भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) से जुड़े कोलेकेशन और डार्क फाइबर मामलों के प्रस्तावित निपटारे पर सिद्धांत रूप से हामी भर दी है। सेबी प्रमुख तुहिन कांत पांडेय ने यह जानकारी दी। यह मामला लंबे समय से विचाराधीन हैं। एआईबीआई के सालाना सम्मेलन के मौके पर पांडेय ने कहा कि निपटान प्रस्ताव पर फिलहाल सेबी की आंतरिक समितियों विचार कर रही हैं। उन्होंने कहा,‘ इस प्रस्ताव पर हमारी विभिन्न समितियों में चर्चा चल रही है। मगर सिद्धांत रूप में हम निपटान से सहमत हैं।’
पिछले साल जून-जुलाई के आसपास सौंपे आवेदन में एनएसई ने कोलोकेशन और डार्क फाइबर मामले के समाधान के लिए सेबी के निपटान नियमन के तहत 1,388 करोड़ रुपये के भुगतान की पेशकश की थी। अगर एनएसई की यह पेशकश स्वीकार कर ली जाती है तो यह बाजार नियामक के साथ अब तक का सबसे बड़ा निपटान होगा।
वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में एनएसई ने कोलोकेशन और डार्क फाइबर मामलों के निपटान के लिए ब्याज सहित 1,297 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। एनएसई ने तब कहा था कि यह प्रावधान सेबी के पूर्णकालिक सदस्य द्वारा कोलोकेशन आदेश में प्रतिभूति अपीली न्यायाधिकरण (सैट) द्वारा लगाए गए 100 करोड़ रुपये के जुर्माने के अतिरिक्त था जिसे वित्त वर्ष 2023 के दौरान एनएसई द्वारा सेबी के पास साथ जमा राशि के साथ समायोजित किया गया था।
प्रस्तावित निपटान को एनएसई के लंबे समय से विचाराधीन आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए नियामक की बाधाओं को दूर करने की दिशा में अहम कदम के रूप में रूप से देखा जा रहा है।
पिछले सप्ताह सेबी के अध्यक्ष ने कहा कि नियामक इस महीने के भीतर एनएसई के आईपीओ के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी कर सकता है। एक बार एनओसी मिलने के बाद एक्सचेंज औपचारिक रूप से आईपीओ प्रक्रिया शुरू करने और लगभग एक दशक बाद अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दुबारा दाखिल करने के लिए कदम उठा पाएगा।
कारोबारियों ने कहा कि सार्वजनिक निर्गम को नियामक की मंजूरी मिलने के लिए जरूरी है कि पहले पुराने कानूनी विवादों का समाधान हो। कोलोकेशन मामला इस समय भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित उन आरोपों से जुड़ा है जिनमें दावा किया गया था कि कुछ ब्रोकरों को 2015 और 2016 के बीच एनएसई के कारोबारी सर्वरों तक तरजीही पहुंच दी गई थी। अगर सेबी इस निपटान प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो उसे संबंधित मामले में अपनी अपील वापस लेने के लिए शीर्ष न्यायालय में हलफनामा दाखिल करना होगा।
जनवरी 2023 में सैट ने एनएसई के खिलाफ गैर-मौद्रिक दंड बरकरार रखा मगर जब्ती का आदेश रद्द कर दिया। इसके बजाय लापरवाही बरतने पर लगभग 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा दिया। उसी वर्ष बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने सेबी को मामले के संबंध में एनएसई को लगभग 300 करोड़ रुपये वापस करने का निर्देश दिया।
सूचीबद्ध होने की बढ़ती उम्मीदों के बीच एनएसई के शेयरधारकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2025 के अंत में एक्सचेंज के 1,83,621 सार्वजनिक शेयरधारक थे जिनमें खुदरा निवेशकों की संख्या 1,71,563 थी। उनके पास संयुक्त रूप से लगभग 12.3 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। पिछले सप्ताह गैर-सूचीबद्ध बाजार में एनएसई के शेयरों में तेजी देखी गई है।