India Petroleum Exports: 2025 में भारत के पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात ने अब तक का सबसे ऊंचा स्तर छू लिया है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंध, रूस-यूक्रेन युद्ध और स्वेज नहर में अनौपचारिक रुकावटों के बावजूद भारत का फ्यूल निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। इसकी सबसे बड़ी वजह विदेशों में बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन रही, जो युद्ध के कारण बने हालात से पैदा हुई।
फ्यूल निर्यात भारत के कुल निर्यात का वैल्यू के हिसाब से 10 फीसदी से ज्यादा हिस्सा रखता है। यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल हुई है, जब यूरोपीय यूनियन ने भारत की एक बड़ी निजी रिफाइनरी और रूसी कच्चे तेल से बने ईंधन की सप्लाई पर प्रतिबंध लगाए हैं।
मैरीटाइम इंटेलिजेंस एजेंसी केपलर (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में भारत का फ्यूल निर्यात बढ़कर 12.8 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया, जो पिछले साल से करीब 4 फीसदी ज्यादा है। इसमें सबसे बड़ा योगदान रिलायंस इंडस्ट्रीज का रहा।
पहली बार सरकारी कंपनी मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स (MRPL) भारत की दूसरी सबसे बड़ी फ्यूल निर्यातक बनी है। इसने रूस की रोसनेफ्ट संचालित नायरा एनर्जी को पीछे छोड़ दिया।
Kpler के एनालिस्ट सुमित रितोलिया के मुताबिक भारत का अच्छा प्रदर्शन रिफाइनरियों के ज्यादा इस्तेमाल, फ्लैक्सिबल टेक्नॉलजी और एशिया व यूरोप में बेहतर बाजार अवसरों के कारण संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में HPCL की नई रिफाइनरी, पानीपत रिफाइनरी के विस्तार और अन्य संयंत्रों में उत्पादन बढ़ने से आगे भी फ्यूल निर्यात को मजबूती मिलेगी।
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सरकारी तेल कंपनियों की जिम्मेदारी देश की 55 लाख बैरल प्रतिदिन की घरेलू मांग को पूरा करना है। इसी वजह से निजी कंपनियों के पास निर्यात के लिए ज्यादा फ्यूल उपलब्ध रहता है।
रेटिंग एजेंसी इक्रा के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ के अनुसार, आने वाले समय में भारत का पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात स्थिर बना रह सकता है।
2025 में रिलायंस ने 9.11 लाख बैरल प्रतिदिन फ्यूल का निर्यात किया, जो भारत के कुल फ्यूल निर्यात का करीब 71 फीसदी है। कंपनी ने साफ किया है कि वह यूरोपीय यूनियन के नियमों का पालन करते हुए रूसी कच्चे तेल का इस्तेमाल नहीं कर रही है। जामनगर स्थित उसकी निर्यात-केंद्रित रिफाइनरी में रूसी तेल नहीं जाता।
MRPL ने 1.21 लाख बैरल प्रतिदिन, जबकि नायरा एनर्जी ने 1.07 लाख बैरल प्रतिदिन फ्यूल का निर्यात किया। MRPL का भारत के कुल फ्यूल निर्यात में हिस्सा 9 फीसदी से ज्यादा रहा।
2025 में नायरा एनर्जी का निर्यात पिछले साल की तुलना में 15 फीसदी घट गया। जुलाई में यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के बाद नायरा को कई देशों से कच्चा तेल मिलना बंद हो गया और यूरोप को निर्यात पर भी रोक लग गई।
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इसके बाद इराक और सऊदी अरब ने भी नायरा को तेल की सप्लाई रोक दी। अगस्त के बाद से नायरा को सिर्फ रूस से ही कच्चा तेल मिल रहा है। नवंबर में नायरा ने करीब 4 लाख बैरल प्रतिदिन और दिसंबर में 3.29 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल आयात किया।
एशिया के बाद यूरोप भारत का दूसरा सबसे बड़ा फ्यूल खरीदार बना रहा। भारत के कुल फ्यूल निर्यात में यूरोप की हिस्सेदारी करीब 21 फीसदी रही।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार जनवरी से नवंबर 2025 के बीच भारत ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से करीब 52 अरब डॉलर की कमाई की। वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 44.4 अरब डॉलर रहा, जो भारत के कुल निर्यात का 10 फीसदी से ज्यादा है।