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मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का निधन, राजनीतिक गलियारों में शोकसरकार ने सोने-चांदी पर बढ़ाया टैक्स, एक्सपर्ट बोले- 2013 जैसी स्थिति लौट सकती है‘मुझे पाकिस्तान पर भरोसा नहीं’, ट्रंप के करीबी सहयोगी लिंडसे ग्राहम का तीखा हमलाMSCI Index में बड़ा बदलाव, Adani Energy से लेकर MCX तक कई भारतीय कंपनियां शामिलआर्थिक परेशानी मंजूर लेकिन ईरान को परमाणु हथियार नहीं लेने देंगे: ट्रंपतेल, युद्ध और मानसून… इन 3 वजहों से फिर बढ़ सकती है महंगाईGold, Silver Price Today: आयात शुल्क बढ़ने से सोने ने दिखाया दम, चांदी फिर ₹3 लाख पारक्या AI कंपनियों का नया दौर शुरू हो चुका है? Fractal ने दिए बड़े संकेतManipal Health ने खरीदा मुंबई का बड़ा अस्पताल, हेल्थकेयर सेक्टर में हलचलCoal India अब सिर्फ कोयला नहीं! चिली में Lithium खदान पर बड़ी तैयारी

लेखक : अजय शाह

आज का अखबार, लेख

2026 का तेल संकट: 1970 के दशक जैसा खतरा या नए बदलाव की आहट?

फारस की खाड़ी की नाकाबंदी संभवतः कुछ समय तक जारी रहेगी। मान लेते हैं कि तेल की कीमत 160 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर हो जाएगी, जो युद्ध शुरू होने से पहले की कीमत से लगभग दोगुनी है। इसके अल्पकालिक प्रभाव स्पष्ट हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रवासियों से हासिल होने वाली आय में गिरावट, माल […]

आज का अखबार, लेख

हर किसी को पसंद है अच्छा GST, लेकिन सिस्टम की खामियां समझते हैं नेता

माल एवं सेवा कर (जीएसटी) आज भारत की सफलता पर बोझ की मानिंद हो चुका है। जीएसटी जिस प्रकार काम करता है वह निवेश, निर्यात और उत्पादकता में बाधा डालता है। अमेरिका में संरक्षणवाद और ईरान में युद्ध के कारण उत्पन्न हुई नई आर्थिक तनाव की लहर का सामना करने के दौर में भारत में […]

आज का अखबार, लेख

ऊर्जा क्षेत्र की कमजोरियों को दूर करने की जरूरत

दुनिया में जो माहौल है उसने हमें घरेलू कमजोरियों के बारे में नए सिरे से चिंतित किया है। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े सैन्य संघर्ष ने ऊर्जा बाजार में उथलपुथल पैदा की है और जोखिम की गणना को बदल दिया है। भारत की बात करें तो तेल कीमतों के कारण लग रहे झटकों के […]

आज का अखबार, लेख

भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए: क्यों मुद्रा अवमूल्यन एक अच्छा विकल्प है

बीते दो दशकों में पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग ने वैश्विक आर्थिक मंदी के हालात तो निर्मित किए ही हैं, साथ ही तेल एवं गैस से जुड़े झटके भी दिए हैं। इस निराशा का प्रसार भारत तक भी हुआ है और इसके चार अलग-अलग माध्यम रहे हैं: गैस की कमी, तेल कीमतों में इजाफा, विदेश […]

आज का अखबार, लेख

AI भारत के आईटी उद्योग के लिए विनाश नहीं, बदलाव का संकेत

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और आईटी-सक्षम सेवाओं (आईटीईएस) का निर्यात आधुनिक भारतीय आर्थिक इतिहास की एक उल्लेखनीय सफलता है। यह वह प्रमुख क्षेत्र है जहां भारत ने बड़े पैमाने पर वैश्विक प्रतिस्पर्धा हासिल की है। लेकिन आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) की तीव्र प्रगति ने गिरावट की एक दास्तान को जन्म दिया है। आशंका यह है कि एआई […]

आज का अखबार, लेख

अमेरिका के साथ समझौते को समझने की जरूरत: आयात उदारीकरण से होने वाले लाभ पर फोकस

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को देश में राजनीतिक आलोचना का सामना करना पड़ा है। कहा जा रहा है कि इस समझौते के जरिये राष्ट्रीय हित का ‘पूर्ण समर्पण’ कर दिया गया है। किसानों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों ने भारत को चेतावनी दी कि भारत रूसी तेल खरीद बंद कर […]

आज का अखबार, लेख

टैक्स संधियों पर संदेह भारत की ग्रोथ स्टोरी को कमजोर कर सकता है

भारत-मॉरीशस कर संधि को लेकर हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर सीमा पार कराधान के बुनियादी सिद्धांतों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हाल ही के एक निर्णय में यह जोर दिया गया है कि कर प्राधिकरण संधि लाभों को अस्वीकार करने के लिए कर-निवास प्रमाणपत्र (टीआरसी) से आगे भी देख सकते हैं, […]

आज का अखबार, लेख

डिकंट्रोल से लाभ: प्रतिबंध हटाने से देश को मिलेंगे बड़े फायदे

भारत के लिए समृद्धि का रास्ता मुक्त बाजार वाली अर्थव्यवस्था बनने से खुलता है। ऐसी अर्थव्यवस्था जो दुनिया के साथ गहराई से जुड़ी हो। फिलहाल तो सीमाओं पर प्रतिबंधों की भूलभुलैया है, जो इस जुड़ाव में बाधा डालती है। भारतीय राज्य ने कई हस्तक्षेप निर्मित किए हैं। उदाहरण के लिए पूंजी नियंत्रण, सीमा शुल्क प्रक्रियाएं, […]

आज का अखबार, लेख

आधुनिक बिजली व्यवस्था की जटिलता का समाधान सिर्फ नई मूल्य निर्धारण प्रणाली से संभव

बिजली क्षेत्र एक जमाने में उठापटक से दूर एकदम स्थिर था। कोयले से बिजली बनाने की तकनीक भी दशकों तक ठहरी रही। इस तकनीकी ठहराव ने एक खास तरह की संस्थागत व्यवस्था – केंद्रीय नियोजन को जन्म दिया। राज्य की राजधानियों में बैठकर अधिकारी तय करते थे कि बिजली की क्षमता कितनी होगी, स्थान क्या […]

आज का अखबार, लेख

CBAM से बदला ट्रेड गेम: भारत को छूट नहीं, कार्बन प्राइसिंग की जरूरत

बढ़ते वैश्विक तापमान (ग्लोबल वार्मिंग) पर चर्चा 1990 के दशक की शुरुआत से चली आ रही है। कई दशकों तक इसका उल्लेख विभिन्न सम्मेलनों, संधियों और निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) रिपोर्ट तक ही सीमित रही। व्यावहारिक नजरिया रखने वाले लोगों ने अक्सर इसकी अनदेखी की। जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चिंता और इससे समाधान के लिए […]

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