facebookmetapixel
Advertisement
क्या चावल निर्यात कर भारत बेच रहा है अपना पानी? BS ‘मंथन’ में एक्सपर्ट्स ने उठाए गंभीर सवालBS Manthan में बोले एक्सपर्ट्स: निर्यात प्रतिबंध-नीतिगत अनिश्चितता से कृषि को चोट, स्थिरता की जरूरतसुमंत सिन्हा का दावा: सिर्फ क्लाइमेट चेंज नहीं, अब ‘जियोपॉलिटिक्स’ बढ़ाएगी भारत में क्लीन एनर्जी की रफ्तारBS Manthan में बोले जोशी: अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में 2030 तक $350 अरब के निवेश से रोशन होगा भारतइक्विटी SIP निवेश में गिरावट, अस्थिर बाजार के बीच निवेशकों का रुझान बदलाशेखर कपूर की भविष्यवाणी: अब निर्देशक नहीं, दर्शक और AI मिलकर लिखेंगे फिल्मों की कहानी‘EV सेक्टर में आएगा बड़ा उछाल’, BS ‘मंथन’ में एक्सपर्ट्स ने कहा: चुनौतियों के बावजूद रफ्तार है बरकरारBS Manthan 2026: R&D को प्रोत्साहन से एडवांस व महंगी वस्तुओं के विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा‘रणनीतिक स्वायत्तता के लिए सैन्य ताकत बढ़ाना जरूरी’, बिज़नेस स्टैंडर्ड ‘मंथन’ में एक्सपर्ट्स ने ऐसा क्यों कहा?AI संप्रभुता पर जोर: BS Manthan समिट में एक्सपर्ट्स ने स्वदेशी मॉडल और डेटा नियंत्रण को बताया जरूरी

डिजिटल मार्केट पर अब सरकार का पहरा! ई-कॉमर्स मूल्य सूचकांक लाने की योजना, कीमतों पर रहेगी नजर

Advertisement

नए सूचकांक में उन वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य के सांख्यिकीय अनुमान होंगे, जिनकी खरीदारी लोग ई-कॉमर्स फर्मों के माध्यम से करते हैं। 

Last Updated- March 23, 2025 | 9:38 PM IST
quick commerce
प्रतीकात्मक तस्वीर

डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर उपलब्ध वस्तु और सेवाओं के मूल्य पर नजर रखने के लिए सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (मोस्पी) ई-कॉमर्स मूल्य सूचकांक पेश करने पर विचार कर रहा है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

नए सूचकांक में उन वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य के सांख्यिकीय अनुमान होंगे, जिनकी खरीदारी लोग ई-कॉमर्स फर्मों के माध्यम से करते हैं।

सूत्रों ने कहा, ‘यह मौजूदा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा महंगाई दर और थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के आधार पर फैक्टरियों से निकलने वाले माल की महंगाई मापने की तर्ज पर होगा। वे हमें उपभोक्ताओं और उद्योग द्वारा खरीदे जाने वाले सामान का क्रमशः तुलनात्मक मूल्य बताएंगे। सूचकांक के लिए इन सूचकांकों के समान ही वस्तुओं और सेवाओं का बास्केट बनाया जाएगा।’ यह इसलिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि ग्लोबलडेटा के ई-कॉमर्स एनालिटिक्स के मुताबिक भारत का ई-कॉमर्स बाजार 2024 के 12.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2028 तर 24.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। वहीं दूसरी तरफ, भारत में इंटरनेट कनेक्शन जून 2023 में 89.5 करोड़ थे, जबकि स्मार्टफोन की संख्या 2025 तक बढ़कर 1.1 अरब के आंकड़े को पार कर जाएगी।

सूचकांक बनाने के मकसद से मोस्पी ने ई-कॉमर्स फर्मों से उनके द्वारा बेची जा रही विभिन्न वस्तुओं व सेवाओं के आंकड़े साझा करने को कहा है, जो उन्होंने पिछले कुछ महीने में बेचा है। आंकड़े एकत्र करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को भी पत्र भेजा गया है। सूत्र ने कहा कि ‘हमने करीब 20 प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों को आंकड़े साझा करने के लिए पत्र लिखा है। अब तक बहुत प्रगति नहीं हुई है, ऐसे में हम अलग साधनों से इसकी कवायद कर रहे हैं।’

सीपीआई की तरह ही नए ई-कॉमर्स मूल्य सूचकांक में खाद्य उत्पादों, परिधान और फुटवियर, हाउसिंग, ईंधन और लाइट, स्वास्थ्य, शिक्षा, मनाेरंजन और आमोद-प्रमोद के अलावा अन्य चीजें शामिल होंगी, जिनकी बिक्री ई-कॉमर्स के माध्यम से होती है।

Advertisement
First Published - March 23, 2025 | 9:38 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement