आपका पैसा

मई-जून में ही फाइल कर दिया ITR? आज रिटर्न भरने की आखिरी तारिख, उससे पहले दोबारा चेक करें ये जानकारियां

टैक्स एक्सपर्ट का मानना है कि अगर किसी टैक्सपेयर्स ने मई या जून में ही ITR फाइल कर दिया था, तो उन्हें 31 जुलाई की आखिरी तारीख से पहले एक बार री-चेक जरूर कर लेना चाहिए

Published by
ऋषभ राज   
Last Updated- July 31, 2026 | 3:17 PM IST

ITR Filing 2026: आज यानी 31 जुलाई को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख है और इनकम टैक्स पोर्टल पर टैक्सपेयर्स की भारी भीड़ देखी जा रही है। अंतिम समय की इसी अफरा-तफरी और तकनीकी अड़चनों से बचने के लिए बहुत से टैक्सपेयर्स ने मई या जून के महीने में ही अपना ITR फाइल कर दिया था। अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने अपना रिटर्न महीनों पहले ही फाइल कर दिया था, तो खुद को पूरी तरह निश्चिंत न समझें। आज की इस अंतिम डेडलाइन के खत्म होने से पहले एक बार फिर से अपने फाइल किए गए रिटर्न की री-चेकिंग करना बेहद जरूरी है।

मई या जून में जब आप रिटर्न फाइल करते हैं, तो उस समय तक बैंकों और दूसरे संस्थाओं की ओर से TDS से जुड़े कई आंकड़े अपडेट होना बाकी रहते हैं। जून और जुलाई के दौरान कंपनियां और बैंक अपने TDS स्टेटमेंट को रिवाइज करते हैं, जिससे टैक्स डिपार्टमेंट के सिस्टम में नई जानकारी जुड़ जाती है। ऐसे में आज ही अपने रिटर्न की दोबारा जांच कर लेना एक समझदारी भरा कदम होगा। इससे अनजाने में हुई गलतियों को वक्त रहते सुधारा जा सकता है, छूटे हुए टैक्स क्रेडिट का दावा किया जा सकता है और किसी भी संभावित नोटिस या रिफंड में होने वाली देरी से बचा जा सकता है।

सबसे पहले करें ई-वेरिफिकेशन का स्टेटस चेक

अगर आपने कई महीने पहले ही अपना ITR फाइल कर दिया था, तो सबसे पहले यह जांच लें कि उसका ई-वेरिफिकेशन पूरा हुआ है या नहीं। टैक्स एक्सपर्ट बताते हैं कि सिर्फ ITR फाइल कर देना काफी नहीं है। अगर उसका वेरिफिकेशन नहीं हुआ, तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट उसे मान्य नहीं मानता। इसलिए टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर ‘Services’ सेक्शन में ‘View Filed Returns’ पर क्लिक करके अपना स्टेटस जरूर देखना चाहिए। वहां आपका स्टेटस ‘Successfully e-Verified’ दिखना चाहिए।

AIS, TIS और Form 26AS का मिलान जरूर करें

ITR फाइल करने के बाद एक बार अपना Annual Information Statement (AIS), Taxpayer Information Summary (TIS) और Form 26AS भी जरूर चेक करें। इससे यह पता चल जाएगा कि आपने रिटर्न में जो आय और टैक्स की जानकारी दी है, वह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड से मेल खाती है या नहीं। कई बार बैंक या दूसरी संस्थाएं बाद में आपकी अतिरिक्त आय या किसी लेनदेन की जानकारी अपडेट कर देती हैं, जिससे आपके पहले से फाइल किए गए ITR और विभाग के रिकॉर्ड में फर्क आ सकता है। यह जानकारी आप इनकम टैक्स पोर्टल के AIS और TIS सेक्शन में जाकर देख सकते हैं।

Form 26AS में नया TDS क्रेडिट जरूर चेक करें

ज्यादातर टैक्सपेयर्स ITR फाइल करते समय फॉर्म 26AS में दिख रही TDS की जानकारी के आधार पर ही रिटर्न फाइल करते हैं। लेकिन बाद में TDS काटने वाली संस्थाएं अपने TDS स्टेटमेंट में बदलाव या अपडेट कर सकती हैं। टैक्स एक्सपर्ट के मुताबिक, रिटर्न फाइल होने के बाद भी फॉर्म 26AS में नया TDS क्रेडिट जुड़ सकता है। अगर कोई TDS क्रेडिट छूट गया है, तो आपकी टैक्स देनदारी बढ़ सकती है या मिलने वाला रिफंड कम हो सकता है। इसलिए एक बार फॉर्म 26AS को दोबारा जरूर चेक कर लें।

