भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने केंद्रीय बजट 2026-27 के बजट पूर्व प्रस्तावों में केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और सतत पूंजीगत व्यय की जरूरत को पूरा करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का त्वरित गति से निजीकरण किया जाए। यह अधिक अनुमानित, निवेशक नेतृत्व वाला और संस्थागत रूप से संचालित होना चाहिए।
सीआईआई ने कहा कि सुनियोजित निजीकरण रणनीति अपनाने से सरकार को विकास प्राथमिकताओं के लिए धन जुटाने में मदद मिलेगी। इससे दक्षता, तकनीक अपनाने और क्षेत्रों में वैश्विक प्रतिस्पर्धा बेहतर होगी। ऐसे में निजी सहभागिता की मदद से मूल्य भी बढ़ेगा।
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजित बनर्जी ने भारत के विकास पथ पर निजीकरण के महत्त्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत के विकास की गाथा में निजी उद्यमों और नवाचार का योगदान बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप दूरदर्शी निजीकरण नीति सरकार को अपने मुख्य कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाएगी। साथ ही निजी क्षेत्र को औद्योगिक परिवर्तन और रोजगार सृजन में तेजी लाने के लिए सशक्त बनाएगी।’
सीआईआई ने सरकार की रणनीतिक विनिवेश नीति के शीघ्र कार्यान्वयन का आह्वान किया है। इसके तहत गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में सभी सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों से बाहर निकलना और रणनीतिक क्षेत्रों में केवल न्यूनतम उपस्थिति बनाए रखना शामिल है।
उद्योग निकाय सूत्र ने क्रियान्वयन को मजबूत करने के लिए चार सूत्रीय रणनीति का प्रस्ताव रखा है। प्रथम, सीआईआई ने चुनिंदा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के निजीकरण के तरीके में बदलाव की मांग की है। इसके तहत एप्रोच बदल कर मांग आधारित करने की सिफारिश की है। दूसरा, सीआईआई ने तीन साल की अवधि वाली निजीकरण प्रक्रिया की घोषणा करने का आह्वान किया है। इससे निवेशकों को अधिक स्पष्टता और योजना बनाने में निश्चिचतता मिलेगी। तीसरी, औद्योगिक निकाय ने निजीकरण की प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए अधिक प्रतिबद्ध संस्थागत ढांचा को बनाने का प्रस्ताव पेश किया है। चौथा, सीआई ने सभी गैर-रणनीतिक सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के पूर्ण निजीकरण में समय लगने के मद्देनजर अंतरिम उपाय के रूप में सुनियोजित विनिवेश रोडमैप की सिफारिश की है।
सीआईआई के विश्लेषण के अनुसार 78 सूचीबद्ध सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सरकार की हिस्सेदारी को घटाकर 51 प्रतिशत करने से लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हो सकती है।