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मार्च में GST कलेक्शन 8.2% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़, छह महीने में सबसे मजबूत राजस्व वृद्धि दर्जऑरेकल में वैश्विक छंटनी की आंच भारत तक, 12,000 तक कर्मचारियों पर असर की आशंकाCBDT ने किया स्पष्ट: 2017 से पहले के निवेश GAAR के दायरे से बाहरकमर्शियल LPG और ATF की कीमतों में बढ़ोतरी, विमानन व उपभोक्ता सेक्टर पर लागत का दबाव बढ़ाभारतीय बेचना नहीं चाह रहे ‘दुबई वाला घर’; सुस्ती के बीच निवेशक अब भी होल्ड मोड मेंपश्चिम एशिया संकट के बीच कॉरपोरेट ट्रैवल पर जोर, घरेलू यात्रा पर फोकस बढ़ाकच्चे तेल की कीमतों और भारी सप्लाई से सरकारी बॉन्ड यील्ड पर दबाव, 7.25% तक पहुंचने की आशंकाएनवीडिया का MCap भारत के कुल शेयर बाजार के करीब, AI बूम से बढ़ा वैश्विक अंतरMSCI का ग्रीस को विकसित बाजार में शामिल करने का फैसला, भारत पर सीमित असर23,000 के पास रेजिस्टेंस ने रोकी निफ्टी की बढ़त, निकट भविष्य में तकनीकी स्थिति कमजोर

लेखक : तमाल बंद्योपाध्याय

आज का अखबार, लेख

सरकारी महिला बैंककर्मी की डायरी के पन्ने

मुंबई के एक बड़े सरकारी बैंक की शाखा प्रबंधक 34 वर्षीय मीनू (बदला हुआ नाम) ने पिछले महीने इस्तीफा दे दिया था। जिस दिन वह कार्यमुक्त हुईं, उस दिन वह जल्दी घर जा सकती थी। लेकिन उस दिन भी वह रात का खाना जल्दी नहीं खा सकीं क्योंकि उनके बैंकर पति भी रात 10 बजे […]

आज का अखबार, फिनटेक, बैंक, लेख

तकनीक, उम्र से जुड़े सवाल और केंद्रीय बैंकिंग

इन दिनों वित्त-तकनीक (फिनटेक) क्षेत्र तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में एक से एक नवाचार हो रहे हैं और वित्तीय सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में यह अहम भूमिका निभा रहा है। मगर हाल में पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर आरबीआई की सख्ती से इस क्षेत्र में हलचल मच गई है। मगर […]

आज का अखबार, लेख

बैंकिंग साख: PSU बैंकों का प्रदर्शन क्या रह पाएगा जारी?

इन दिनों लगभग सभी निवेशक शेयर बाजार में डुबकी लगाने से पहले सार्वजनिक क्षेत्र (पीएसयू) के बैंकों पर जरूर निगाहें दौड़ाते हैं। बैंकिंग क्षेत्र पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ भी सार्वजनिक क्षेत्र के 12 बैंकों पर नजर गड़ाए हुए हैं। इसका कारण समझना बहुत मुश्किल नहीं है। दिसंबर तिमाही में 12 पीएसयू बैंकों में से […]

आज का अखबार, लेख

बैंकों की सेहत: NIM, कासा, जमा और ऋण में वृद्धि का विश्लेषण

जब किसी मरीज की हालत गंभीर होने लगती है तब डॉक्टर उसके खून में ऑक्सीजन के स्तर की लगातार जांच करते रहते हैं। पल्स ऑक्सीमीटर पर व्यक्ति के खून में ऑक्सीजन का प्रतिशत दिखने लगता है। डॉक्टर, आमतौर पर किसी स्वस्थ व्यक्ति का रक्तचाप और ब्लड शुगर की जांच कर यह तय करता है कि […]

आज का अखबार, लेख

बैंकिंग साख: मुद्रास्फीति नियंत्रण का वादा पूरा करेंगे दास!

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने तीन दिन की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के आखिर में एक बार फिर महंगाई को नियंत्रित करने की अपनी प्रतिबद्धता की घोषणा की। अपने बयान में उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति को टिकाऊ आधार पर 4 प्रतिशत के लक्ष्य के अनुरूप लाने के लिए मौद्रिक […]

आज का अखबार, लेख

बैंकिंग साख: दरों पर क्या RBI का रुख बदलेगा?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की दरें-निर्धारित करने वाली संस्था, मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की दिसंबर की बैठक में ब्याज दर या नीतिगत रुख में कोई बदलाव नहीं किया गया था। लगातार पांचवीं बैठक में भी रीपो दर में कोई बदलाव नहीं हुआ और यह 6.5 प्रतिशत पर बनी रही और इसका रुख व्यवस्था में नकदी […]

आज का अखबार, लेख

बैंकिंग साख: राजकोषीय मजबूती की दिशा में बढ़ रहे कदम

वित्त वर्ष 2025 के लिए बीते गुरुवार को पेश किए गए अंतरिम बजट में भारत के ‘चार प्रमुख वर्गो ‘गरीब, महिलाएं, युवा और किसानों’ पर ध्यान देना जारी रहा और सरकार की तरफ से ऐसे संकेत मिले कि उनकी जरूरतों, आकांक्षाओं को पूरा करना और कल्याण करना ही सरकार की प्रमुख प्राथमिकता बनी रहेगी। लेकिन […]

आज का अखबार, लेख

Budget 2024: बजट में बैंकिंग क्षेत्र की कैसी होगी दिशा

केंद्रीय बजट के लिहाज से बैंकिंग की बात करें तब चीजें काफी मुश्किल दिखती हैं। उदाहरण के तौर पर, मैं 29 फरवरी 2000 के बजट का जिक्र कर रहा हूं जब तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने सबको हैरान करते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी घटाकर 33 प्रतिशत करने की घोषणा […]

आज का अखबार, लेख

बैंकिंग साख: बैंकों का वर्गीकरण चिंता की बात नहीं

दिसंबर के आखिरी कुछ दिनों में फोन कॉल और मेसेज की तादाद अचानक ही बढ़ गई। मुझे भी कई लोगों ने भी चिंतित होकर कॉल और संदेश भेजे। वे जानना चाहते थे कि उनकी पूंजी बैंक में सुरक्षित है या नहीं। आखिर अचानक उनकी व्यग्रता क्यों बढ़ गई? इसका संबंध भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: P2P ऋण लेन-देन में खामियां हों दूर

पिछले साल जुलाई में मैंने इसी स्तंभ में लिखा था, ‘इससे पहले कि काफी देर हो जाए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को पी2पी (पीयर टू पीयर) लाइसेंस देने की प्रथा कम करनी चाहिए। कई पी2पी प्लेटफॉर्म जमा लेने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) जैसा काम कर रहे हैं और उधार लेने वालों से बिना […]

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