जमीनी हकीकत: जलवायु परिवर्तन के दौर में सरकार का एजेंडा
देश में एक बार फिर पांच साल के लिए नई सरकार का गठन हो गया है। मेरी नजर में इस सरकार का एजेंडा वही पुराना है लेकिन इसमें एक बुनियादी अंतर है। यह एजेंडा देश के विकास और जलवायु परिवर्तन (Climate change) के दौर को देखते हुए होना चाहिए। एक तथ्य यह भी है कि […]
जमीनी हकीकत: अर्थव्यवस्था भले हो नई, आदतें वही पुरानी
दुनिया तेजी से हरित अर्थव्यवस्था (Green Economy) की ओर बढ़ रही है। अब यह सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा की तरफ बढ़ रही है, ताकि ऊर्जा प्रणाली से कोयला और गैस को हटाया जा सके; इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ बढ़ रही है ताकि परिवहन से तेल की जरूरत को खत्म किया जाए; हाइड्रोजन की […]
कल आपके शहर की भी हो सकती है बेंगलूरु जैसी हालत
कुछ साल पहले बेंगलूरु में ‘इक्सक्रीटा मैटर्स’ पर हमारी रिपोर्ट जारी करते समय, मैं शहर के जल और गंदे नाली के पानी का प्रबंधन करने वालों के साथ एक जोश से भरी चर्चा में शामिल हुई थी। इस चर्चा का मुद्दा शहर में जल प्रबंधन का ढांचा था जो हमारे शोध के अनुसार किफायती और […]
जमीनी हकीकत: कृषि क्षेत्र में तौर-तरीके बदलने की आवश्यकता
दुनिया की कृषि व्यवस्था में बुनियादी स्तर पर कुछ न कुछ कमी है। जब आप यूरोप के आर्थिक रूप से संपन्न किसानों की तस्वीरें और भारत में अपनी नाराजगी सरकार तक पहुंचाने के लिए ट्रैक्टरों के साथ सड़क जाम करते किसानों को देखते हैं तो खामियों की बात साफ हो जाती है। वास्तविकता यह है […]
जमीनी हकीकत: मौजूदा दौर में कितने कारगर व्यापार नियम
वर्ष 2024 में अलग तरह के वैश्वीकरण के लिए व्यापार नियमों में बदलाव करना होगा। यह ग्लोबल साउथ यानी विकासशहल देशों की अर्थव्यवस्थाओं और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। काफी अरसा पहले जब विश्व में संभावित जलवायु संकट को लेकर बहस छिड़ी हुई थी, उसी समय नए व्यापार समझौतों के […]
जमीनी हकीकत: ATM- खेती और आय से जुड़ा अनूठा प्रयोग
मैं अत्यधिक धूप और गर्मी वाले इलाके में खड़ी हूं और जहां तक मेरी नजर जा रही है, बंजर और उजाड़ इलाका नजर आ रहा है। यह आंध्रप्रदेश का अनंतपुरमु जिला है जहां इस वर्ष सामान्य से कम बारिश हुई और किसान बोवाई नहीं कर सके। परंतु जब मैं देखती हूं तो मुझे फसल उगती […]
जमीनी हकीकत: कॉप28….कथानक में बदलाव की जरूरत
जिस समय मैं यह आलेख लिख रही हूं, इस वर्ष दुबई में आयोजित कॉप-28 अर्थात जलवायु सम्मेलन अपने समापन की ओर बढ़ रहा है। यह सम्मेलन ऐसे वक्त पर हो रहा है जब दुनिया पहले से अधिक विभाजित है। एक ओर जहां दुनिया में दो भीषण जंग छिड़ी हुई हैं, वहीं अतिरंजित मौसम की घटनाएं […]
जमीनी हकीकत : कार्बन व्यापार का नुकसानदेह पहलू
इस वर्ष दुबई में आयोजित होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (सीओपी28) में कार्बन बाजार के लिए नियम-कायदे तय करने से संबंधित विषय पर चर्चा की जाएगी। विश्व के नेताओं को स्वैच्छिक कार्बन बाजार की त्रुटियों से सबक लेने की आवश्यकता है ताकि नई बाजार व्यवस्था में पिछली गलतियों की पुनरावृत्ति नहीं हो पाए। दुनिया […]
जमीनी हकीकत: स्वास्थ्य के लिए तीन तरफा चुनौतियां
स्वास्थ्य के समक्ष गंभीर खतरा पैदा होने पर बचाव के लिए लोग प्रायः प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक) लेते हैं। मगर अब ऐसी दवाएं हमें बीमार करने वाले रोगाणुओं को मारने में निष्प्रभावी साबित हो रही हैं। यह स्थिति एंटीबायोटिक के आवश्यकता से अधिक एवं गैर-जरूरी इस्तेमाल के कारण उत्पन्न हुई है। यह स्थिति रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस) […]
जमीनी हकीकत: जलवायु पर पड़ रहा खाद्य वस्तुओं का प्रभाव!
इस समस्या की मुख्य पृष्ठभूमि में ईंधन और भोजन है। मैं उन उत्सर्जनों के बारे में बात कर रही हूं जिसने दुनिया की जलवायु को बदलने के लिए ‘मजबूर’ किया है और अब जिसके चलते कई विनाशकारी प्राकृतिक आपदाएं देखने को मिल रही हैं। हम इन गैस उत्सर्जन के लिए ऊर्जा प्रणाली के योगदान पर […]









