facebookmetapixel
Advertisement
NPS में एसेट एलोकेशन और निकासी के विकल्प: करार में दी गई शर्तें पूरी होने पर ही कर सकेंगे एन्युटी सरेंडरEditorial: जियो-एनएसई के मेगा आईपीओ से बदलेगी बाजार की तस्वीरडेटा सेंटर क्षमता बढ़ाए बिना पूरा नहीं होगा एआई का बड़ा सपनासत्ता से नहीं, विचारधारा से कायम रहती है दलों की एकजुटतावैश्विक उथल-पुथल खत्म होने के बाद मजबूत वृद्धि की उम्मीद: IFSCA चीफ के राजारामनबाजार हलचल: जियो प्लेटफॉर्म्स पर मेटा, गूगल का दांव; IPO के लिए व्यस्त सप्ताहडिफेंस ऑर्डर और ट्रक कारोबार की मजबूती से भारत फोर्ज का शेयर रिकॉर्ड ऊंचाई परफैक्ट्री नहीं, फिर भी ₹400 करोड़ का कारोबार; HRV फार्मा का वर्चुअल API मॉडल बना नई मिसाल पश्चिम एशिया संघर्ष का असर: भारत में स्टार्टअप फंडिंग 43% घटी, निवेशक हुए सतर्कFPI नियमों की समीक्षा करेगा सेबी, विदेशी निवेशकों को मिल सकती है राहत

दाल और तेल सस्ता होने की गुंजाइश कम

Advertisement
Last Updated- December 07, 2022 | 6:03 PM IST

मौसम की अनिश्चितताओं के चलते दाल और तेल की कीमतों में कमी होने की गुंजाइश काफी कम दिख रही है। मानसून भी इनकी कीमतों की आग को बुझाने में नाकाम रहा है।


दलहन और तिलहन के बाजार में इस समय काफी तेजी देखी जा रही है। पिछले एक महीने में खाद्य तेल और दाल की कीमतों में 5 से 10 प्रतिशत का इजाफा हो चुका है। गौरतलब है कि पिछले सीजन में पैदावार घटने से दलहन और तिलहन की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं। इस बार तो हालत उससे भी ज्यादा खराब है।

कहीं काफी कम बारिश हुई है तो कहीं बाढ़ का प्रकोप है। इन वजहों से अनुमान लगाया जा रहा है कि तेल और दाल की कीमतों में कोई नरमी नहीं आएगी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के कृषि वैज्ञानिक रमन नायर ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि पिछले साल मोटे अनाजों की बुआई 1.941 करोड़ हेक्टेयर में हुई थी। वहीं इस मौसम में यह घटकर 1.71 करोड़ हेक्टेयर रह गया है।

मक्के के रकबे में भी लगभग 7 लाख हेक्टेयर की कमी आने की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि इसी तरह ज्वार और बाजरा के रकबे में क्रमश: 4 और 9 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। नायर के मुताबिक, दलहन के रकबे में भी कमी आई है। पिछले साल दलहन की बुआई 1.06 करोड़ हेक्टेयर में हुई थी, जो इस साल घटकर 89.8 लाख हेक्टेयर रह गई है। इससे पैदावार में जबरदस्त कमी आने की आशंका है।

मूंग, उड़द और अरहर के रकबे में क्रमश: 8,  5 और 4.5 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। गौरतलब हैकि खाद्य तेल और दलहन की घरेलू मांग का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है। इस बार उत्पादकता में कमी होने की आशंका से दालों का आयात 65 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। पिछले साल जहां 50 लाख टन खाद्य तेल का आयात हुआ था,वहीं इस साल इसके 60 लाख टन पहुंचने की उम्मीद है।

Advertisement
First Published - August 21, 2008 | 11:21 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement