facebookmetapixel
Advertisement
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत पहुंचे, पीएम मोदी को दिया व्हाइट हाउस आने का न्योताCorporate Actions Next Week: डिविडेंड-स्प्लिट-बोनस की होगी बारिश, निवेशकों की चमकेगी किस्मतBonus Stocks: अगले हफ्ते इन 2 कंपनियों के निवेशकों की लगेगी लॉटरी, फ्री में मिलेंगे शेयरअगले हफ्ते TCS, ITC और बजाज ऑटो समेत 23 कंपनियां बाटेंगी मुनाफा, एक शेयर पर ₹150 तक कमाई का मौकाUpcoming Stock Split: अगले हफ्ते ये 2 कंपनियां बांटने जा रही हैं अपने शेयर, छोटे निवेशकों को होगा फायदाईरान पर बड़े हमले की तैयारी में ट्रंप, रिपोर्ट में दावा: वार्ता विफल होने से नाखुश, बेटे की शादी में भी नहीं जाएंगेओडिशा सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी विभागों में अब सिर्फ EV की होगी खरीद, 1 जून से नया नियम लागूPower Sector में धमाका: भारत में बिछेगी दुनिया की सबसे ताकतवर 1150 KV की बिजली लाइन, चीन छूटेगा पीछेकच्चे तेल की महंगाई से बिगड़ी इंडियन ऑयल की सेहत, कंपनी पर नकदी पर मंडराया संकटApple का नया दांव: भारत को बना रहा एयरपॉड्स का नया हब, चीन और वियतनाम की हिस्सेदारी घटी

गेहूं खरीद पिछले साल के पार; पंजाब और हरियाणा से सबसे ज्यादा मंगाए गए अनाज

Advertisement

1 अप्रैल से 22 मई तक के आंकड़ों से पता चलता है कि केंद्रीय पूल में 262.9 लाख टन गेहूं खरीदा गया है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 261.6 लाख टन गेहूं खरीदा गया था।

Last Updated- May 24, 2024 | 10:26 PM IST
wheat

केंद्रीय पूल में गेहूं की खरीद पिछले साल के आंकड़े को पार कर गई है। पंजाब और हरियाणा में कुछ दिन पहले जोरदार खरीद के कारण इस सत्र में पहली बार पिछले साल से अधिक खरीदारी हुई है।

1 अप्रैल से 22 मई तक के आंकड़ों से पता चलता है कि केंद्रीय पूल में 262.9 लाख टन गेहूं खरीदा गया है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 261.6 लाख टन गेहूं खरीदा गया था।

प्रमुख मंडियों में आवक कम होने के साथ ज्यादातर विशेषज्ञों का कहना है कि इस सीजन में कुल खरीद 270 से 290 लाख टन के बीच रह सकती है, जो पिछले साल के 261.9 लाख टन से मामूली अधिक होगी। यह वित्त वर्ष 2025 के लिए 300 से 320 लाख टन खरीद के लक्ष्य की तुलना में बहुत कम है। इसका यह भी मतलब है कि लगातार तीसरे साल केंद्रीय पूल में भारत की आधिकारिक गेहूं खरीद लक्ष्य से कम रहेगी, जिसका इस्तेमाल गरीबों को अनाज देने के लिए किया जाता है।

खरीद में गिरावट की प्राथमिक वजह यह है कि किसान अपना उत्पाद ज्यादा दाम पर निजी खरीदारों को बेचना पसंद कर रहे हैं। गेहूं का स्टॉक उम्मीद से कम रहने पर कीमत बढ़ने की स्थिति में सरकार का हाथ बंधा रह सकता है और वह बाजार में प्रभावी तरीके से हस्तक्षेप नहीं कर पाएगी।

इस साल गेहूं खरीद में गिरावट की बड़ी वजह मध्य प्रदेश से कम खरीद है। मध्य प्रदेश से 80 लाख टन खरीदने का लक्ष्य था, जबकि करीब 48 लाख टन खरीदा गया है, जो पिछले साल हुई खरीद का करीब 33 प्रतिशत है।

ज्यादातर कारोबारियों का कहना है कि मध्य प्रदेश में गेहूं की फसल अनुमान से कम है।

Advertisement
First Published - May 24, 2024 | 10:26 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement