बीएनपी पारिबा, बार्कलेज और सिटीग्रुप की अगुआई में अग्रणी अंतरराष्ट्रीय बैंकों ने स्विस फर्म होल्सिम की अंबुजा सीमेंट्स व एसीसी में हिस्सेदारी के अधिग्रहण की अदाणी समूह की योजना को मजबूती के साथ समर्थन दिया। समूह ने कर्ज के तौर पर 5.25 अरब डॉलर जुटाए और इस तरह से इन बैंकों से अधिग्रहण में काफी सहारा मिला।
एक अंतरराष्ट्रीय वित्त विशेषज्ञ ने कहा, ऐसे कर्ज की औसत ब्याज दर करीब 7.5 फीसदी होगी, जो भारत की मौजूदा ब्याज दरों से काफी कम है।
कर्ज चार हिस्सों में बांटा गया है। पहला 50 करोड़ डॉलर का अल्पावधि कर्ज, 3 अरब डॉलर का 18 महीने का कर्ज, 1 अरब डॉलर का कर्ज दो साल के लिए और 75 करोड़ डॉलर का कर्ज दो साल के लिए। बैंकिंग सूत्रों ने कहा, डीबीएस बैंक, एमिरेट्स एनबीडी बैंक, फर्स्ट अबु धाबी बैंक, आईएनजी बैंक, इंटेसा सैनपाउलो ऑफ इटली, मिजो बैंक, मित्सुबिशी यूएफजे फाइनैंशियल ग्रुप, सुमितोमो मित्सुई बैंक ऑफ जापान और कतर नैशनल बैंक ने भी इस अधिग्रहण के लिए अदाणी समूह को रकम उधार दी।
अदाणी फैमिली अंबुजा, एसीसी का अधिग्रहण कर रही है, जिसकी क्षमता 7 करोड़ टन सालाना है। अदाणी यह अधिग्रहण 10.5 अरब डॉलर की कुल लागत पर कर रहे हैं, जिसमें कंपनियों के अल्पांश शेयरधारकों के लिए आने वाली खुली पेशकश शामिल है।
अदाणी समूह सबसे पहले अंबुजा में होल्सिम की 63.1 फीसदी हिस्सेदारी और एसीसी में 4.4 फीसदी हिस्सेदारी का अधिग्रहण 6.5 अरब डॉलर में करेगा। अंबुजा की एसीसी में 50 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके बाद अदाणी समूह अंबुजा के अल्पांश शेयरधारकों के लिए 385 रुपये प्रति शेयर पर और एसीसी के लिए 2,300 रुपये प्रति शेयर पर अनिवार्य खुली पेशकश लाएगा। बैंकरों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उथलपुथल के बावजूद कर्ज के मामले में समर्थन बताता है कि अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग समुदाय में समूह का प्रभाव बढ़ रहा है। बैंकर ने कहा, अल्पावधि के कुछ कर्ज का वित्त पोषण समूह बाद में करेगा। लेकिन घोषणा के कुछ ही महीनों के भीतर इतनी बड़ी रकम जुटा लेना बताता है कि विदेशी बैंक किस तरह से भारत की बढ़त की कहानी को सहारा दे रहे हैं।
अंबुजा सीमेंट्स व एसीसी के अधिग्रहण के बाद अदाणी समूह संयुक्त क्षमता बढ़ाकर 10 करोड़ टन सालाना करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो अभी 7 करोड़ टन सालाना है। इस तरह से वह उद्योग की दिग्गज अल्ट्राटेक की 12 करोड़ टन सालाना क्षमता के करीब पहुंच जाएगा। अंबुजा व एसीसी नई क्षमता पर अपनी नकदी लगाएंगी और कुछ कर्ज भी जुटाएगी। दोनों कंपनियों की विस्तार योजना को तेज गति से आगे बढ़ाया जाएगा क्योंकि लक्ष्य 14 करोड़ टन सालाना तक पहुंचने का है क्योंकि बुनियादी ढांचा व रियल एस्टेट क्षेत्र से मांग तेजी से बढ़ रही है। अंबुजा व एसीसी की योजना के मुताबिक, संयुक्त उत्पादन क्षमता बढ़कर अगले साल 7.3 करोड़ टन सालाना हो जाएगी।