facebookmetapixel
सिर्फ शेयरों में पैसा लगाया? HDFC MF की रिपोर्ट दे रही है चेतावनीIndia manufacturing PMI: जनवरी में आर्थिक गतिविधियों में सुधार, निर्माण और सर्विस दोनों सेक्टर मजबूतसोना, शेयर, बिटकॉइन: 2025 में कौन बना हीरो, कौन हुआ फेल, जानें हर बातट्रंप ने JP Morgan पर किया 5 अरब डॉलर का मुकदमा, राजनीतिक वजह से खाते बंद करने का आरोपShadowfax Technologies IPO का अलॉटमेंट आज होगा फाइनल, फटाफट चेक करें स्टेटसGold and Silver Price Today: सोना-चांदी में टूटे सारे रिकॉर्ड, सोने के भाव ₹1.59 लाख के पारSilver के बाद अब Copper की बारी? कमोडिटी मार्केट की अगली बड़ी कहानीAI विश्व शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे स्पेन के 80 विश्वविद्यालयों के रेक्टरभारत–कनाडा सहयोग को नई रफ्तार, शिक्षा और व्यापार पर बढ़ा फोकसIndia-EU trade deal: सीमित समझौते से नहीं मिल सकता पूरा लाभ

चीन से तेज बढ़ेगा भारत! इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में China की जगह साउथईस्ट-एशिया बनेगा ग्रोथ का इंजन

रेटिंग एजेंसी के मुताबिक चीन की विकास दर वर्ष 2023 के 5.4 प्रतिशत से गिरकर वर्ष 2026 में 4.6 प्रतिशत हो जाएगी।

Last Updated- December 05, 2023 | 9:44 PM IST
india_China

एशिया प्रशांत क्षेत्र में आने वाले वर्षों के दौरान चीन की जगह भारत पर विकास का दारोमदार होगा। एसऐंडपी ग्लोबल की मंगलवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षेत्र में विकास का इंजन चीन की जगह दक्षिण व दक्षिण पूर्व एशिया होने का अनुमान है।

रेटिंग एजेंसी के मुताबिक चीन की विकास दर वर्ष 2023 के 5.4 प्रतिशत से गिरकर वर्ष 2026 में 4.6 प्रतिशत हो जाएगी। इस अवधि में भारत की विकास दर वर्ष 2023 के 6.4 प्रतिशत से बढ़कर सात प्रतिशत पर पहुंच जाएगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘हमें विकास का इंजन चीन की जगह दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया बनने का अनुमान है।’ इस दौरान क्षेत्र के अन्य देश जैसे वियतनाम, फिलिपींस और इंडोनेशिया के आगे बढ़ने का अनुमान है।

वियतनाम वर्ष 2023 की 4.9 प्रतिशत की दर की तुलना में वर्ष 2026 में 6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। इस अवधि में फिलिपींस 5.4 प्रतिशत की तुलना में 6.4 प्रतिशत और इंडोनेशिया 5 प्रतिशत की यथावत दर से बढ़ने का अनुमान है। इस रिपोर्ट के मुताबिक एशिया प्रशांत क्षेत्र के केंद्रीय बैंक दीर्घावधि तक ब्याज दरों को उच्च रख सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘हमें क्षेत्रीय ब्याज दरें अधिक रहने का अनुमान है। अमेरिका का फेडरल रिजर्व महंगाई को काबू में रखने के लिए कड़ी मौद्रिक नीति पर कायम रहेगा। फेड और क्षेत्रीय केंद्रीय बैंकों की नीतिगत ब्याज दरों में अंतर होने से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था से पूंजी का प्रवाह बाहर हो सकता है और इससे घरेलू मुद्राएं दबाव में आएंगी।’

भारत में खुदरा महंगाई घटने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 27 में भारत में महंगाई गिरकर 4.7 प्रतिशत होने का अनुमान है जबकि वित्त वर्ष 24 में 5.5 प्रतिशत है। इस अवधि के दौरान नीतिगत ब्याज दरें 6.5 प्रतिशत से गिरकर 5 प्रतिशत होने का अनुमान है। एशिया प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि रहने मजबूत रहने का अनुमान है। इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं को श्रम बाजार और सेवा क्षेत्र से विस्तार मिलेगा।

First Published - December 5, 2023 | 9:44 PM IST

संबंधित पोस्ट