भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने गुरुवार को आईपीओ (प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश) के दस्तावेज में ज्यादा सख्त खुलासे करने की अपील की। उन्होंने कहा कि खासतौर पर जोखिम कारकों, मूल्यांकन के औचित्य, निर्गम के मकसद और प्राप्त राशि के इस्तेमाल के बारे में अधिक खुलासे होने चाहइए।
एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया (एआईबीआई) के 14वें सालाना सम्मेलन में पांडेय ने कहा कि खुलासों में कमियां न केवल निवेशकों की समझ को कमजोर करती हैं बल्कि नियामक के बार-बार पूछताछ करने के कारण धन जुटाने की समयसीमा भी बढ़ सकती है।
पांडेय ने कहा, पूंजी संरचना संबंधी खुलासों में पिछली पूंजी जुटाने, तरजीही आवंटन और नियंत्रण में हुए बदलावों को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए, खासकर आईपीओ से ठीक पहले किए गए बदलावों के बारे में। उन्होंने कहा, हम बिजनेस मॉडल पर ज्यादा स्पष्टता की भी उम्मीद करते हैं, जिसमें राजस्व और लागत के कारकों की पारदर्शी व्याख्या शामिल हो।
सेबी चेयरमैन ने कहा कि नियामक को पेशकश दस्तावेजों में बार-बार ऐसी कमियां देखने को मिलती हैं, जिनसे निवेशकों के लिए पारदर्शिता कम हो जाती है। उन्होंने कंपनियों से प्रबंधन चर्चा और विश्लेषण (एमडी ऐंड ए) अनुभाग को मजबूत करने का आग्रह किया और कहा कि इसमें विस्तार से दिए गए विवरण के बजाय प्रदर्शन के प्रमुख आंतरिक और बाहरी कारकों की व्याख्या भी होनी चाहिए।
पांडेय ने कहा, हमारे निरीक्षणों से पता चलता है कि उचित जांच-पड़ताल हमेशा स्वतंत्र नहीं होती है और कई बार जारीकर्ता के वादों पर अत्यधिक निर्भर करती है…, ऐसे में अनुमानों , विशेष रूप से कार्यशील पूंजी और पूंजीगत व्यय, का स्वतंत्र रूप से सत्यापन किया जाना चाहिए और सभी महत्वपूर्ण बयानों के लिए सहायक दस्तावेज होने चाहिए।
सेबी के चेयरमैन ने गैर-सूचीबद्ध बाजार में मूल्यांकन और आईपीओ बुक-बिल्डिंग के दौरान निर्धारित कीमतों के बीच अक्सर देखी जाने वाली विसंगति की ओर भी ध्यान दिलाया।
अनलिस्टेड बाजार में बढ़ती गतिविधियों के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए पांडेय ने कहा, लिस्टिंग से पहले और लिस्टिंग के बाद की स्थिति बिल्कुल अलग होती है। बड़ी संख्या में अनलिस्टेड कंपनियां हैं और हमें इस समस्या से कैसे निपटना है, इसके लिए कंपनी मामलों के मंत्रालय के साथ परामर्श करके इस पर विचार करने की जरूरत है।
पांडेय की ये टिप्पणियां आईपीओ के मजबूत दौर के बीच आई हैं। भारत आईपीओ जारी करने की संख्या के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा और मूल्य के हिसाब से तीसरा सबसे बड़ा आईपीओ बाजार बनकर उभरा है। भारत में 2025-26 के पहले नौ महीनों में 311 आईपीओ के जरिये करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए।
सेबी के आंकड़ों के अनुसार इक्विटी के जरिये धन जुटाने का आंकड़ा 3.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जबकि ऋण जारी कर करीब 6.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। सेबी के आंतरिक अनुमानों के अनुसार, लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि जुटाने की प्रक्रिया अभी जारी है।
पांडेय ने कहा कि नियामक जल्द ही जारीकर्ताओं और निवेशकों की जागरूकता बढ़ाने के लिए कॉरपोरेट बॉन्ड पर भारत भर में कार्यक्रम शुरू करेगा। सेबी रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी) और इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आईएनवीआईटी) में भागीदारी बढ़ाने के लिए भी काम कर रहा है।
उन्होंने कहा, हम रीट्स और इनविट्स में भागीदारी बढ़ाने के लिए संस्थागत निवेशकों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। सार्वजनिक परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण में तेजी के लिए वित्त मंत्रालय के साथ तालमेल कर रहे हैं। इसके लिए हम भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण, पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के साथ मिलकर उनके पर्यवेक्षण के अंतर्गत आने वाली संस्थाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भी काम कर रहे हैं।