facebookmetapixel
Advertisement
Chandra Grahan 2026: साल का पहला चंद्र ग्रहण आज, जानें सूतक काल और भारत में दिखने का समयUS–Iran टकराव बढ़ा तो क्या होगा सेंसेक्स-निफ्टी का हाल? इन सेक्टर्स को सबसे ज़्यादा जोखिममोटापा घटाने वाली दवाएं: फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक कंपनियों के लिए खतरा या मौका?Aviation sector: इंडिगो की वापसी, लेकिन पश्चिम एशिया संकट और महंगा ईंधन बना खतराUS Israel-Iran War: सुरक्षा चेतावनी! अमेरिका ने 14 देशों से नागरिकों को तुरंत बाहर निकलने का निर्देश दियाTrump ने दी चेतावनी- ईरान पर हमला 4-5 हफ्तों तक रह सकता है जारी, जरूरत पड़ी तो और बढ़ेगा!Stock Market Holiday: NSE और BSE में आज नहीं होगी ट्रेडिंग, जानें पूरा शेड्यूलपश्चिम एशिया में जंग से दहला दलाल स्ट्रीट: सेंसेक्स 1048 अंक टूटा, निवेशकों के ₹6.6 लाख करोड़ डूबेभारतीय चाय पर ईरान संकट का साया: भुगतान अटके और शिपमेंट पर लगी रोक, निर्यातकों की बढ़ी चिंताकपड़ा उद्योग पर युद्ध की मार: पश्चिम एशिया के ऑर्डर अटके, तिरुपुर और सूरत के निर्यातकों की बढ़ी चिंता

सोने और चांदी में निवेश करने से पहले जान लें कि ETF पर कैसे लगता है टैक्स

Advertisement

ETF Tax: गोल्ड और सिल्वर ETF के लिए हाल के टैक्स नियमों में बदलाव ने निवेशकों के लिए ये समझना जरूरी कर दिया है

Last Updated- October 10, 2025 | 5:29 PM IST
Gold and Silver Rate today
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सोने और चांदी की कीमतें इस हफ्ते नई ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। गुड रिटर्न के मुताबिक, 24 कैरेट सोने की कीमत 12,244 रुपये प्रति ग्राम और चांदी 174 रुपये प्रति ग्राम हो गई है। दिवाली और धनतेरस जैसे त्योहारों से पहले भारतीय निवेशक सोच में पड़ गए हैं कि फिजिकल गोल्ड, डिजिटल गोल्ड या गोल्ड-सिल्वर ETF में निवेश करें। खास तौर पर गोल्ड और सिल्वर ETF के लिए हाल के टैक्स नियमों में बदलाव ने निवेशकों के लिए ये समझना जरूरी कर दिया है कि इनका असर क्या होगा।

ETF के टैक्स नियमों में बदलाव

फाइनेंस (नंबर 2) एक्ट, 2024 के तहत गोल्ड और सिल्वर ETF को अब नॉन-इक्विटी कैपिटल एसेट माना जाता है, जिससे टैक्स का नियम आसान लेकिन सख्त हो गया है। क्लियरटैक्स की चार्टर्ड अकाउंटेंट और टैक्स एक्सपर्ट शेफाली मुंद्रा बताती हैं, “अगर आप गोल्ड ETF को 12 महीने से ज्यादा रखते हैं, तो मुनाफा लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) माना जाएगा और इस पर 12.5% की एकसमान टैक्स दर लगेगी, बिना इंडेक्सेशन के। अगर 12 महीने या उससे कम समय तक रखते हैं, तो मुनाफा शॉर्ट-टर्म गेन माना जाएगा और आपकी इनकम के हिसाब से स्लैब रेट पर टैक्स देना होगा, जो हाई-इनकम वालों के लिए 30% तक हो सकता है।”

पहले लॉन्ग-टर्म गेन के लिए 36 महीने तक होल्ड करना पड़ता था और इंडेक्सेशन का फायदा मिलता था, जिससे महंगाई के हिसाब से मुनाफे को एडजस्ट कर टैक्स कम करना संभव था। अब ये फायदा खत्म हो गया है, यानी अब निवेशकों को महंगाई से बढ़े मुनाफे पर भी टैक्स देना होगा।

शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म गेन में अंतर

चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरेश सुराना एक उदाहरण से समझाते हैं:

शॉर्ट-टर्म होल्डिंग (12 महीने या कम): मुनाफे पर स्लैब रेट से टैक्स लगता है। मिसाल के तौर पर, अगर 30,000 रुपये का मुनाफा हुआ और टैक्स रेट 30% है, तो 9,000 रुपये टैक्स देना होगा। यानी आपको 21,000 रुपये ही मिलेंगे।

लॉन्ग-टर्म होल्डिंग (12 महीने से ज्यादा): इस पर 12.5% की एकसमान टैक्स दर लगती है। उसी 30,000 रुपये के मुनाफे पर 3,750 रुपये टैक्स बनेगा, यानी आपको 26,250 रुपये मिलेंगे। सिर्फ होल्डिंग पीरियड बढ़ाकर आप 5,250 रुपये की टैक्स बचत कर सकते हैं।

फिजिकल गोल्ड के लिए लॉन्ग-टर्म गेन का समय 24 महीने है, और मेकिंग चार्ज जैसे अतिरिक्त खर्चे रिटर्न को और कम करते हैं।

Also Read: इस दिवाली पैसा कहां लगाएं? सोना या शेयर, एक्सपर्ट से जानें कौन देगा असली फायदा

ETF क्यों हैं टैक्स के लिहाज से बेहतर

1 फाइनेंस में पर्सनल टैक्स की वर्टिकल हेड और चार्टर्ड अकाउंटेंट नियति शाह कहती हैं, “ETF एक पारदर्शी और डीमैट आधारित निवेश का तरीका है, जिसमें मेकिंग चार्ज या शुद्धता की चिंता नहीं होती। ये स्पॉट प्राइस से मेल खाते हैं और टैक्स प्लानिंग को आसान बनाते हैं, क्योंकि 12 महीने बाद लॉन्ग-टर्म का फायदा मिलता है।”

वो एक उदाहरण देती हैं: अगर कोई निवेशक गोल्ड या सिल्वर ETF में 1.5 लाख रुपये लगाता है और 18 महीने बाद 25% मुनाफे (37,500 रुपये) के साथ बेचता है, तो 12.5% टैक्स दर पर 4,687 रुपये टैक्स देना होगा। यानी 32,813 रुपये बचेंगे, जो 21.7% का प्रभावी पोस्ट-टैक्स रिटर्न है। अगर जल्दी बेचते हैं, तो स्लैब रेट की ऊंची टैक्स दर से रिटर्न काफी कम हो सकता है।

छोटे और मध्यम अवधि के निवेशकों के लिए टिप्स

1 से 2 लाख रुपये के निवेश के लिए, जो 1-3 साल तक निवेश करना चाहते हैं, मुंद्रा सलाह देती हैं:

  • 12 महीने से ज्यादा समय तक होल्ड करें ताकि कम LTCG टैक्स रेट का फायदा मिले।
  • कम खर्च वाले ETF चुनें ताकि लागत कम रहे।
  • अस्थिर मार्केट में लागत को औसत करने के लिए थोड़ा-थोड़ा निवेश करें।

शाह कहती हैं, “जूलरी के उलट, ETF पूरी तरह रिटर्न पर आधारित निवेश हैं, न कि भावनाओं से प्रेरित खरीद। इन्हें सही समय तक होल्ड करने से टैक्स के बाद भी ये चमक सकते हैं।”

Advertisement
First Published - October 10, 2025 | 5:29 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement