प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिना किसी लेट फीस के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आज (31 जुलाई 2026) आखिरी तारीख है। आयकर पोर्टल पर टैक्सपेयर्स की भारी भीड़ है और सर्वर पर दबाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अगर आपने अभी तक अपना रिटर्न जमा नहीं किया है, तो आखिरी समय की तकनीकी अड़चनों से बचते हुए तुरंत इसे पूरा करें।
साथ ही, जिन टैक्सपेयर्स ने मई या जून के महीने में ही अपना ITR फाइल कर दिया था, उन्हें भी आज एक बार पोर्टल पर लॉगिन करके अपने रिटर्न का फाइनल स्टेटस री-चेक कर लेना चाहिए। बिजनेस क्लास (ITR-3 और ITR-4) के कुछ लोगों के लिए यह समयसीमा 31 अगस्त है, लेकिन आम टैक्सपेयर्स के लिए आज ही अंतिम मौका है।
अगर आप आज रात 12 बजे तक रिटर्न फाइल करने से चूक जाते हैं, तो 31 दिसंबर तक ‘बिलेटेड रिटर्न’ फाइल किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए आपको भारी लेट फीस चुकानी होगी। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आजकल AI और डेटा एनालिटिक्स से आपके बैंक खातों, डीमैट ट्रांजेक्शन, प्रॉपर्टी और विदेश यात्राओं तक पर नजर रखता है। इसलिए ITR भरते या री-चेक करते समय इन 10 जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है:
फॉर्म 16 में केवल आपकी सैलरी और उस पर कटे TDS का ब्योरा होता है। अगर आपको बैंक FD, RD, सेविंग अकाउंट के ब्याज, डिविडेंड, फ्रीलांसिंग, प्रॉपर्टी के किराये या शेयर-म्यूचुअल फंड से कमाई हुई है, तो उसे भी ITR में शामिल करें।
ITR फाइल करते समय सही फॉर्म का चुनाव करना बेहद जरूरी है, क्योंकि गलत फॉर्म चुनने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके रिटर्न को ‘डिफेक्टिव’ घोषित कर सकता है; ऐसे में सामान्य सैलरी, पेंशन और साधारण ब्याज से कमाई करने वालों को ITR-1, कैपिटल गेन्स, एक से अधिक मकान या विदेशी संपत्ति-आय वालों को ITR-2, बिजनेस, फ्रीलांसिंग या F&O/ट्रेडिंग करने वालों को ITR-3 और Presumptive Taxation Scheme का फायदा उठाने वाले छोटे व्यापारियों व प्रोफेशनल्स को ITR-4 फॉर्म चुनना चाहिए।
रिटर्न जमा करने से पहले AIS, TIS और फॉर्म 26AS की जानकारी का अपने आंकड़ों से मिलान करें। यदि डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड और आपके ITR में अंतर होगा, तो नोटिस आ सकता है।
अपने सभी सक्रिय बैंक खातों की जानकारी ITR में दर्ज करें। जिस खाते में रिफंड पाना चाहते हैं, उसका अकाउंट नंबर और IFSC कोड बिल्कुल सही होना चाहिए और खाता प्री-वैलिडेटेड होना चाहिए।
यदि बीते वित्त वर्ष में आपने जॉब चेंज की है, तो पुराने और नए दोनों एम्प्लॉयर्स की सैलरी जोड़कर ही कुल आय दिखाएं। ऐसा न करने पर कम TDS कटने के कारण बाद में अतिरिक्त टैक्स देनदारी बन सकती है।
बचत खाते, FD और RD से मिला ब्याज पूरी तरह टैक्स योग्य होता है (निर्धारित छूट सीमा के बाद)। TD न कटने का मतलब यह नहीं कि आप टैक्सफ्री हैं, क्योंकि बैंक इसका डेटा सीधे टैक्स डिपार्टमेंट को भेजता है।
डीमैट खाता पैन से लिंक होता है। शेयर-म्यूचुअल फंड बेचने या प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री से हुए मुनाफा या नुकसान (Capital Gain/Loss) का पूरा ब्योरा दें। नुकसान दर्ज करने से भविष्य में टैक्स बचाने में मदद मिलती है।
धारा 80C, 80D (हेल्थ इंश्योरेंस), NPS आदि के तहत मिलने वाली छूट का सही दावा करें। इनसे जुड़े डॉक्यूमेंट्स सुरक्षित रखें, क्योंकि डिपार्टमेंट जांच के दौरान सबूत मांग सकता है।
अगर आपके पास विदेशी शेयर, ETF, विदेशी बैंक खाता या किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म में निवेश है, तो ITR में उसका खुलासा करना कानूनी रूप से जरूरी है।
ITR सबमिट करना ही काफी नहीं है। जमा करने के बाद आधार OTP, नेट बैंकिंग या डीमैट अकाउंट के जरिए इसका ई-वेरिफिकेशन तुरंत करें। बिना वेरिफिकेशन के भरा गया रिटर्न अमान्य माना जाता है।
अगर आप 31 जुलाई की डेडलाइन मिस कर देते हैं, तो 1 अगस्त से बिलेटेड रिटर्न भरते समय पेनल्टी देनी होगी। जिन टैक्सपेयर्स की सालाना आय 5 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें 5,000 रुपये की लेट फीस देनी होगी। वहीं, 5 लाख रुपये या उससे कम आय वालों के लिए लेट फीस की रकम 1,000 रुपये तय की गई है।