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Year Ender: 2025 में GST स्लैब और इनकम टैक्स में हुए बड़े बदलाव, मिडिल क्लास को मिली बड़ी राहत

2025 में लागू किए गए GST और इनकम टैक्स सुधारों से घरेलू खपत को बढ़ाने, मिडिल क्लास को राहत देने और कस्टम्स प्रक्रिया को सरल बनाने का काम किया गया

Last Updated- December 25, 2025 | 11:52 AM IST
GST rate cuts in india
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

GST Rate Cuts: 2025 का साल भारत के टैक्स सिस्टम के लिए काफी अहम रहा। सरकार ने GST में बड़ी कटौती की, इनकम टैक्स में छूट की लिमिट बढ़ाई गई और लोगों के हाथ में ज्यादा पैसे रहने देना का इरादा दिखाया। इसका मकसद था कि मुश्किल वैश्विक हालात में घरेलू खपत बढ़े और अर्थव्यवस्था को सहारा मिले। विदेशी टैरिफ की अनिश्चितता के बीच ये बदलाव घरेलू मांग को मजबूत करने पर फोकस करते हैं। अब नजर कस्टम्स ड्यूटी को सरल बनाने और रेट कम करने पर है।

GST Rate Cuts: कम स्लैब और चीजें सस्ती

साल की सबसे बड़ी खबर रही GST में भारी बदलाव। 22 सितंबर से करीब 375 सामानों और सर्विसेज पर टैक्स रेट कम कर दिए गए। रोजमर्रा की चीजों पर बोझ कम हुआ और लंबे समय से चली आ रही इनवर्टेड ड्यूटी की समस्या भी काफी हद तक सुलझी। पहले GST में 5%, 12%, 18% और 28% के चार मुख्य स्लैब थे। अब इन्हें 5% और 18% के दो मुख्य रेट में समेट दिया गया है। हालांकि, तंबाकू, सिगरेट, सिगार, गुटखा, पान मसाला आदि पर 40% का हाई रेट रखा गया है।

इस बदलाव से GST सिस्टम ज्यादा आसान और भरोसेमंद हो गया। सरकार का दावा है कि स्लैब कम होने से झगड़े कम होंगे और कंप्लायंस आसान। अप्रैल में GST कलेक्शन रिकॉर्ड 2.37 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा था, जबकि पूरे साल औसतन 1.9 लाख करोड़ रुपये रहा। लेकिन रेट कटौती के बाद थोड़ा दबाव पड़ा और ग्रोथ धीमी हुई।

नवंबर में कलेक्शन साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया, जो 1.70 लाख करोड़ रुपये रहा। यह पिछले साल की तुलना में सिर्फ 0.7% की बढ़ोतरी थी। नवंबर वो पहला महीना था जब सितंबर की कटौती का पूरा असर दिखा। फिर भी ये सुधार लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो रहे हैं। आम इस्तेमाल की चीजें सस्ती हुईं, जिससे खपत बढ़ने की उम्मीद है।

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इनकम टैक्स में राहत: मिडिल क्लास को बड़ा तोहफा

डायरेक्ट टैक्स के मोर्चे पर भी सरकार ने हाथ खोले। इनकम टैक्स की छूट लिमिट बढ़ाकर मिडिल इनकम वालों को राहत दी गई। लोगों के पास ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम आए, खासकर शहरों में रहने वाले परिवारों को बड़ा फायदा हुए। इससे खुद टैक्स देने की आदत भी मजबूत हुई।

2025 के बजट में नई टैक्स व्यवस्था में 12 लाख रुपये सालाना आय तक कोई इनकम टैक्स नहीं देने का ऐलान हुआ। ये वो व्यवस्था है जिसमें कम रेट हैं लेकिन छूट या डिडक्शन का फायदा नहीं मिलता। नए रेट कुछ इस तरह हैं:

  • 4 से 8 लाख रुपये तक 5%
  •  8 से 12 लाख रुपये तक 10%
  •  12 से 16 लाख रुपये तक 15%
  •  16-20 लाख रुपये पर 20%
  •  20-24 लाख रुपये पर 25% 
  • 24 लाख रुपये से ऊपर 30%

हालांकि इन कटौती से अप्रैल से दिसंबर मध्य तक नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन धीमा पड़ा। व्यक्तियों, HUF और फर्म्स का नेट टैक्स सिर्फ 6.37% बढ़कर 8.47 लाख करोड़ रुपये हुआ, जबकि कॉर्पोरेट टैक्स 10.54% बढ़कर 8.17 लाख करोड़ रुपये पहुंचा। रिफंड भी कम हुए क्योंकि हाई वैल्यू क्लेम की एक्स्ट्रा जांच हुई। इस साल रिफंड 14% घटकर 2.97 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहे।

अगले साल से नया सिंपल इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू होगा, जो 1 अप्रैल से शुरू होकर पुराने 1961 के एक्ट की जगह लेगा। सिगरेट पर एक्स्ट्रा एक्साइज ड्यूटी और पान मसाला पर सेस लगाने के दो नए कानून भी सरकार जब चाहे लागू कर देगी।

कस्टम्स ड्यूटी पर अब फोकस: अगला बड़ा कदम

GST और इनकम टैक्स के बड़े सुधार हो जाने के बाद अब नजर कस्टम्स पर है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कस्टम्स को सरल बनाना सरकार का अगला बड़ा सुधार होगा। इनकम टैक्स जैसी पारदर्शिता और फेसलेस असेसमेंट कस्टम्स में लाना जरूरी है। साथ ही ड्यूटी रेट को रेशनलाइज करना भी।

पिछले दो साल में कस्टम्स ड्यूटी लगातार घटी है। लेकिन जहां रेट अभी भी ज्यादा हैं, उन्हें कम करना बाकी है। वित्त मंत्री ने कहा था, “कस्टम्स मेरा अगला बड़ा क्लीन-अप काम है।” 2025-26 बजट में इंडस्ट्रियल गुड्स पर सात अतिरिक्त टैरिफ रेट हटाने का प्रस्ताव था, जिससे कुल स्लैब आठ रह गए। पहले 2023-24 में भी सात टैरिफ हटाए गए थे।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रेड के बदलते पैटर्न, कंप्लायंस कॉस्ट और प्रोसीजर की दिक्कतों को देखते हुए कस्टम्स में सुधार जरूरी हैं। डेलॉइट इंडिया के महेश जायसिंग कहते हैं कि अगले फेज में कस्टम्स रिफॉर्म्स की जरूरत है। 

नांगिया ग्लोबल के राहुल शेखर का सुझाव है कि पूरी डिजिटलाइजेशन हो, डॉक्यूमेंटेशन एकसमान, क्लासिफिकेशन साफ और रिस्क बेस्ड क्लियरेंस तेज। इससे ट्रेड आसान होगा और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। पुराने झगड़ों के लिए वन-टाइम एमनेस्टी स्कीम भी लाई जा सकती है, ताकि पुराने केस सुलझें और राजस्व खुले।

(PTI के इनपुट के साथ)

First Published - December 25, 2025 | 11:52 AM IST

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