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ऋणों के पुनर्भुगतान का जोखिम बढ़ा

Last Updated- December 14, 2022 | 8:21 PM IST

रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि मॉरिटोरियम खत्म होने के बाद किस्तों की वसूली में सुधार के बावजूद अगले 12 महीने तक भारत में प्रतिभूति वाले ऋणों के पुनर्भुगतान को लेकर जोखिम बना रहेगा। कमजोर आर्थिक स्थितियों की वजह से कर्ज लेने वालों के कर्ज भुगतान की क्षमता प्रभावित होना जारी रहेगी, इससे संपत्ति समर्थित प्रतिभूतियों (एबीएस) के प्रदर्शन का जोखिम बढ़ेगा।
ऋण के किस्तों के भुगतान  की छूट (मॉरेटोरियम) अगस्त 2020 में खत्म हो गई। मूडीज में असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट और एनालिस्ट दीपांशु रुस्तगी ने कहा कि सितंबर और अक्टूबर महीने में भारतीय एबीएस में संग्रह सुधरा है, हालांकि यह कोरोनावायरस के पहले के स्तर से नीचे बना हुआ है।  वहीं इस दौरान रेटेड ऑटो और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले (एमएसएमई) उद्यमों के ऋण एबीएस में चूक की दरें बढ़ी हैं। भारी आर्थिक गिरावट के कारण कुछ उधारी लेने वाले अपना पुनर्भुगतान शुरू करने या बनाए रखने में सफल नहीं हुए हैं। रुस्तगी ने कहा, ‘कमजोर आर्थिक स्थिति की वजह से संपत्ति प्रदर्शन जोखिम बढ़ा रहेगा। हम उम्मीद करते हैं कि वाहन ऋण एबीएस और एमएसएमई ऋण एबीएस में चूक अगले 6 से 12 महीनों के दौरान जारी रहेगी या बढ़ेगी।’
सरकार की ओर से समर्थन के नए कदमों और मौजूदा लेन-देन की सुविधाओं से कुछ जोखिम कम होगा। नवंबर में सरकार ने 2.7 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय समर्थन पैकेज घोषित किया है, जिससे एमएसएमई क्षेत्र के उधारी लेने वालों को लाभ होगा।
बहरहाल एक अन्य रिपोर्ट में मूडीज ने कहा है कि कोरोनावायरस से राहत केकदमों में ढील दिए जाने से आसियान और भारतीय बैंकों के गैर निष्पादित कर्ज (एनपीएल) बढऩे कम होंगे। दोनों इलाकों में विषम रिकवरी होने की संभावना है। मूडीज में असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट और एनलिस्ट रेबाका टैन ने कहा कि समर्थन के कदमों से उधारी लेने वालों को समायोजित होने का वक्त मिलेगा और इसकी वजह से बैंकों की संपत्ति की गुणवत्ता में तेज गिरावट का जोखिम कम होगा।
अभी भी जोखिम बना हुआ है, जिसकी वजह से 2021 में असमान रिकवरी बनी रहेगी, जिसकी वजह से अस्थिरता की संभावना है, खासकर कोरोनावायरस संक्रमण की नई लहर भी असर डाल सकती है।
महामारी में कर्ज लेने वालों की मदद करने के लिए कर्ज की किस्त टालने की योजना लाई गई और यह तमाम देशों में हुआ। उसके बाद ज्यादातर देशों में इसे चरणबद्ध तरीके से खत्म कर दिया गया। कर्ज की किस्त टालने की जगह नियामक अब बैंकों को कर्ज के पुनर्गठन पर जोर दे रहे हैं और कर्जदाताओं को इन कर्जों को प्रदर्शन के आधार पर वर्गीकृत करने की अनुमति दी गई है।
बैंक संपत्ति की गुणवत्ता में गिरावट के प्रबंधन करने के हिसाब से यह अहम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक सुस्ती की वजह से संपत्ति की गुणवत्ता में गिरावट की संभावना है, जिसकी वजह से बेरोजगारी बढ़ेगी।

First Published - December 10, 2020 | 11:52 PM IST

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