देश में अगले साल मधुमेह और मोटापे के इलाज में काम आने वाली दवाएं सस्ती हो सकती हैं। क्योंकि अगले साल मार्च में मधुमेह टाइप-2 में दी जाने वाली अन्य दवा सेमाग्लूटाइड का पेटेंट समाप्त हो जाएगा, जिससे देश में सस्ती जेनेरिक दवाएं आने वाली हैं। उद्योग पर इनका प्रभाव पड़ सकता है। इसका सीधा असर मधुमेह और वजन घटाने में इस्तेमाल होने वाली ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1 (जीएलपी-1) पर पड़ने की संभावना है जिसका बाजार तो बढ़ेगा, लेकिन आर्थिक वृद्धि धीमी पड़ सकती है।
दवा उद्योग के अधिकारियों और डॉक्टरों के अनुसार देश में चिकित्सा सुविधाओं और सेवाओं के विस्तार से मरीज आधार तो बढ़ेगा, लेकिन इलाज बीच में छूटने की दर तेज होगी, क्योंकि लोगों पर इस दवा का दुष्प्रभाव होता है और वे लंबे समय तक उपचार जारी नहीं रख पाते। देश में मोटापा घटाने वाले 1,109 करोड़ रुपये के दवा बाजार में दो वैश्विक कंपनियां नोवो नॉर्डिस्क और एली लिली प्रमुख रूप से काम कर रही हैं।
फार्माट्रैक के उपाध्यक्ष (वाणिज्यिक) शीतल सापाले ने कहा, ‘जीएलपी-1 का बाजार आकार इसके पेश होने के कुछ महीनों के भीतर 1,000 करोड़ रुपये को पार कर गया और इस श्रेणी की सबसे तेजी से वृद्धि करने वाली दवाओं में से एक बन गई। इसका प्रमख कारण इसकी उच्च कीमत है।’ साथ ही सापाले ने यह भी कहा, ‘लेकिन अगले साल मार्च में सेमाग्लूटाइड का पेटेंट समाप्त होने वाला है। इसके बाद दवा की कीमतों में 80 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है, जिससे आर्थिक वृद्धि काफी धीमी पड़ जाएगी।’ फार्माट्रैक उपाध्यक्ष ने कहा कि कीमतों में गिरावट से खपत बढ़ेगी, लेकिन सेगमेंट को नई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा। क्योंकि वॉल्यूम ग्रोथ बढ़ने के साथ कंपनियों में प्रतिस्पर्धा भी तेज हो जाएगी।’
डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला, मैनकाइंड फार्मा और सन फार्मा जैसी कंपनियां पहले से ही भारत के 427 करोड़ रुपये के सेमाग्लूटाइड बाजार में प्रवेश की तैयारी कर रही हैं। सापाले ने कहा, ‘वर्तमान में 14 से अधिक एंटी-ओबेसिटी दवाएं बाजार में आने के लिए तैयार हो रही हैं। मांग में शुरुआती उछाल कुछ महीनों के भीतर कम हो सकती है, जिससे खपत का पैटर्न स्थिर हो सकता है।’
डॉक्टरों का कहना है कि दवा के व्यापक उपयोग से ड्रॉपआउट की दर भी बढ़ सकती है। दिल्ली के एक एंडोक्रिनोलॉजिस्ट ने कहा, ‘जैसे-जैसे अधिक रोगियों को ये दवाएं दी जाएंगी, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और अन्य साइड इफेक्ट भी अधिक दिखाई देंगे।’ जीएलपी-1 थेरेपी के सामान्य साइड इफेक्ट में मतली, उल्टी, दस्त और कब्ज शामिल हैं। डॉक्टरों ने कहा कि कुछ रोगियों में बालों के झड़ने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
मूल रूप से डायबिटीज के इलाज में काम आने वाली सेमाग्लूटाइड ने जनवरी 2022 में नोवो नॉर्डिस्क की ओरल दवा रायबेल्सस के साथ भारत में शुरुआत की थी। इस दवा ने तेजी से लोकप्रियता हासिल की और इसका वार्षिक कुल बिक्री राजस्व नवंबर 2022 में 71 करोड़ रुपये से बढ़कर नवंबर 2025 में 377 करोड़ रुपये हो गया। इस साल वजन घटाने के लिए सेमाग्लूटाइड ने तेजी से बाजार में पकड़ बनाई। इसके तीन इंजेक्शन- मार्च में मौंजारो, जून में वेगोवी और नवंबर में ओजेम्पिक पेश किए गए। इससे देश में मोटापा कम करने में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का बाजार तेजी से बढ़ा और 61.4 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि के साथ नवंबर 2025 में लगभग 1,109 करोड़ रुपये का हो गया, जो नवंबर 2022 में केवल 242 करोड़ रुपये था।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुमानों के अनुसार, देश में वर्ष 2023-24 में लगभग 10.1 करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित हैं और अन्य 13.6 करोड़ लोग मधुमेह से पूर्व दिखने लक्षणों से जूझ रहे हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि भारत में 25.4 करोड़ लोग सामान्यीकृत मोटापे और 35.1 करोड़ लोग पेट के मोटापे से भी ग्रस्त हैं। लेकिन, डॉक्टरों का कहना है कि ओजेम्पिक और मौंजारो को वर्तमान में केवल टाइप-2 मधुमेह के लिए दिया जाता है। डॉक्टर केवल मधुमेह रोगियों को ही इसे खिलाने की सलाह देते हैं।
एली लिली की मौंजारो (टिरज़ेपेटाइड) दवा मार्च में बाजार में उतारी गई थी और शुरुआती सात महीनों में ही 496 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की है। यह दवा इस साल अक्टूबर और नवंबर में देश में सबसे अधिक बिकने वाला उत्पाद बनकर उभरी है।
नोवो नॉर्डिस्क ने जून में मोटापा के इलाज के तौर पर वेगोवी पेश की थी, लेकिन इसकी खपत अपेक्षाकृत धीमी रही और नवंबर तक इसका कुल राजस्व लगभग 50 करोड़ रुपये रहा। बाजार की स्थिति को देखते हुए नोवो ने सभी तरह की खुराक की कीमतों में 30-35 प्रतिशत की कटौती कर दी। दवा उद्योग के एक कार्यकारी ने कहा, ‘कीमत में कमी के कारण वेगोवी की खपत में सिर्फ 15 दिनों में 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे अक्टूबर में इसकी बाजार हिस्सेदारी 9 प्रतिशत से बढ़कर नवंबर में 14 प्रतिशत हो गई।’ ओजेम्पिक लाने के साथ नोवो ने भारतीय बाजार में अपना सेमाग्लूटाइड पोर्टफोलियो पूरा कर लिया है।
डॉक्टरों का कहना है कि इन दवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। मुंबई के एक बैरियाट्रिक सर्जन ने कहा, ‘नए रोगी ही नहीं, पहले से वजन घटाने पर मेहनत कर रहे लोग इसकी पूछताछ कर रहे हैं।’