बेंचमार्क सूचकांक भले ही साल के आखिर में अपने सर्वकालिक उच्च स्तर के करीब हों, लेकिन व्यापक बाजार में रिटर्न एक अलग कहानी बयां करते हैं। लगभग 60 फीसदी यानी शीर्ष 1,000 में से 595 शेयरों ने एक साल पहले के मुकाबले नकारात्मक रिटर्न दिया है। इतना ही नहीं उनकी गिरावट का दायरा 70 फीसदी तक है।
अलग-अलग शेयरों की बात करें तो उनमें भारी गिरावट का कारण मुख्य तौर पर स्मॉलकैप शेयरों के टूटने को माना जा रहा है। बेंचमार्क सेंसेक्स अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से महज 0.9 फीसदी दूर है। सेंसेक्स ने इसी साल दिसंबर में अपने सर्वकालिक उच्च स्तर को छुआ था। एनएसई निफ्टी भी अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से महज 0.7 फीसदी दूर है। निफ्टी मिडकैप100 करीब 1.4 फीसदी दूर है, लेकिन निफ्टी स्मॉलकैप100 सूचकांक अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से 10.2 फीसदी नीचे है।
खुदरा निवेशक स्मॉलकैप शेयरों के रिटर्न से निराश हैं। उन्होंने अपने पोर्टफोलियो में शामिल स्मॉलकैप शेयरों को बेच दिए हैं और आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) और सोना जैसे अन्य विकल्पों की ओर रुख किया है। वायदा एवं विकल्प (एफऐंडओ) कारोबार की बढ़ती लोकप्रियता को भी कुछ बिकवाली का कारण माना जा रहा है।
अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यूआर भट्ट ने कहा, ‘स्मॉलकैप शेयरों के निवेशकों का एक बड़ा हिस्सा खुदरा निवेशक और घरेलू स्मॉलकैप फंड रहे हैं। इस साल बाजार में व्यापक आधार पर सुधार नहीं हुआ। खुदरा निवेशक ने शायद आईपीओ में पैसा लगाना शुरू कर दिया है ताकि सूचीबद्धता दिन की बढ़त का फायदा उठाया जा सके।’
भट्ट ने कहा कि पिछले साल सितंबर तिमाही में कंपनी जगत के मुनाफे में गिरावट आई थी और उसने उच्च मूल्यांकन को अनुचित बना दिया। मगर गिरावट के बावजूद निफ्टी स्मॉलकैप100 सूचकांक अपने एक साल के फॉरवर्ड अर्निंग के आधार पर 24.6 प्राइस-टू-अर्निंग अनुपात पर कारोबार कर रहा है, जबकि 10 साल का औसत 18.3 है। निफ्टी स्मॉलकैप250 सूचकांक भी अपने एक साल के फॉरवर्ड अर्निंग के 25.2 गुना पर कारोबार कर रहा है और उसका 10 साल का औसत 18.7 है।
आगे स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बहाल करने के लिए आय में सुधार करना बेहद जरूरी होगा। भट्ट ने कहा, ‘आर्थिक वृद्धि, जीएसटी सुधार और दर में कटौती जैसे नीतिगत उपायों को बेहतर कॉरपोरेट नतीजों में बदलना होगा। तभी बाजारों में व्यापक आधार वाली तेजी आएगी। साथ ही एफपीआई का शुद्ध लिवाल बनना और भारत-अमेरिका व्यापार तनाव का समाधान बाजार स्थितियों को बेहतर करते हुए धारणा को मजबूत कर सकता है।’
इक्विनॉमिक्स के संस्थापक जी. चोक्कालिंगम ने कहा, ‘स्मॉलकैप सूचकांक कुछ शेयरों में गिरावट की सीमा को नहीं दर्शाते हैं। सोने में आई तेजी को दोहराए जाने की संभावना भी नहीं है। मगर निवेशकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दमदार कारोबार, टिकाऊ लाभ और
मूल्यांकन में सहजता हो। साथ ही प्राइस/अर्निंग-टू-ग्रोथ (पीईजी) अनुपात के 2 से 2.5 गुना से अधिक पर कारोबार करने वाले शेयरों में निवेश करने से बचना चाहिए।’