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लेखक : अमिता बत्रा

आज का अखबार, लेख

अमेरिका की व्यापारिक सख्ती के बीच ब्रिटेन और EU से उम्मीदें, पर भारत को नई रणनीति की जरूरत

होर्मुज स्ट्रेट की लगातार नाकाबंदी और ट्रंप द्वारा लगाए गए शुल्क के कारण बाहरी क्षेत्र पर जो दबाव बना है उसे देखते हुए भारत के लिए यह महत्त्वपूर्ण है कि वह मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के माध्यम से अपने बाजार विविधता के प्रयासों को गति प्रदान करे। खासकर वे जो उसने ब्रिटेन और यूरोपीय संघ […]

आज का अखबार, लेख

विश्व की परस्पर आर्थिक निर्भरता और युद्ध की कीमत

परंपरागत समझ के तहत यही माना जाता है कि अगर विभिन्न देश आर्थिक रूप से एक दूसरे पर निर्भर हों तो उनके बीच सैन्य संघर्ष नहीं होते हैं और अगर हो रहा हो तो वह समाप्त हो जाता है। यूरोपीय संघ में शांति और समृद्धि का लंबा इतिहास, जो आर्थिक एकीकरण के सर्वोच्च चरण तक […]

आज का अखबार, लेख

डब्ल्यूटीओ में आगे बढ़ने के लिए भारत को अपने रुख में करना होगा संतुलित बदलाव

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की महानिदेशक नगोजी ओकोंजो इवेला ने कहा कि बहुपक्षीय संस्थानों के लिए अब ‘यथास्थिति’ कोई विकल्प नहीं है। उनके वक्तव्य से यह स्पष्ट हो गया कि डब्ल्यूटीओ के सुधार इस महीने कैमरून के याउन्दे में होने वाले 14वें मंत्री स्तरीय सम्मेलन (एमसी-14) के एजेंडे में प्रमुख रूप से रहेंगे। इससे पहले […]

आज का अखबार, लेख

2026 में भारत का ट्रेड एजेंडा: द्विपक्षीय समझौतों से आगे बढ़कर वैश्विक व्यापार धुरी बनने की तैयारी

भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वार्ता संपन्न हो जाना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके बीच द्विपक्षीय वार्ता रुक-रुककर 2007 से ही चल रही थी। यह तो सही है कि पिछले साल भूराजनीतिक दबावों के कारण एफटीए वार्ताओं में तेजी आई मगर यह भी स्वीकार करना होगा कि भारत ने अपने […]

आज का अखबार, लेख

2025 ने वैश्विक व्यापार को नियमों से ज्यादा सहनशक्ति की परीक्षा कैसे बना दिया?

एक ऐसे साल पर नजर डालते हुए जो व्यापार नीति उपायों के मनमाने और भेदभावपूर्ण इस्तेमाल से भरा रहा, निम्नलिखित रुझान उभरते हैं। जवाबी शुल्क लागू हुआ और बरकरार रहा: अपने चुनावी वादे को सही ठहराते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पद संभालने के करीब दो महीने बाद ‘लिबरेशन डे’ के दिन जवाबी शुल्क […]

आज का अखबार, लेख

अमेरिका कई व्यापार समझौते कर रहा, लेकिन नहीं दिखती स्थायित्व और भरोसे की गारंटी

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियों (आईईईपीए) के तहत शुल्क लगाने के राष्ट्रपति के अधिकारों की वैधता पर सुनवाई शुरू कर दी मगर व्हाइट हाउस की व्यापार टीम उसके बाद भी एक के बाद एक व्यापारिक घोषणाएं करती आ रही है। डॉनल्ड ट्रंप के बतौर राष्ट्रपति दूसरे कार्यकाल के दौरान हुए पहले बड़े […]

आज का अखबार, लेख

मुक्त व्यापार समझौतों के क्रियान्वयन की तैयारी

देश की व्यापार वार्ताओं मे खास औद्योगिक क्षेत्रों से संबंधित रणनीतियों का ध्यान रखा जाना चाहिए ताकि उन क्षेत्रों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जा सके। बता रही हैं अमिता बत्रा भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पूरी होने की ओर अग्रसर है। हालांकि, अमेरिका के साथ व्यापार समझौता (जब भी पूरा होगा) विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) […]

आज का अखबार, लेख

यूरोपीय संघ पूर्व की ओर देख रहा है: भारत-ईयू एफटीए पूरा करने का माकूल समय

तेजी से बदल रहे भू-राजनीतिक और व्यापारिक परिदृश्य में यूरोपीय संघ (ईयू) अमेरिका से इतर वैकल्पिक भागीदारों की तलाश में अपनी व्यापार नीति को एक नई दिशा देने में सबसे सक्रिय अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। वर्ष 2025 में राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के जोखिमों को भांपते हुए ईयू ने एहतियाती […]

आज का अखबार, लेख

अमेरिकी टैरिफ के झटके से निपटने के लिए व्यापक और रचनात्मक नीति सुधार जरूरी

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की राजनीति प्रेरित व्यापार नीति के चलते करीब एक महीने पहले भारत के निर्यात पर 50 फीसदी का असाधारण रूप से ऊंचा शुल्क लगाने की घोषणा की गई। अब जबकि जुर्माने वाला शुल्क लागू हो चुका है तो भारतीय निर्यातकों को ट्रंप-पुतिन-जेलेंस्की की बैठकों तथा अमेरिका के साथ स्थगित व्यापार वार्ता […]

आज का अखबार, लेख

बहुपक्षीय समझौते WTO की प्रासंगिकता बनाए रखने में हो सकते हैं सहायक

इस महीने के आरंभ में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की महानिदेशक नगोजी ओकोंजो-इवेला ने लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स में अपने भाषण में जोर देकर कहा कि बहुपक्षीय संस्थानों के पक्ष में बोलने की आवश्यकता है। खासतौर पर तब जबकि दबदबे वाली फंडिंग अर्थव्यवस्था ने इसकी आवाज और प्रासंगिकता को दबाने की ठानी है। उनका वक्तव्य […]

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