अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अहम बैठक से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना और चांदी की कीमतों में तेज हलचल देखने को मिल रही है। निवेशक इस समय पूरी तरह फेड के रुख का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि ब्याज दरों में होने वाला बदलाव डॉलर से लेकर बॉन्ड यील्ड और कीमती धातुओं के ट्रेंड को काफी प्रभावित करेगा। अमेरिकी अर्थव्यवस्था से मिले मिले जुले संकेतों ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। रोजगार के आंकड़े मजबूत हैं जबकि महंगाई पर फेड का दबाव जारी है। इसी बीच चीन समेत कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार सोने की खरीद बढ़ा रहे हैं जिससे सोने की मांग और कीमत दोनों को सहारा मिल रहा है। ऐसे माहौल में निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि सोना और चांदी आने वाले समय में नई ऊंचाइयों पर जाएंगे या फिर फेड का कोई सख्त बयान इस तेजी को रोक देगा।
एक्सिस सिक्योरिटीज की सीनियर रिसर्च एनालिस्ट देवेया गगलानी के अनुसार, कॉमेक्स गोल्ड पिछले सत्र में 0.4 प्रतिशत बढ़कर 4207 डॉलर के ऊपर बंद हुआ। अमेरिकी जॉब ओपनिंग्स और ADP रोजगार डेटा उम्मीद से बेहतर रहा जिससे फेड की दर कटौती की संभावना मजबूत हुई है। सोने के लिए 4260 डॉलर का स्तर अहम रेजिस्टेंस माना जा रहा है। इसके ऊपर कीमतें 4360 डॉलर तक जा सकती हैं। घरेलू बाजार में 131500 रुपये का स्तर मुख्य रेजिस्टेंस है और इसे पार करने पर दाम 134000 रुपये तक बढ़ सकते हैं।
केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने कहा कि सोना इस समय 4210 डॉलर के आसपास ही घूम रहा है। बाजार फेड के फैसले का इंतजार कर रहा है इसलिए ट्रेडिंग भी सावधानी से हो रही है। उम्मीद है कि फेड महंगाई को देखते हुए बहुत सोच समझकर ब्याज दरों में कटौती करेगा।
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अजय केडिया ने बताया कि अमेरिका में नौकरी के आंकड़े मजबूत हैं, इसी वजह से फेड के लिए फैसला लेना थोड़ा मुश्किल हो गया है। चीन पिछले 13 महीने से लगातार सोना खरीद रहा है। ईटीएफ में भी पैसा आ रहा है। इन सब वजहों से इस साल सोना लगभग 60 प्रतिशत बढ़ चुका है।
चांदी की कीमतें 61 डॉलर प्रति औंस से ऊपर चली गई हैं, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। अजय केडिया के अनुसार, चांदी में यह तेजी इसलिए आ रही है क्योंकि बाजार को फेड की दर कटौती की उम्मीद है और दूसरी तरफ चांदी की सप्लाई कम हो रही है। लीज रेट्स बढ़ रहे हैं, जिससे पता चलता है कि बाजार में चांदी की उपलब्धता कम है। साथ ही सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहनों और डेटा सेंटर जैसी तकनीकों में चांदी की मांग तेजी से बढ़ रही है। यह मांग आने वाले कई सालों तक बढ़ती रह सकती है।
MyGold के CEO अमोल बंसल का कहना है कि सोना और चांदी में जो तेज रुझान दिखाई दे रहा है, उसका सबसे बड़ा कारण फेड की संभावित ब्याज दर कटौती की उम्मीदें हैं। हालांकि बाजार अभी से ही ज्यादा कटौती मानकर चल रहा है, जबकि फेड ने अभी तक कोई साफ संकेत नहीं दिया है। उन्होंने बताया कि कमजोर अमेरिकी आर्थिक डेटा और नरम संकेतों के कारण निवेशक सुरक्षित साधनों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे सोने को सहारा मिला है। रियल यील्ड में गिरावट भी सोने के पक्ष में काम कर रही है।
अमोल बंसल के अनुसार सोना लंबे समय से 4000 से 4050 डॉलर के दायरे में फंसा था और इसके ऊपर टिकने पर अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है। आगे कीमतों की दिशा अमेरिकी महंगाई डेटा, फेड मिनट्स और दुनिया में हो रही राजनीतिक घटनाओं पर निर्भर करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि चांदी में तेजी का कारण सप्लाई की कमी है, लेकिन इसमें सट्टा निवेश भी बढ़ गया है जिससे शॉर्ट टर्म में कीमतें कुछ ज्यादा ऊपर दिखाई दे रही हैं।
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उन्होंने बताया कि उभरते देशों के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं जिससे बाजार में गिरावट सीमित रहती है। डॉलर पर निर्भरता कम करने की प्रवृत्ति यानी डीडॉलराइजेशन भी सोने की मांग को बढ़ा रही है।
निवेशकों के लिए उनकी सलाह है कि एक ही बार में बड़े निवेश की बजाय धीरे धीरे खरीदारी करें। एमसीएक्स पर 120000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कीमत आने पर खरीदने का बेहतर मौका मिल सकता है। लंबे समय के लिए पोर्टफोलियो में 10 से 15 प्रतिशत हिस्सेदारी सोने को देना समझदारी होगी।