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2026 तक 52 डॉलर तक गिर सकता है कच्चा तेल? रुपये में भी लौटेगी मजबूती! जानें क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट

वैश्विक सप्लाई ज्यादा रहने से तेल की कीमतों पर दबाव, SBI, केडिया और नुवामा की रिपोर्ट में पेट्रोल-डीजल, महंगाई और रुपये को लेकर अहम संकेत

Last Updated- January 06, 2026 | 11:23 AM IST
India petroleum exports

अंतरराष्ट्रीय बाजार में Crude Oil एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वेनेजुएला से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम ने भले ही कुछ समय के लिए कीमतों को सहारा दिया हो, लेकिन क्या यह तेजी टिक पाएगी? जानकारों का कहना है कि बाजार की असली तस्वीर इससे अलग है। अलग-अलग रिसर्च और एनालिस्ट रिपोर्ट्स इशारा कर रही हैं कि वैश्विक स्तर पर सप्लाई ज्यादा होने के कारण तेल की कीमतों में आगे और गिरावट आ सकती है, जिसका असर सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पेट्रोल-डीजल के दाम, महंगाई, रुपये की चाल और देश की आर्थिक रफ्तार पर भी दिख सकता है।

केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट: वेनेजुएला तनाव का सीमित असर

केडिया एडवाइजरी के अनुसार, WTI कच्चा तेल करीब 58 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। वेनेजुएला को लेकर अमेरिकी कदमों से कीमतों में थोड़ी तेजी जरूर आई, लेकिन बाजार पर इसका लॉन्गटर्म असर नहीं दिख रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वेनेजुएला का वैश्विक तेल उत्पादन एक प्रतिशत से भी कम है, इसलिए उसकी सप्लाई में किसी भी रुकावट का असर सीमित रहेगा। वहीं, दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर्याप्त बनी हुई है, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है। सऊदी अरब ने एशिया के देशों के लिए तेल सस्ता किया है और OPEC+ ने अभी तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला टाल दिया है। इससे साफ है कि बाजार में तेल भरपूर है।

SBI रिसर्च: 2026 में और सस्ता हो सकता है Crude Oil

SBI रिसर्च के मुताबिक, जब OPEC+ ने तेल का उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया, तभी से Crude Oil के दाम कमजोर बने हुए हैं। बाद में उत्पादन थोड़ा घटाया भी गया, लेकिन इससे दामों में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022 के बाद से ब्रेंट और भारत में इस्तेमाल होने वाले कच्चे तेल के दाम ज्यादातर नीचे ही रहे हैं। बीच-बीच में कुछ देशों के बीच तनाव की वजह से दाम थोड़े बढ़े, लेकिन वेनेजुएला से जुड़ी ताजा घटनाओं का दामों पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।

SBI का अनुमान है कि 2026 की शुरुआत में ब्रेंट कच्चा तेल औसतन 55 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रह सकता है। क्योंकि भारतीय कच्चे तेल के दाम ब्रेंट से जुड़े होते हैं, इसलिए भारत में भी आगे तेल सस्ता हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 तक इंडियन बास्केट करीब 53 डॉलर और जून 2026 तक करीब 52 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है।

महंगाई, पेट्रोल-डीजल और रुपये पर असर

SBI रिसर्च के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा असर पेट्रोल-डीजल के दामों पर पड़ेगा। इससे ईंधन की कीमतें घट सकती हैं और महंगाई दर में और कमी आने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे FY27 में औसत CPI महंगाई 3.4% से नीचे रह सकती है। तेल सस्ता होने से भारत का आयात बिल घटेगा, जिससे रुपये को मजबूती मिलेगी। अनुमान है कि डॉलर के मुकाबले रुपया 87.5 के आसपास आ सकता है। साथ ही, कम ऊर्जा कीमतों से देश की GDP वृद्धि दर में 0.10 से 0.15 प्रतिशत अंक तक का सुधार हो सकता है।

नुवामा की रिपोर्ट: तेल-गैस कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी

नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुसार, Q3 FY26 में तेल और गैस सेक्टर की कुल कमाई (EBITDA) में 17% सालाना बढ़ोतरी हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज को रिफाइनिंग और डिजिटल कारोबार से फायदा होगा, जबकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की कमाई बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन के चलते बढ़ेगी। वहीं, ONGC को उत्पादन घटने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से नुकसान हो सकता है। GAIL और अन्य गैस कंपनियों पर भी दबाव बना रह सकता है। नुवामा ने निवेश के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज और पेट्रोनेट LNG को प्राथमिकता दी है, जबकि ONGC, OMCs, GAIL और CGD कंपनियों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।

First Published - January 6, 2026 | 11:00 AM IST

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