facebookmetapixel
Advertisement
अगर युद्ध एक महीने और जारी रहा तो दुनिया में खाद्य संकट संभव: मैट सिम्पसनहोर्मुज स्ट्रेट खुला लेकिन समुद्री बीमा प्रीमियम महंगा, शिपिंग लागत और जोखिम बढ़ेपश्चिम एशिया युद्ध का भारत पर गहरा असर, रियल्टी और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव मेंगर्मी का सीजन शुरू: ट्रैवल और होटल कंपनियों के ऑफर की बाढ़, यात्रियों को मिल रही भारी छूटबाजार में उतार-चढ़ाव से बदला फंडरेजिंग ट्रेंड, राइट्स इश्यू रिकॉर्ड स्तर पर, QIP में भारी गिरावटपश्चिम एशिया संकट: MSME को कर्ज भुगतान में राहत पर विचार, RBI से मॉरेटोरियम की मांग तेजRCB की बिक्री से शेयरहोल्डर्स की बल्ले-बल्ले! USL दे सकती है ₹196 तक का स्पेशल डिविडेंडतेल में बढ़त से शेयर और बॉन्ड में गिरावट; ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत से इनकारगोल्डमैन सैक्स ने देसी शेयरों को किया डाउनग्रेड, निफ्टी का टारगेट भी घटायाकिधर जाएगा निफ्टीः 19,900 या 27,500; तेल और भू-राजनीति तनाव से तय होगा रुख

एआई, जेनएआई उपयोग कर रहा आईटी उद्योग

Advertisement

पोर्टफोलियो के कुछ हिस्से में एआई को शामिल कर 20 प्रतिशत लागत बचत कर सकते हैं।

Last Updated- April 21, 2025 | 9:59 PM IST
OpenAI india
प्रतीकात्मक तस्वीर

भारतीय आईटी सेवा कंपनियों को आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) और जेनरेटिव एआई (जेनएआई) में अभी तक बड़े सौदे हासिल नहीं हुए हैं। लेकिन लागत कम करने और परियोजना दक्षता बढ़ाने के लिए इनका अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे ग्राहकों को अपनी बचत का कुछ हिस्सा डिस्क्रेशनरी से जुड़ी पहलों में फिर से निवेश करने की सुविधा मिल रही है, भले ही मौजूदा माहौल अनिश्चितताओं से भरा है।

एआई और जेनएआई का बढ़ता इस्तेमाल पारंपरिक आईटी परियोजनाओं की लागत में बचत के तरीके में बदलाव बताता है जिसे रन-साइड के रूप में ज्यादा जाना जाता है। पिछले तीन वर्षों में इसने जोर पकड़ा है क्योंकि लेबर आर्बिट्राज और आईटी प्रक्रियाओं के मानकीकरण जैसी पारंपरिक लागत बचत तकनीकों की लोकप्रियता घट रही है।

सभी क्षेत्रों के उद्यम महसूस करने लगे हैं कि परियोजनाओं में जब तक एआई और जेनएआई जैसी तकनीकों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, तब तक लागत में अपेक्षित बचत नहीं मिलेगी। आईटी सेवा अधिकारियों का कहना है कि यह एक ऐसा रुझान है जो सभी चर्चाओं का हिस्सा बन गया है।

टीसीएस के मुख्य कार्याधिकारी के कृतिवासन ने कहा कि हालांकि पारंपरिक लागत अनुकूलन सौदे फिर से चर्चा में हैं, लेकिन इनमें अतिरिक्त कारक भी शामिल हैं, जैसे कि विक्रेता समेकन या एआई-आधारित लागत अनुकूलन।

उन्होंने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘कुछ खास सौदों में, एआई लागत घटाने में मदद कर सकता है। उदाहरण के लिए, हमने अपने एक ग्राहक को बताया कि वे अपने पोर्टफोलियो के कुछ हिस्से में एआई को शामिल कर 20 प्रतिशत लागत बचत कर सकते हैं। इसके बाद ग्राहक ने हमसे बड़े पोर्टफोलियो को संभालने, वैसा ही एआई समाधान अपनाने और सभी क्षेत्रों में समान बचत के तरीके पूछे।’

इन्फोसिस ने कहा कि उसके अधिकांश ग्राहक प्रक्रिया समाधान, इंजीनियरिंग और ग्राहक सेवा जैसे क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण उत्पादकता लाभ पर ध्यान दे रहे हैं।

Advertisement
First Published - April 21, 2025 | 9:59 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement