योंकि भारत ईरान से कच्चा तेल नहीं लेता है।

एनर्जी कार्गो ट्रैकर वोर्टेक्स के अनुमान के अनुसार तेल आयातकों ने हाल के महीनों में रूसी क्रूड पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसका आयात मई में 6 महीने के उच्च स्तर पर रहा, जिसमें लगभग 16 लाख बैरल प्रति दिन (बी/डी) की आवक होने का अनुमान है। इस बीच, पश्चिम एशिया में अन्य पारंपरिक भागीदारों से आयात स्थिर रहा है। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 25 में रूस के बाद इराक (27.35 अरब डॉलर), सऊदी अरब (20.09 अरब डॉलर) और संयुक्त अरब अमीरात (13.86 अरब डॉलर) भारत के लिए क्रूड के दूसरे, तीसरे और चौथे सबसे बड़े स्रोत रहे हैं। इन देशों से आने वाले कच्चे तेल की हिस्सेदारी में हाल के महीनों में धीमी लेकिन स्थिर वृद्धि देखी गई है, क्योंकि रूसी क्रूड पर छूट कम हो गई थी और सरकार लगातार अपने तेल आयात के विविधीकरण पर जोर दे रही है।

Also Read: ईरान पर इजरायल के हमले के बाद शेयर बाजार में गिरावट, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी

7 अक्टूबर, 2023 को हमास के हमले के बाद पश्चिम एशिया में भड़कने वाले क्षेत्रीय संघर्षों के बावजूद इस क्षेत्र से कच्चे तेल की आपूर्ति में संभावित व्यवधान पैदा होने का डर सच नहीं हुआ है।

अधिकारियों ने कहा कि एक प्रमुख कारण यह है कि ईरान ने अभी तक होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करने का प्रयास नहीं किया है। भारत द्वारा खरीदे गए सभी प्रकार के कच्चे तेल का आधे से अधिक और कम से कम 80 प्रतिशत प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से गुजरती है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि यदि ईरान जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करने का प्रयास करता है तो इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से कच्चे तेल का संपूर्ण प्रवाह खतरे में पड़ सकता है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ऊर्जा बाजारों में व्यापक लाभ को देखते हुए शुक्रवार दोपहर के कारोबार में प्राकृतिक गैस की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई है।

First Published - June 13, 2025 | 10:23 PM IST

संबंधित पोस्ट