भारत में एलएनजी का खुदरा कारोबार 2030 तक ईंधन के उपयोग में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है लेकिन इसका 2025 में प्रदर्शन कम रहा। उद्योग के अनुमान के अनुसार एलएनजी खुदरा आउटलेट और एलएनजी चालित ट्रकों दोनों की ही वृद्धि दर उद्योग जगत की अपेक्षाओं से नीचे रही। उद्योग के सूत्रों के अनुसार चीन ने इस क्षेत्र में जबरदस्त वृद्धि की है लेकिन भारत के यातायात क्षेत्र में एलएजी को कोई प्रोत्साहन नहीं दिया जाता है।
उद्योग की बड़ी कंपनियों और वाहन पोर्टल के मुताबिक एलएनजी से चलने वाले ट्रकों की वृद्धि 2025 में सालाना आधार पर 75 प्रतिशत बढ़कर 1,309 रही जबकि 2025 की शुरुआत में यह आंकड़ा तीन गुना अधिक होने की संभावना जताई गई थी। एलएनजी चालित ट्रकों की वृद्धि 2024 में 747 थी। हालांकि शेल कंपनी के अनुमानों के अनुसार चीन में 1,78,000 से अधिक भार क्षमता वाले गैस चालित ट्रक बेचे गए थे।
एस्सार समर्थित ब्लू एनर्जी मोटर्स की योजना भारत में अगले कुछ वर्षों में 10,000 एलएनजी और बिजली चालित ट्रकों का उत्पादन करना है। हालांकि टाटा मोटर्स, वोल्वो और अशोक लीलैंड ने आंकड़ों का खुलासा नहीं किया है।
बहरहाल, एलएनजी के खुदरा विक्रेता एलएनजी चालित भारी वाहनों को तेजी से बढ़ाने को लेकर संशय में हैं। ऐसे आउटलुट में काम करने वाले उद्योग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘अगले कुछ वर्षों में 5,000 ट्रकों को सड़क पर उतारना टेढ़ी खीर है।’ उन्होंने बताया, ‘वर्ष 2026 में ऐसे 1,000 ट्रकों का उत्पादन भी बढ़ी बात है। इसका अर्थ है कि एक दिन में तीन ट्रकों का उत्पादन।’हालांकि चीन में ऐसा नहीं है।
यूके की मार्केट इंटेलिजेंस प्रदाता एनर्जी इंटेलिजेंस के मुताबिक चीन में 2022 की तुलना में एलएनजी से चलने वाले ट्रकों की हिस्सेदारी 2024 में 30 प्रतिशत बढ़ी है। शेल के मुताबिक यह आंकड़ा अगले पांच वर्षों में 10 लाख का आंकड़ा छू सकता है। चीन में 2025 में सालाना आधार पर एलएनजी चालित इन ट्रकों की खपत 22 प्रतिशत बढ़कर इस साल 2.03 करोड़ टन हो गई। यह भारत में सभी क्षेत्रों की एलएनजी खपत का 80 प्रतिशत है। एलएनजी चालित ट्रक पर्यावरण के लिए लाभदायक हैं। भारत के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में व्यापक परिवहन क्षेत्र का योगदान लगभग 14 प्रतिशत है और भारी मालवाहक ट्रक परिवहन क्षेत्र की कुल ऊर्जा खपत का 49 प्रतिशत से अधिक हिस्से का उपभोग करते हैं।
सड़क पर एलएनजी चालित कम ट्रकों के कारण एलएनजी खुदरा आउटलेट कम रहे। सरकारी कंपनी के अधिकारी ने बताया कि सरकारी कंपनियों सहित कुछ अन्य कंपनियों के आउटलेट कम खरीदार होने के कारण बंद हो गए। भारत का सबसे बड़ा रिफाइनर इंडियन ऑयल नए आउटलेट बनान ने की अपनी योजना की समीक्षा कर रहा है। इसका कारण यह है कि सड़क पर एलएनजी चालित वाहन कम है। इस सिलसिले में रिफाइनर टिप्पणी देने के लिए उपलब्ध नहीं थे।
भारत में 39 खुदरा एलएनजी आउटलेट हैं। इन खुदरा आउटलेट में इंडियन ऑयल के 11 और एस्सार समर्थित अल्ट्रा गैस व एनर्जी के 8 खुदरा आउटलेट है। हालांकि यूरोपियन यूनियन में ऐसे 700 से अधिक खुदरा आउटलेट हैं। यूरोप में ऐसे ज्यादातर आउटलेट जर्मनी और इटली में हैं। सरकारी रिफाइनर एलएनजी के खुदरा आउटलेट के विस्तार को थाम रहे हैं। इनका विस्तार मौजूदा खुदरा आउटलेट के विस्तार के बाद किया जाएगा।