रूस से भारत में कच्चे तेल का आयात दिसंबर में घटकर 3 साल के निचले स्तर पर आ गया है। रूस की कंपनियों पर पश्चिम के देशों की सख्ती के कारण तेल शोधकों द्वारा आयात को लेकर सावधानी बरतने से ऐसा हुआ है।
मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर में रूस से भारत में होने वाले तेल का आयात नवंबर की तुलना में करीब 38 प्रतिशत कम होकर 11.4 लाख बैरल रोजाना रह गया है। नवंबर में भारत ने रूस से रोजाना 18.3 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात किया था।
अमेरिका ने रूस के प्रमुख तेल उत्पादकों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर 21 नवंबर से प्रतिबंध लगाए थे, जिनकी रूस से भारत में होने वाले तेल आयात में करीब 60 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके अलावा यूरोपीय संघ ने भी 18वें प्रतिबंध पैकेज के तहत रूस से यूरोप में तेल आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था।
रूस के छूट के बावजूद भारत के रिफाइनरों ने पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण तेल खरीद कम कर दी है। बिज़नेस स्टैंडर्ड को दो अधिकारियों ने बताया कि इस समय रूस ने भारतीय रिफाइनरों की छूट दोगुना कर करीब 5 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है।
अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद रोसनेफ्ट रूस से भारत की सबसे बड़ी तेल आपूर्तिकर्ता बनी हुई है, जबकि लुकोइल ने भी तेजी से तेल की आपूर्ति की है। केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक रोसनेफ्ट ने करीब 6,67,000 बैरल प्रतिदिन और लुकोइल ने 46,000 बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल की आपूर्ति दिसंबर में भारत के रिफाइरों को की है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा है, जबकि मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को रोसनेफ्ट से तेल खरीद के लिए अमेरिका से एक महीने की छूट मिल गई है, जो रूस के कच्चे तेल की सबसे बड़ी खरीदार है। आरआईएल ने रोसनेफ्ट से करीब 5 लाख बैरल प्रतिदिन खरीद के लिए दीर्घावधि समझौता किया हुआ है कंपनी ने कहा कि था कि उसने जामनगर (गुजरात) में अपने निर्यात केंद्रित विशेष आर्थिक क्षेत्र की रिफाइनरी में रूसी तेल का आयात बंद कर दिया है, घरेलू टैरिफ क्षेत्र में आने वाले या 20 नवंबर के बाद आने वाले रूसी तेल कार्गो को प्रॉसेस किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में रूस से कच्चे तेल के आयात में गिरावट निकट अवधि का समायोजन प्रतीत होता है, और नए मध्यस्थों के आने से जनवरी से धीरे धीरे आयात बढ़ने लगेगा।