चीन ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में भारत के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत भारत की ओर से आईटी सामान पर लगाए गए आयात शुल्क और सोलर पीवी मॉड्यूल के लिए PLI स्कीम को लेकर है। WTO के नियमों के मुताबिक, किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए परामर्श मांगना पहला कदम होता है।
चीन का आरोप है कि भारत ने कुछ तकनीकी सामानों पर जो कस्टम ड्यूटी लगाई है, वह वैश्विक टैरिफ सीमा से ज्यादा है। इन सामानों में सेमीकंडक्टर डिवाइस, मोबाइल और वायरलेस नेटवर्क के फोन, सेमीकंडक्टर बनाने वाली मशीनें, और अन्य आईटी उत्पाद शामिल हैं। चीन का कहना है कि यह WTO के नियमों के खिलाफ है।
चीन ने भारत की सोलर पीवी मॉड्यूल के लिए PLI स्कीम को भी चुनौती दी है। चीन का दावा है कि इस योजना में लोकल वैल्यू एडिशन की शर्तें हैं, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के अनुरूप नहीं हैं। उसका कहना है कि यह योजना घरेलू उत्पादों के इस्तेमाल को बढ़ावा देती है और आयातित सामानों के खिलाफ भेदभाव करती है। इसलिए यह सब्सिडी की श्रेणी में आती है, जो WTO नियमों का उल्लंघन है।
WTO ने कहा है कि चीन ने आरोप लगाया है कि भारत की टैरिफ नीति और कुछ अन्य उपाय घरेलू इनपुट के इस्तेमाल से जुड़े हैं और चीनी आयात के खिलाफ भेदभाव करते हैं। यह अनुरोध 23 दिसंबर को WTO के सभी सदस्यों के बीच साझा किया गया। अगर भारत और चीन के बीच परामर्श से कोई समाधान नहीं निकलता, तो चीन WTO से विवाद निपटान पैनल बनाने की मांग कर सकता है।
बता दें, चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और सबसे बड़ा आयात सोर्स है। मौजूद वित्त वर्ष के अप्रैल से अक्टूबर के बीच भारत ने चीन को 10 अरब डॉलर का निर्यात किया जबकि चीन से आयात करीब 74 अरब डॉलर रहा।
भारत सरकार ने सोलर पीवी मॉड्यूल पर PLI स्कीम 2021 में शुरू की थी। इस स्कीम का मकसद घरेलू निवेश बढ़ाना, सोलर सेक्टर में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, और आयात पर निर्भरता कम करना है।