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फंडिंग में गिरावट, फिर भी भारतीय स्टार्टअप्स कर रहे धमाल – जानिए दिग्गज स्टार्टअप के फाउंडर्स से

भले ही फंडिंग में गिरावट आई हो और यूनिकॉर्न की संख्या घटी हो, लेकिन उद्योग जगत के दिग्गज भारतीय स्टार्टअप्स के भविष्य को लेकर आशावादी हैं।

Last Updated- March 01, 2025 | 7:25 AM IST
(L-R) Anshoo Sharma, CEO & co-founder of Magicpin; Achint Setia, CEO of Snapdeal; and Puneet Singh Jaggi, co-founder of BluSmart & Gensol at BS Manthan
(बाएं से दाएं) अंशु शर्मा, मैजिकपिन के सीईओ और सह-संस्थापक; अचिंत सेठिया, स्नैपडील के सीईओ; और पुनीत सिंह जग्गी, ब्लूस्मार्ट और जेनसोल के सह-संस्थापक, बीएस मंथन में।

लंबे समय तक रकम की कमी और यूनिकॉर्न की संख्या में कमी के बावजूद भारतीय उद्योग जगत स्टार्टअप की वृद्धि के को लेकर आशावादी बना हुआ है। शुक्रवार को बिजनेस स्टैंडर्ड मंथन के दूसरे संस्करण में उद्योग जगत के दिग्गजों ने जोर देते हुए कहा कि पूंजी निवेश की तुलना में नवाचार, लचीलापन और टिकाऊ व्यापार मॉडल ज्यादा मायने रखते हैं।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मैजिकपिन के सीईओ और सह-संस्थापक अंशु शर्मा ने कहा, पूंजी अपना रास्ता मूल्य सृजन की दिशा में खोज लेती है। इसमें झटके और कुछ उतार-चढ़ाव हो सकते हैं, लेकिन भारत में स्टार्टअप के नजरिए से हम स्वर्णिम युग में हैं। प्रौद्योगिकी के लिए जिस तरह की स्वीकृति और चाह है, साथ ही ऑपरेटरों और टीमों के भीतर समाधान तैयार करने की जो क्षमताएं हैं, वे अभूतपूर्व है।

पूंजी रिटर्न की तलाश में है। यही वजह है कि भारत में मल्टीपल इस तरह का है। भारत में कंपनियां प्रौद्योगिकी के माध्यम से मूल्य निर्माण कर रही हैं और फंड उस अवसर में निवेश करना चाहते हैं।

मार्केट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ट्रैक्सन के अनुसार 2025 में फरवरी तक इक्विटी फंडिंग के 235 दौर में 1.33 अरब डॉलर जुटाए जा चुके हैं। पिछले साल इसी अवधि में देश में 497 दौर में 2.46 अरब डॉलर जुटाए गए थे। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म स्नैपडील के सीईओ अचिंत सेतिया ने कहा कि कंपनियों की वृद्धि का सही मापदंड यूनिकॉर्न नहीं हैं। उन्होंने कहा, यह सही संदर्भ नहीं है।

हमें कुछ दशकों में विकसित होने वाले इकोसिस्टम पर ध्यान देना चाहिए, न कि केवल कुछ वर्षों में। वैश्विक स्तर पर एक समय था जब फंडिंग आसान थी, अमेरिका में ब्याज दरें कम थीं और कंपनियों को जितना संभव था, उतना मिल रहा था, लेकिन वह चक्र बदल गया है।

2022 की तेजी के बाद भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम ने इस तरह की कोई फंडिंग नहीं जुटाई है। 2021 में स्टार्टअप इकोसिस्टम ने कुल 37.7 अरब डॉलर की फंडिंग जुटाई, 2022 में उन्होंने 25.9 अरब डॉलर जुटाए। तब से फंडिंग में गिरावट आ रही है। ट्रैक्सन के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में कुल 10.9 अरब डॉलर की फंडिंग हुई और 2024 में स्टार्टअप ने 11.4 अरब डॉलर जुटाए।

सेतिया ने कहा कि वैश्विक स्तर पर और भारत में फंडिंग में गिरावट के कारण अब कारोबार की स्थिरता पर ध्यान बढ़ गया है। उन्होंने कहा, हर जगह टिकाऊ तरीके से पैसा बनाने की बातचीत बढ़ गई है, जिससे संस्थापकों और संचालन टीमों की मानसिकता बदल गई है। भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में 2023 में केवल दो और 2024 में छह यूनिकॉर्न थे। लॉजिस्टिक्स एआई सॉल्यूशंस, नेत्राडाइन 2025 का पहला यूनिकॉर्न बन गया।

शर्मा और सेतिया के विचारों को दोहराते हुए इलेक्ट्रिक राइड-हेलिंग फर्म ब्लूस्मार्ट के सह-संस्थापक पुनीत सिंह जग्गी ने कहा, अगर हम सही कारोबार बनाने में सक्षम हैं तो कहानी आगे बढ़ती है। हर बार जब हम तेजी देखते हैं तो कुछ वर्षों में इसके समानांतर मंदी भी आती है। ये सामान्य चीजें हैं, जो किसी भी बाजार में होती हैं। यह आपके उपभोक्ताओं, आपूर्तिकर्ताओं और टीम को खुश रखने पर निर्भर करता है। जब तक ऐसा होता है, आप ऐसे कारोबार बनाएंगे जो पीढ़ियों तक बने रहेंगे।

First Published - March 1, 2025 | 7:25 AM IST

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