Also Read: Explainer: क्या UPI, NEFT या RTGS से पैसे भेजने पर भी आ सकता है टैक्स का नोटिस? समझें पूरा नियम

रिफंड से पहले बैंक अकाउंट करें वेरिफाई

अगर आपने ITR में बैंक खाते की गलत जानकारी दी है या ऐसा खाता दर्ज किया है जो अब सक्रिय नहीं है, तो रिटर्न प्रोसेस होने के बाद भी रिफंड मिलने में कई महीनों की देरी हो सकती है। इसलिए यह जरूर जांच लें कि ई-फाइलिंग पोर्टल पर दर्ज आपका बैंक खाता एक्टिव हो और ‘प्री-वैलिडेटेड’ भी हो। आप यह जानकारी ई-फाइलिंग पोर्टल पर ‘My Profile’ में जाकर ‘My Bank Account’ विकल्प के जरिए चेक कर सकते हैं।

एक बार पूरा ITR दोबारा जरूर जांचें

कई बार ITR फाइल करने के कुछ समय बाद लोगों को पता चलता है कि वे किसी आय के स्रोत की जानकारी देना, किसी डिडक्शन या टैक्स छूट का दावा करना भूल गए थे। निशांत शंकर की सलाह है कि एक बार अपना पूरा रिटर्न दोबारा ध्यान से जरूर देखें। यह सुनिश्चित करें कि आपकी सभी तरह की आय, डिडक्शन, टैक्स छूट, कैपिटल गेन्स, विदेशी संपत्तियां और आगे ले जाने वाले नुकसान (Carry-forward Losses) सही तरीके से दर्ज किए गए हैं।

ITR से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट संभालकर रखें

ITR फाइल करते समय इनकम टैक्स पोर्टल पर कोई सहायक डॉक्यूमेंट अपलोड नहीं करना पड़ता। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप उन कागजातों की अब जरूरत नहीं समझें। अगर भविष्य में आपका रिटर्न जांच या स्क्रूटनी के लिए चुना जाता है, तो आपसे Form 16, TDS सर्टिफिकेट, निवेश से जुड़े डॉक्यूमेंट, बैंक स्टेटमेंट और कैपिटल गेन्स की गणना से संबंधित कागजात मांगे जा सकते हैं। इसलिए ITR फाइल करने के बाद भी इन सभी डॉक्यूमेंट्स को संभालकर और व्यवस्थित तरीके से रखना जरूरी है।

पोर्टल के नोटिफिकेशन पर नजर रखें

ITR फाइल करने के बाद समय-समय पर इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉगिन करते रहें। साथ ही, अपने रजिस्टर्ड ई-मेल और मोबाइल नंबर पर आने वाले मैसेज भी नियमित रूप से चेक करें। अगर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से कोई नोटिस, डिफेक्टिव रिटर्न का संदेश या किसी जानकारी/स्पष्टीकरण की मांग आए, तो उसका जल्द से जल्द जवाब दें। समय पर जवाब देने से आप कानूनी परेशानियों और बेवजह लगने वाले ब्याज से बच सकते हैं।

गलती मिले तो तुरंत रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करें

अगर आज दोबारा जांच करते समय आपको अपने ई-वेरिफाइड ITR में कोई गलती, छूटी हुई आय या मिस हुआ डिडक्शन दिखता है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में आप रिवाइज्ड रिटर्न (संशोधित रिटर्न) फाइल कर सकते हैं। रिवाइज्ड रिटर्न आपके पहले वाले रिटर्न की जगह ले लेता है। निशांत शंकर के मुताबिक, जैसे ही किसी गलती का पता चले, बिना देरी किए रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर देना चाहिए। संबंधित असेसमेंट ईयर की 31 दिसंबर तक या असेसमेंट पूरा होने से पहले, जो भी पहले हो, रिवाइज्ड रिटर्न फाइल किया जा सकता है।

First Published : July 31, 2026 | 3:10 PM IST