facebookmetapixel
Advertisement
4000 लोगों की जा सकती है नौकरी! JLR बड़ी छंटनी की तैयारी में, बढ़ते खर्च से कंपनी परेशानसुभाष चंद्रा की बढ़ीं मुश्किलें: CBI ने दर्ज की FIR, फर्जी कागज दिखाकर ₹1,322 करोड़ के फ्रॉड का आरोपएक शेयर पर ₹60 का मोटा डिविडेंड! पावर ट्रांसमिशन सेक्टर से जुड़ी कंपनी का तोहफा, रिकॉर्ड डेट फिक्सNPS में ‘नो मिनिमम इन्वेस्टमेंट’ का क्या है सच? एक्सपर्ट से समझें, किसे मिलेगा फायदा और किसे नहींटाटा मोटर्स खरीदेगी इटली की मशहूर इवेको ग्रुप, €3.82 अरब की डील से ग्लोबल मार्केट में बढ़ेगा दबदबामोटी कमाई का चांस! अगले हफ्ते लगभग 150 कंपनियां देंगी डिविडेंड, एक शेयर पर ₹60 तक कमाने का मौकाजन्माष्टमी पर बाजारों में बंपर खरीदारी की उम्मीद, 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के व्यापार का अनुमान18 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 37.5 अरब डॉलर खर्च, फिर भी ट्रंप ने ईरान युद्ध को बताया ‘छोटी बात’लाइट, कैमरा और एक्शन: कैसे साल 1991 के आर्थिक सुधारों ने भारतीय सिनेमा का पूरा कारोबार बदल दिया?भारत के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए राज्यों और शहरों को खुद जुटाना होगा फंड: भार्गव दासगुप्ता

एनबीएफसी, यूसीबी के लिए जोखिम आधारित आंतरिक अंकेक्षण अनिवार्य

Advertisement
Last Updated- December 12, 2022 | 8:47 AM IST

भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को चुनिंदा गैर-बैंक लेनदारों (एनबीएफसी) व शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लिए जोखिम आधारित आंतरिक अंकेक्षण की व्यवस्था शुरू की। 5,000 करोड़ रुपये की परिसंपत्ति वाली व जमाएं स्वीकार करने वाली सभी एनबीएफसी और 500 करोड़ रुपये की संपत्ति वाले शहरी सहकारी बैंकों को 31 मार्च, 2022 से इस व्यवस्था को लागू करना होगा।
आरबीआई ने कहा, यह एनबीएफसी व यूसीबी की तरफ से अपनाई जा रही आंतरिक अंकेक्षण की व्यवस्था व प्रक्रियाओं में प्रभावकारिता में इजाफा करेगा।
इन इकाइयों के यहां पहले ही आंतरिक अंकेक्षण की व्यवस्था है लेकिन मोटे तौर पर यह लेनदेन की जांच, शुद्धता की जांच और खाते के रिकॉर्ड व वित्तीय रिपोर्ट की विश्वसनीयता के अलावा कानूनी व नियामकीय जरूरतों आदि पर ध्यान केंद्रित करता है।
चूंकि ये सभी इकाइयां आगे बढ़ी हैं और व्यवस्था के लिहाज से अहम बन गई है, लिहाजा केंद्रीय बैंक ने उधार देने वाली इकाइयों के लिए अलग-अलग अंकेक्षण की व्यवस्था ने अंसगतता, जोखिम व खाई सृजित की है।
हालिया डिफॉल्ट के बाद आरबीआई अब एनबीएफसी व यूसीबी की निगरानी बैंकों की तरह कर रहा है। ये फर्में, खास तौर से एनबीएफसी ने आरबीआई के सरल नियमन देखा है, जिससे वे तेज गति से आगे बढऩे में सक्षम हुई हैं।
आरबीआई ने कहा, चूकि एससीबी, एनबीएफसी और यूसीबी एक तरह के जोखिम का सामना करते हैं क्योंकि वे एक तरह के काम मेंं जुटे हैं, ऐसे में उनके आंतरिक अंकेक्षण की व्यवस्था भी एक जैसी करने की दरकार है।

Advertisement
First Published - February 3, 2021 | 11:34 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement