facebookmetapixel
Advertisement
Stock Market Today: कमजोर ग्लोबल संकेतों के बीच आज सुस्त शुरुआत के आसार; GIFT Nifty में गिरावटBehari Lal Engineering IPO Listing: आज शेयर बाजार में होगी एंट्री, GMP से 46% तक मुनाफे के संकेत; जानें पूरी डीटेलStocks To Watch Today: RailTel, Paytm समेत आज इन शेयरों पर रहेगी नजर, कहीं ऑर्डर तो कहीं फंड जुटाने की खबर से मचेगा हलचलभारत-अमेरिका को मतभेद दूर कर भरोसेमंद कर व्यवस्था बनाने पर काम करना चाहिए: सर्जियो गोरभारतीय चुनाव व्यवस्था की तारीफ कर बोले ट्रंप, कांग्रेस ने कहा- ईवीएम भी अमेरिका भेज देंगेब्रिक्स देशों ने पर्यावरण संरक्षण पर चार ज्ञान संकलन जारी किए, टिकाऊ विकास पर जोरदुबई का कमर्शियल रियल एस्टेट बाजार मजबूत, पहली छमाही में लेनदेन 8.5% बढ़ाबाल यौन शोषण सामग्री पर सरकार सख्त, सोशल मीडिया के ‘सेफ हार्बर’ प्रावधान पर साफ संदेश17 सितंबर से सेमीकॉन इंडिया 2026, वैश्विक सीईओ और 500 से ज्यादा प्रदर्शक करेंगे ​शिरकत 13-17 साल के किशोरों के लिए नया चैटजीपीटी, मजबूत सुरक्षा और पैरेंटल कंट्रोल की सुविधा

निर्यातकों की उसना चावल पर निश्चित 80 डॉलर प्रति टन का निर्यात शुल्क लगाने की मांग

Advertisement

सरकार ने शुक्रवार को उसना चावल के निर्यात पर 20 प्रतिशत शुल्क अगले साल 24 मार्च तक बढ़ा दिया था।

Last Updated- October 15, 2023 | 3:31 PM IST
Principal Commodity export: Now the export of principal commodity started increasing, export of non-basmati rice also improved from before अब बढ़ने लगा प्रमुख कमोडिटी का निर्यात, गैर बासमती चावल का निर्यात भी पहले से सुधरा

चावल निर्यातकों (Rice Exporters) ने व्यापार को सुचारू बनाने के लिए केंद्र से उसना चावल के लिए मौजूदा 20 प्रतिशत शुल्क के बजाय एक निश्चित 80 डॉलर प्रति टन का निर्यात शुल्क लगाने का अनुरोध किया है। चावल निर्यातकों के शीर्ष निकाय के एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।

भारतीय चावल निर्यातक संघ (आईआरईएफ) ने सरकार से सफेद चावल पर जुलाई में लगाए गए निर्यात प्रतिबंध पर पुनर्विचार करने और निर्यात मात्रा और किसानों दोनों पर नकारात्मक प्रभाव को रोकने के लिए बासमती चावल के न्यूनतम निर्यात मूल्य को घटाकर 850 डॉलर प्रति टन करने का भी आग्रह किया है।

सरकार ने शुक्रवार को उसना चावल के निर्यात पर 20 प्रतिशत शुल्क अगले साल 24 मार्च तक बढ़ा दिया था।

आईआरईएफ के अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने पीटीआई-भाषा को बताया, “हम सरकार से 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क के स्थान पर 80 डॉलर प्रति टन का निश्चित निर्यात शुल्क लगाने का अनुरोध करते हैं। इससे चावल व्यापार में अस्पष्टता और बिलिंग संबंधी समस्याएं खत्म हो जाएंगी।”

उन्होंने कहा कि संघ सफेद चावल पर लगे प्रतिबंध पर पुनर्विचार के लिए सरकार से बातचीत चाहता है। आईआरईएफ को यह भी उम्मीद है कि सरकार बासमती चावल के लिए एक अधिसूचना जारी करेगी जिसमें वर्तमान दर 1,200 डॉलर प्रति टन के बजाय 850 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य प्रस्तावित किया जाएगा। भारत से वार्षिक गैर-बासमती चावल निर्यात मूल्य 50,000 करोड़ रुपये से अधिक है।

Advertisement
First Published - October 15, 2023 | 3:31 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement