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जियो क्रेडिट में 49.9% हिस्सेदारी खरीदेगा बैंक ऑफ अमेरिका, ₹18,268 करोड़ का सौदाटाटा मोटर्स की पहली तिमाही मजबूत, मुनाफा 2,560 करोड़ रुपये और राजस्व 19% बढ़ाज्वैलरी बिक्री से टाइटन का प्रदर्शन मजबूत, ब्रोकरेज ने बढ़ाया कमाई का अनुमानचंद्रशेखरन के दौर में टाटा का डिजिटल से सेमीकंडक्टर तक दांव, घाटे में चल रहे कारोबार बने बड़ी चुनौतीनमक से लेकर प्रीमियम प्रोडक्ट्स तक, चंद्रशेखरन के दौर में टाटा का कंज्यूमर कारोबार मजबूतचंद्रशेखरन के इस्तीफे के बाद टाटा संस की गवर्नेंस पर सवाल, ट्रस्ट्स और बोर्ड के रिश्ते अहमटाटा ग्रुप की रफ्तार पड़ी धीमी, पिछले 2 साल में मुनाफे और मार्केट कैप दोनों पर दबावटाटा स्टील के लिए भारत बना ग्रोथ इंजन, चंद्रशेखरन के दौर में क्षमता दोगुनी से ज्यादाEditorial: टाटा संस में नेतृत्व बदलाव से सुधार की उम्मीद, लिस्टिंग से बढ़ सकती है जवाबदेहीटाटा संस की लिस्टिंग पर नहीं हुआ फैसला, आरबीआई के पास आवेदन लंबित

लेखक : अजय शाह

आज का अखबार, लेख

भारत-ब्रिटेन FTA लागू, लेकिन यह समझौता कारोबार और अर्थव्यवस्था के लिए कितना बड़ा बदलाव लाएगा?

भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता हस्ताक्षर की औपचारिकता पूरी होने के बाद इस वर्ष 15 जुलाई से प्रभावी हो गया। इस समझौते पर कुछ लोगों का कहना है कि भारत ने खुला रवैया अपनाया है और जी-7 समूह में शामिल अर्थव्यवस्था यानी ब्रिटेन के साथ अपना पहला व्यापक समझौता कर मुक्त व्यापार की दिशा में एक […]

आज का अखबार, लेख

विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए मजबूत BIT और भरोसेमंद नीतियां हैं जरूरी

आर्थिक जगत अब द्विपक्षीय निवेश संधियों (बीआईटी) पर हमारी गलतियों को लेकर जागरूक हो गया है। बुनियादी रूप से भारत के लिए यह बेहतर है कि वह हर साल एक बड़ी राशि का भुगतान करे और बदले में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में शामिल विशाल धनराशि को स्थिर बनाए। भारत के सबसे अधिक हित में […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

भारत को अपना AI मॉडल बनाने का जरूरत नहीं, मजबूत AI इकोसिस्टम पर दांव लगाना सही कदम

एक अमेरिकी आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) कंपनी एंथ्रोपिक पर हाल ही में अमेरिकी सरकार ने दबाव डाला कि वह अपने नवीनतम मॉडल फेबल को गैर अमेरिकियों की पहुंच से बाहर रखे। अब भारत में कुछ लोग एक ‘संप्रभु’ एआई मॉडल की मांग कर रहे हैं। क्या भारत को खुद के लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) की आवश्यकता […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

ईंधन की कीमतें दबाने से सरकारों पर बढ़ेगा बोझ, विकासशील देशों के ग्रोथ पर पड़ेगा असर

ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी उथल-पुथल के बाद वै​श्विक अर्थव्यवस्था किस प्रकार आकार लेती है? वर्ष 1970 के दशक को इस बारे में संदर्भ के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। योम किप्पुर युद्ध (1973 की अरब-इजरायल जंग) से ईरानी क्रांति  (1979) तक कच्चे तेल की कीमतों में 12 बार इजाफा हुआ।  इस दौर […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

1980 के दशक जैसे बने देश के आर्थिक हालात, थका हुआ कॉरपोरेट सेक्टर सुधारने के लिए रणनीतिक कदम जरूरी

देश की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता का माहौल है। अब वृहद आर्थिक आंकड़े एक अंतराल के बाद सामने आते हैं जिससे विश्लेषण में एक हिस्सा धारणात्मक हो जाता है। बहरहाल, मौजूदा माहौल को आकार देने में झटकों के एक पूरे सिलसिले की भूमिका है। वर्ष2018 और 2019 में अर्थव्यवस्था बुरी हालत में थी। उसके बाद […]

आज का अखबार, लेख

जुगाड़ छोड़ना होगा! जापान के साथ मजबूत और गहरे व्यापारिक संबंध बनाने का आ गया है सही समय

भारतीय व्यापारिक अभिजात वर्ग की अंतरराष्ट्रीयकरण संबंधी रणनीति पारंपरिक रूप से अमेरिका पर केंद्रित रही है। दशकों तक यह एक तार्किक विकल्प था। अमेरिका ने दुनिया का सबसे गहरा पूंजी बाजार, सबसे उन्नत तकनीक और एक पूर्वानुमानयोग्य संस्थागत वातावरण प्रदान किया। अब यह परिदृश्य बदल गया है। अमेरिका में संस्थानों की गुणवत्ता में गिरावट आई […]

आज का अखबार, लेख

2026 का तेल संकट: 1970 के दशक जैसा खतरा या नए बदलाव की आहट?

फारस की खाड़ी की नाकाबंदी संभवतः कुछ समय तक जारी रहेगी। मान लेते हैं कि तेल की कीमत 160 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर हो जाएगी, जो युद्ध शुरू होने से पहले की कीमत से लगभग दोगुनी है। इसके अल्पकालिक प्रभाव स्पष्ट हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रवासियों से हासिल होने वाली आय में गिरावट, माल […]

आज का अखबार, लेख

हर किसी को पसंद है अच्छा GST, लेकिन सिस्टम की खामियां समझते हैं नेता

माल एवं सेवा कर (जीएसटी) आज भारत की सफलता पर बोझ की मानिंद हो चुका है। जीएसटी जिस प्रकार काम करता है वह निवेश, निर्यात और उत्पादकता में बाधा डालता है। अमेरिका में संरक्षणवाद और ईरान में युद्ध के कारण उत्पन्न हुई नई आर्थिक तनाव की लहर का सामना करने के दौर में भारत में […]

आज का अखबार, लेख

ऊर्जा क्षेत्र की कमजोरियों को दूर करने की जरूरत

दुनिया में जो माहौल है उसने हमें घरेलू कमजोरियों के बारे में नए सिरे से चिंतित किया है। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े सैन्य संघर्ष ने ऊर्जा बाजार में उथलपुथल पैदा की है और जोखिम की गणना को बदल दिया है। भारत की बात करें तो तेल कीमतों के कारण लग रहे झटकों के […]

आज का अखबार, लेख

भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए: क्यों मुद्रा अवमूल्यन एक अच्छा विकल्प है

बीते दो दशकों में पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग ने वैश्विक आर्थिक मंदी के हालात तो निर्मित किए ही हैं, साथ ही तेल एवं गैस से जुड़े झटके भी दिए हैं। इस निराशा का प्रसार भारत तक भी हुआ है और इसके चार अलग-अलग माध्यम रहे हैं: गैस की कमी, तेल कीमतों में इजाफा, विदेश […]

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