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आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस की वैश्विक दौड़ में एमेजॉन ने भारत पर लगाया 12.7 अरब डॉलर का बड़ा दांव

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यह उस बुनियादी ढांचे पर 12.7 अरब डॉलर खर्च कर रही है जो यह तय कर सकता है कि भविष्य के सबसे उन्नत एआई सिस्टम्स की कंप्यूटिंग रीढ़ पर किसका नियंत्रण होगा।

Last Updated- August 03, 2025 | 9:41 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

जैसे-जैसे आर्टिफिशल जनरल इंटेलिजेंस (एजीआई) का दौर नज़दीक आ रहा है और अमेरिका तकनीकी प्रभुत्व के लिए चीन से जूझ रहा है, एमेजॉन वेब सर्विसेज़ (एडब्ल्यूएस) साहसिक लेकिन शांत कदम उठा रही है और वैश्विक एआई दौड़ में तीसरी बड़ी ताकत बनने के लिए भारत पर दांव लगा रही है। यह उस बुनियादी ढांचे पर 12.7 अरब डॉलर खर्च कर रही है जो यह तय कर सकता है कि भविष्य के सबसे उन्नत एआई सिस्टम्स की कंप्यूटिंग रीढ़ पर किसका नियंत्रण होगा।

यह दांव एक निर्णायक मोड़ पर आ गया है। जहां अमेरिका में एआई विकास को लेकर चीन से पिछड़ने की चिंता हैं और सैम ऑल्टमैन जैसे तकनीकी दिग्गज भविष्यवाणी कर रहे हैं कि एजीआई कुछ ही वर्षों में आ सकता है। वहीं एडब्ल्यूएस भारत के तकनीकी केंद्रों में क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहा है जो अगली पीढ़ी के एआई विकास को गति दे सकता है। 2030 तक कंपनी की 12.7 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता देश में सबसे बड़े विदेशी तकनीकी निवेशों में से एक है।

एडब्ल्यूएस के एजेंटिक एआई के उपाध्यक्ष और हाल तक व्हाइट हाउस में एआई प्रतिस्पर्धात्मकता पर प्रमुख सलाहकार रहे डॉ. स्वामी शिवसुब्रमण्यन ने साक्षात्कार में कहा, भविष्य के विकास को बड़े पैमाने पर गति देने के लिए आपको कंप्यूटर इन्फ्रास्ट्रक्चर में इन सभी निवेशों की आवश्यकता है। भारत दौरे पर आए शिवसुब्रमण्यन ने कहा, एआई की क्षमताओं के संदर्भ में हम एक अभूतपूर्व दौर से गुज़र रहे हैं।

वह भारत के लाखों डेवलपर्स को एक रणनीतिक संपत्ति मानते हैं, जिसकी न तो अमेरिका और न ही चीन नकल कर सकता है। शिवसुब्रमण्यन ने कहा, भारतीय डेवलपर समुदाय सबसे जीवंत समुदायों में से एक है। भारतीय बिल्डर नई तकनीकों को अपनाने के लिए अविश्वसनीय रूप से उत्साही, जिज्ञासु और उत्साहित हैं।

ये दांव कॉरपोरेट मुनाफे से कहीं आगे तक फैले हैं। एजीआई,  ऐसी एआई प्रणालियां हैं जो संज्ञानात्मक कार्यों में मनुष्यों से बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। आने वाले दशकों में ये राष्ट्रीय शक्ति का निर्धारण कर सकती हैं।

अपने बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ाने के साथ-साथ एडब्ल्यूएस ने भारत में 59 लाख से अधिक लोगों को क्लाउड कौशल में प्रशिक्षित किया है। यह एक वैश्विक प्रयास का हिस्सा है जो 3.1 करोड़ से अधिक तक पहुंच गया है और निर्धारित समय से पहले ही 2025 के लक्ष्य को पार कर गया है।

शिवसुब्रमण्यन ने कहा, एडब्ल्यूएस भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स के साथ काफी काम कर रहा है और हम भारतीय क्षेत्र में एक बड़ा अवसर देख रहे हैं।

तकनीक बुनियादी चैटबॉट से लेकर जटिल योजना बनाने में सक्षम स्वायत्त प्रणालियों तक तेजी से विकसित हुई है। उन्होंने कहा, आने वाले वर्षों में सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि आप इन बुद्धिमान मॉडलों और एआई एजेंटों का उपयोग विश्वसनीय, सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से कैसे कर सकते हैं?

एडब्ल्यूएस विश्वसनीय एआई उपयोग का समर्थन करने के लिए सभी पर्याप्त सुरक्षा उपायों और नीतियों के साथ-साथ एमेजॉन बेडरॉक एजेंटकोर और एमेजॉन नोवा जैसे उपकरणों में निवेश कर रहा है।

एडब्ल्यूएस का मुकाबला माइक्रोसॉफ्ट, गूगल क्लाउड और ओपनएआई जैसी कंपनियों से है। कंपनी का मानना है कि एआई का अगला चरण चैटबॉट्स द्वारा सवालों के जवाब देने पर आधारित नहीं होगा बल्कि स्वायत्त एजेंट होंगे जो विनिर्माण समस्याओं का निवारण कर सकते हैं, वित्तीय संचालन संभाल सकते हैं और पूरे व्यावसायिक वर्कफ्लो को बदल सकते हैं। क्योंकि कंपनियां अपने कार्यबल को तैयार करने की होड़ में हैं। शिवसुब्रमण्यन का कहना है कि यह तकनीक के प्रदर्शन के चरण से आगे बढ़कर मापने योग्य परिणाम देने लगी है।

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First Published - August 3, 2025 | 9:41 PM IST

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