इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपननी एलऐंडटी अब वैश्विक परमाणु आपूर्ति श्रृंखला में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी की यह कवायद प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में परमाणु ऊर्जा की मांग में तेजी से वृद्धि के कारण है। भले ही कंपनी का 80 फीसदी परमाणु कारोबार घरेलू है मगर उसे उम्मीद है कि आने वाले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय अवसरों में तेजी से वृद्धि होगी, क्योंकि देश रुकी हुई परमाणु विस्तार योजनाओं में दोबारा जान फूंक रहे हैं और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) को बढ़ावा दे रहे हैं।
बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में एलऐंडटी (हैवी इंजीनियरिंग, सीई और आईपीडीडी) के पूर्णकालिक निदेशक और वरिष्ठ कार्यकारी उपाध्यक्ष अनिल परब ने कहा, ‘फिलहाल, हमारी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी मुख्य रूप से फ्रांस में बन रहे फ्यूजन रिएक्टर में है। हम परमाणु द्वीप और परिचालन संयंत्र सेवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला भागीदार बनने के अवसर तलाश रहे हैं। बातचीत अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है।’ उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हम अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और एशिया के अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बड़े अवसरों की उम्मीद करते हैं।
वैश्विक परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता साल 2040 तक 378 गीगावॉट से बढ़कर 575 गीगावॉट होने की उम्मीद है, जो वैश्विक बिजली मिश्रण में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी में लगभग 9 से 12 फीसदी की वृद्धि को दर्शाता है। परब ने कहा कि जहां एक ओर फुकुशिमा आपदा और बाद में कोविड महामारी के कारण पिछले 10 से 15 वर्षों में वैश्विक स्तर पर अधिकांश परमाणु परियोजनाओं में सीमित प्रगति देखी गई, वहीं गति अब वापस आ सकती है क्योंकि 32 से अधिक देश अगले दो दशकों में अपनी परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखते हैं।