facebookmetapixel
Advertisement
क्रिप्टो से ट्रंप की तगड़ी कमाई! एक साल में ₹12,000 करोड़ से ज्यादा की इनकमAMFI की नई लिस्ट जल्द, BSE और Vodafone Idea समेत कई शेयरों की बदल सकती है कैटेगरीजुलाई में पैसा कमाने का मौका? ब्रोकरेज ने बताए टॉप 10 खरीदने और बेचने वाले स्टॉक्स1 जुलाई से बड़ी राहत! कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹183.50 सस्ता, चेक करें घरेलू गैस सिलेंडर के दाम11 हफ्तों से घट रहा अमेरिका का ऑयल स्टॉक, क्या अब बदलने वाला है ट्रेंड?US Jobs Report से पहले डॉलर में आई मजबूती, 101.3 के पार पहुंचा डॉलर इंडेक्सStock Market Today: अच्छी शुरुआत के बाद तेजी कायम, सेंसेक्स 76,600 के पार; IT और ऑटो में खरीदारीडेटा सेंटर से डिफेंस तक… इस कंपनी के लिए खुल रहे बड़े मौके! कमाई और शेयर पर मोतीलाल ओसवाल ने दी रायStocks To Watch Today: Kotak Mahindra Bank की बड़ी डील से RailTel के ऑर्डर तक, आज इन शेयरों पर रखें नजरबॉन्ड यील्ड में गिरावट से बैंकों को होगा फायदा, Q1 में ट्रेजरी मुनाफा बढ़ने की उम्मीद

निर्यातकों की उसना चावल पर निश्चित 80 डॉलर प्रति टन का निर्यात शुल्क लगाने की मांग

Advertisement

सरकार ने शुक्रवार को उसना चावल के निर्यात पर 20 प्रतिशत शुल्क अगले साल 24 मार्च तक बढ़ा दिया था।

Last Updated- October 15, 2023 | 3:31 PM IST
Principal Commodity export: Now the export of principal commodity started increasing, export of non-basmati rice also improved from before अब बढ़ने लगा प्रमुख कमोडिटी का निर्यात, गैर बासमती चावल का निर्यात भी पहले से सुधरा

चावल निर्यातकों (Rice Exporters) ने व्यापार को सुचारू बनाने के लिए केंद्र से उसना चावल के लिए मौजूदा 20 प्रतिशत शुल्क के बजाय एक निश्चित 80 डॉलर प्रति टन का निर्यात शुल्क लगाने का अनुरोध किया है। चावल निर्यातकों के शीर्ष निकाय के एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।

भारतीय चावल निर्यातक संघ (आईआरईएफ) ने सरकार से सफेद चावल पर जुलाई में लगाए गए निर्यात प्रतिबंध पर पुनर्विचार करने और निर्यात मात्रा और किसानों दोनों पर नकारात्मक प्रभाव को रोकने के लिए बासमती चावल के न्यूनतम निर्यात मूल्य को घटाकर 850 डॉलर प्रति टन करने का भी आग्रह किया है।

सरकार ने शुक्रवार को उसना चावल के निर्यात पर 20 प्रतिशत शुल्क अगले साल 24 मार्च तक बढ़ा दिया था।

आईआरईएफ के अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने पीटीआई-भाषा को बताया, “हम सरकार से 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क के स्थान पर 80 डॉलर प्रति टन का निश्चित निर्यात शुल्क लगाने का अनुरोध करते हैं। इससे चावल व्यापार में अस्पष्टता और बिलिंग संबंधी समस्याएं खत्म हो जाएंगी।”

उन्होंने कहा कि संघ सफेद चावल पर लगे प्रतिबंध पर पुनर्विचार के लिए सरकार से बातचीत चाहता है। आईआरईएफ को यह भी उम्मीद है कि सरकार बासमती चावल के लिए एक अधिसूचना जारी करेगी जिसमें वर्तमान दर 1,200 डॉलर प्रति टन के बजाय 850 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य प्रस्तावित किया जाएगा। भारत से वार्षिक गैर-बासमती चावल निर्यात मूल्य 50,000 करोड़ रुपये से अधिक है।

Advertisement
First Published - October 15, 2023 | 3:31 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement