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शिप रिसाइक्लिंग पर सरकार की बड़ी तैयारी: हॉन्ग कॉन्ग कंवेंशन के अनुरूप कड़े नियम जल्द

बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने जहाज रिसाइक्लिंग अधिनियम, 2019 के बुधवार से लागू होने वाले कई बाध्यकारी उपबंध अधिसूचित कर दिए हैं

Last Updated- December 26, 2025 | 10:02 AM IST
Ship Recycling in India
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

Ship Recycling: केंद्र सरकार पर्यावरण खतरे और श्रमिकों की सुरक्षा के मद्देनजर पानी के जहाजों की रिसाइक्लिंग को विनियमित करने के लिए कड़े मानदंड जल्दी जारी करेगी। अधिकारियों ने बताया कि यह मानदंड पानी के जहाजों की सुरक्षित और उचित रिसाइक्लिंग की हॉन्ग कॉन्ग कंवेंशन के अनुरूप होंगे।

बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने जहाज रिसाइक्लिंग अधिनियम, 2019 के बुधवार से लागू होने वाले कई बाध्यकारी उपबंध अधिसूचित कर दिए हैं। ये उपबंध 2019 में घोषित किए गए थे लेकिन इन्हें हॉन्ग कॉन्ग कंवेंशन को अपनाने तक लंबित रखा गया था।

इनमें शामिल उपबंधों में जहाज और उसके उपकरणों में खतरनाक सामग्री की अनिवार्य रजिस्ट्री बनाना, सरकारी प्रतिनिधि (संयुक्त सचिव से वरिष्ठ अधिकारी) को सर्वेक्षण करने और अनुपालन का प्रमाणपत्र जारी की अनुमति देना हैं।

वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘ये दिशानिर्देश हॉन्ग कॉन्ग कंवेंशन से पूरी तरह मेल खाते हैं और यह भारत को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दिलाने में समर्थ हैं। इस सिलसिले में मंत्रालय शीघ्र ही दिशानिर्देश जारी करेगा। उद्योग इन दिशानिर्देशों के लिए लंबे समय से तैयारी कर रहा है। अधिनियम के उपबंधों को लागू किया गया है ताकि जब विनियमन लागू हो तो वह उसके अनुरूप हों।

इस क्रम में सरकार ने भी मौजूदा यार्ड में अपनी मदद व जानकारी मुहैया करवाई थी ताकि विनियमन लागू होने की स्थिति में कानून का पालन हो। अधिकारी ने बताया कि भारत के करीब 90 प्रतिशत यार्ड इन दिशानिर्देशों का पालन कर रहे हैं और इन्हें इन नियमों के लागू होने से फायदा होगा।।

इस क्षेत्र पर नजर रखने वालों के मुताबिक दक्षिण एशिया में जहाज की रिसाइक्लिगं और तोड़ना तेजी से बढ़ रहा है। इस मामले में भारत और बांग्लादेश प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।  दरअसल, जहाज की रिसाइक्लिंग में कई पर्यावरणीय, श्रमिकों की सुरक्षा और अन्य मुद्दे होते हैं। पुराने जहाजों में आमतौर पर खतरनाक रसायन, जंग खाई हुई सामग्री होती है और इनसे सुरक्षा व स्वास्थ्य को खतरा पैदा होता है।

अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के अनुसार पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने वाली और इस कंवेंशन से पहले अनियमित मानी जाने वाली वस्तुओं में एस्बेस्टस, भारी धातुएं, हाइड्रोकार्बन, ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थ व अन्य शामिल हैं।

इस मामले की जानकारी देने वाले अधिकारी के मुताबिक, ‘अलंग सहित अन्य यार्ड हॉन्ग कॉन्ग कंवेंशन का पहले से ही पालन कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि अन्य यार्ड भी शीघ्र पालन करना शुरू करेंगे।’

हॉन्ग कॉन्ग कंवेंशन मई, 2009 में स्वीकार की गई थी। यह कंवेंशन चीन स्थित हॉन्ग कॉन्ग में हुई थी।  आईएमओ के सदस्य देशों और गैर सरकारी संगठनों से मिले सुझावों के आधार पर अंतररष्ट्रीय श्रम संगठन और खतरनाक अपशिष्टों के सीमा पार आवागमन और उनके निपटान पर बेसल कन्वेंशन के पक्षकारों के सहयोग से हॉन्ग कॉन्ग कंवेंशन तैयार की गई थी। 

भारत के नियमों में जहाज रिसाइक्लिगं की प्रक्रिया और उससे पहले की प्रक्रिया के लिए विस्तृत प्रक्रियाएं व जांच प्रस्तावित किए गए हैं ताकि पर्यावरण को होने वाले जोखिम से निपटा जा सके और श्रमिकों की सुरक्षा तय हो।

शिप रिसाइक्लिंग की प्रक्रिया में जोखिम रहता ही है। जैसे तेल रिसाव से संबंधित उपधारा में कहा गया है कि जहाज को रिसाइक्लि करने वाले को तेल रिसाव होने की स्थिति में पर्यावरण को होने वाले नुकसान का भुगतान अदा करना होगा। ऐसे मामले में वे सफाई अभियान के लिए भी उत्तरदायी होंगे। नए दिशानिर्देश कई अन्य समुद्री जोखिमों से संबंधित हैं।

ईवाई इंडिया के पार्टनर कुलजीत सिंह ने कहा, ‘इससे भारत में ऐसे जहाज रिसाइक्लिंग संयंत्रों के संचालन की लागत में वृद्धि होगी। हालांकि उम्मीद है कि वैश्विक जहाज मालिक भारत के शिप रिसाइक्लिंग यार्ड की ओर अधिक रुख करेंगे। इससे लागत संतुलित हो जाएगी। इसके अलावा भारत को शिप रिसाइक्लिंग के बाजार में अधिक हिस्सेदारी मिलेगी।’

आईएमओ के मुताबिक जहाजों को पहले शुरुआती सर्वे करना होगा। शुरुआती सर्वे में खतरनाक पदार्थों की सूची का सत्यापन किया जाएगा। जहाज के जीवनकाल में ही रिन्युएबल सर्वे किए जाएंगे। अंतिम सर्वे रिसाइक्लिंग से पहले होगा। शिप रिसाइक्लिंग यार्ड को रिसाइक्लिंग योजना की जानकारी देनी होगी।

इसमें हरेक जहाज को उसके अनुसार और इंवेटरी के अनुसार रिसाइक्लिंग करने का तरीका होगा। लिहाजा भारत को जहाजों के रिसाइक्लिंग का केंद्र बनने के लिए अधिक कदम उठाने होंगे।

First Published - December 26, 2025 | 9:38 AM IST

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