facebookmetapixel
Advertisement
‘डिजिटल अरेस्ट’ को अलग अपराध बनाने पर विचार करे सरकार: सुप्रीम कोर्टकम वेतन से ISRO छोड़ रहे वैज्ञानिक? इस्तीफों के बाद सरकार ने नियम किए सख्तपेपर लीक बिल पर लोकसभा में घमासान, सत्ता और विपक्ष आमने-सामनेकॉपीराइट के नाम पर उगाही का आरोप, Delhi High Court ने केंद्र और Meta को नोटिस भेजापीएम का पोस्ट हटाने का मामला, मेटा के अधिकारी जोल कैपलन तलबसोशल मीडिया पर भ्रामक खबरों से निपटने के लिए सरकार का बड़ा कदम, 2 घंटे में देना होगा जवाबइंडिगो ने परिचालन संकट से ली सीख, सिस्टम मजबूत कर अंतरराष्ट्रीय विस्तार पर फोकसटाटा कम्युनिकेशंस और टीटीबीएस लाएंगी छोटे उद्यमों के लिए एआई प्लेटफॉर्मभारत के स्पेस-टेक स्टार्टअप में बढ़ा निवेश, पांच साल में जुटाए 87 करोड़ डॉलरटाटा संस का मुनाफा 5 साल के निचले स्तर पर, राजस्व बढ़ने के बावजूद 36% की गिरावट

दिल्ली में सस्ते मकानों की बढ़ी मांग

Advertisement
Last Updated- December 07, 2022 | 2:45 PM IST

रियल एस्टेट कंपनियों की माने तो सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने के बावजूद एनसीआर में रिहायशी योजनाओं की बुकिंग में कमी नहीं आ रही है।


ऐसा अफोर्डबल हाउसों यानी 20 से 30 लाख रुपये वाले मकानों की मांग के उठने और मुनाफे के लिए निवेश करने वाले छोटी अवधि के निवेशकों के बाजार से गायब होने के चलते हो रहा है। गाजियाबाद के एसवीपी ग्रुप के निदेशक विजय जिंदल कहते है कि ‘छोटी अवधि के निवेशक आपस में ही मकानों की खरीद फरोख्त करते हुए मकानों की कीमत को बढ़ा देते हैं।

ऐसे में मकान की कीमत को उसकी वास्तविक कीमत से दो से तीन गुना कर दिया जाता है और उपभोक्ता को वास्तविक कीमत का अंदाजा नहीं हो पाता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल बाजार से ऐसे निवेशक गायब हैं और इसलिए यह मकान खरीदने के लिए एक बहुत अच्छा समय है। ‘ एनसीआर का एक बहुत बडा तबका सस्ते मकानों की आस में बैठा हुआ है और इस समय डेवलपर कंपनियां भी ऐसे मकानों के निर्माण में दिलचस्पी ले रही हैं तो मानी हुई बात है कि सस्ते मकानों की मांग तो बढ़ेगी ही।

नोएडा स्थित पैरामांउट ग्रुप के विपणन प्रमुख कुलभूषण गौड़ का कहना है कि ‘लोग इस समय एनसीआर में बसना चाहते है। इसलिए बैंक की ऋण दरों के बढ़ने के बावजूद लोग मकान खरीदने के लिए आगे आ रहे हैं। मकान खरीदने वालों में मध्यम और निम् मध्यम वर्ग के लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। इस वर्ग का मानना है कि किराये के मकान में 7 से 8 हजार रुपये किराया देने से अच्छा है कि मकान खरीद लिया जाए।

Advertisement
First Published - August 3, 2008 | 11:21 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement