शेयर बाजारों के जोखिम भरे नियमन की आशंका
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने स्टॉक एक्सचेंजों एवं डिपॉजिटरी के नियमन के मानकों एवं मौजूदा स्वामित्व की समीक्षा के लिए 6 जनवरी को एक विमर्श पत्र जारी किया। बाजार अर्थव्यवस्था में स्टॉक एक्सचेंज एवं डिपॉजिटरी जैसे बाजार ढांचागत संस्थानों (एमआईआई) की असामान्य हैसियत होती है। जहां वित्तीय बाजारों में कारोबार के लिए तमाम […]
बाजार में रकम और शेयरों की तेजी में नहीं सीधा संबंध
पिछले महीने मैंने लिखा था कि लोग कोविड-19 के झटके के बाद वर्ष 2020 में बाजार की चाल से इतने हैरान दिखे कि पर्याप्त अनुभव होने के बाद भी वे यह नहीं समझ पाए कि आखिर ऐसी कौन सी बातें हैं जो बाजार को लगातार ऊपर और नए स्तरों पर ले जा रही हैं। शेयरों […]
एनबीएफसी, यूसीबी के लिए जोखिम आधारित आंतरिक अंकेक्षण अनिवार्य
भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को चुनिंदा गैर-बैंक लेनदारों (एनबीएफसी) व शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लिए जोखिम आधारित आंतरिक अंकेक्षण की व्यवस्था शुरू की। 5,000 करोड़ रुपये की परिसंपत्ति वाली व जमाएं स्वीकार करने वाली सभी एनबीएफसी और 500 करोड़ रुपये की संपत्ति वाले शहरी सहकारी बैंकों को 31 मार्च, 2022 से इस व्यवस्था […]
बजट में जोखिम एवं अनिश्चितता कम करने पर रहे जोर
एक खास तरह के अर्थशास्त्रियों के लिए बजट सत्र कल्पना के घोड़ों को खुला छोड़ देने का वक्त होता है। लिहाजा दो बुरे खयालों को इतनी शिद्दत से रखा जा रहा है कि पिछले मौकों की तरह अच्छे लोग भी इन बुरे खयालों पर गौर करने की सोच रहे हैं। पहला गलत विचार एक ‘बैड […]
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) की शुरुआत को पांच वर्ष पूरे हो चुके हैं। मौजूदा सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक इस योजना में फरवरी 2020 में आमूलचूल बदलाव भी किया गया लेकिन अभी भी कई गड़बडिय़ां बरकरार हैं। योजना में कई ढांचागत और प्रक्रियागत कमियां हैं और कई विशिष्ट गुण होने के बावजूद […]
बीमा नियामक ने आग और उससे जुड़े जोखिमों को कवर करने के लिए एक मानक बीमा उत्पाद पेश करने का फैसला किया है। जो बीमा कंपनियां आग और उससे संबंधित नुकसान के बीमा से जुड़ी हुई हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से 1 अप्रैल 2021 से इसकी पेशकश करनी होगी। नियामक इसके लिए 3 तरह का […]
खेती और किसान से जुड़े विरोधाभास का समाधान?
भारतीय कृषि पर जानी-मानी ब्रिटिश विशेषज्ञ बारबरा हैरिस-व्हाइट ने हाल में बताया था, ‘भारत में कृषि बाजार कैसे विकसित होते हैं और उनमें क्या कमजोरियां हैं।’ बारबरा ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की मानद प्रोफेसर हैं। वह भारत की घनिष्ठ मित्र हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि बाजार सूक्ष्म बाजार हैं, जिन्हें बहुत सी पूंजी और तकनीक की […]
खुदरा ऋण जरूरी, लेकिन जोखिम भरा
दूध का जला छाछ भी फूंक फूंक कर पीता है। यह कहावत बड़े आकार के कॉर्पोरेट ऋण देने में बैंकों की अनिच्छा पर सटीक बैठती है। बैंकों के इस रवैये से स्वत: ही स्थिति खुदरा कर्जदारों के पक्ष में हो जाती है। हालांकि खुदरा ऋणों की गुणवत्ता पर जोखिम बढ़ रहा है। मैकिंजी में वरिष्ठ […]
ऋणों के पुनर्भुगतान का जोखिम बढ़ा
रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि मॉरिटोरियम खत्म होने के बाद किस्तों की वसूली में सुधार के बावजूद अगले 12 महीने तक भारत में प्रतिभूति वाले ऋणों के पुनर्भुगतान को लेकर जोखिम बना रहेगा। कमजोर आर्थिक स्थितियों की वजह से कर्ज लेने वालों के कर्ज भुगतान की क्षमता प्रभावित होना जारी रहेगी, इससे संपत्ति […]
संकटकाल में क्रिप्टोकरेंसी लाभकारी मगर जोखिम भारी
महामारी काल में क्रिप्टोकरेंसी ने परिसंपत्ति वर्ग में एक अलग पहचान बनाई है। कारोबारी मात्रा तथा बाजार पूंजीकरण, दोनों स्तरों पर सबसे अधिक लोकप्रिय दो क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन तथा इथीरियम हैं। जनवरी के बाद से बिटकॉइन की कीमतों में लगभग 141 प्रतिशत की तेजी आई है जबकि इथीरियम की कीमतें 250 प्रतिशत से ज्यादा हो चुकी […]