कभी-कभी पुराने निवेश की याद आती है, लेकिन शेयर सर्टिफिकेट कहीं गुम हो जाते हैं या डिविडेंड चेक पर जमा ही नहीं होते। फिर क्या, वो पैसा यूं ही लटका रह जाता है? नहीं, सरकार ने एक आसान रास्ता बना रखा है। अगर सात साल से ज्यादा समय हो गया और डिविडेंड क्लेम नहीं किया, तो वो अमाउंट और जुड़े शेयर इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड (IEPF) में चले जाते हैं। ये फंड कॉर्पोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री के तहत चलता है, ताकि निवेशकों का पैसा सुरक्षित रहे और जरूरत पड़ने पर लौटाया जा सके।
अक्टूबर 2025 तक, IEPF में 8,100 करोड़ रुपये से ज्यादा के अनक्लेम्ड डिविडेंड, बॉन्ड्स पर ब्याज और दूसरे निवेश जमा हो चुके हैं। ये आंकड़ा पिछले साल के 5,700 करोड़ से दोगुना से ज्यादा बढ़ गया है। लेकिन अच्छी बात ये है कि आप इसे वापस पा सकते हैं, बस सही स्टेप्स फॉलो करके।
IEPF कोई नया नाम नहीं, लेकिन ये निवेशकों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है। कंपनियां एक्ट के मुताबिक, अगर कोई डिविडेंड या मैच्योर डेबेंचर का पैसा सात साल तक क्लेम न हो, तो उसे IEPF अथॉरिटी के पास ट्रांसफर कर देती हैं। ये रूल कंपनियां एक्ट 2013 की धारा से आता है। साथ ही, उन शेयरों को भी ट्रांसफर कर दिया जाता है जिन पर डिविडेंड सात साल से बकाया है। इसका मकसद ये है कि पैसा कंपनियों के पास न लटके रहे, बल्कि एक केंद्रीय फंड में चला जाए जहां से असली मालिक या उनके वारिस इसे क्लेम कर सकें।
2025 में सरकार ने इस सिस्टम को और मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। उदाहरण के लिए, अप्रैल में मिनिस्ट्री ने बिजनेस और मार्केट प्लेयर्स जैसे शेयर ट्रांसफर एजेंट्स के साथ मिलकर काम करने का प्लान बनाया। इसका लक्ष्य अनक्लेम्ड डिविडेंड, कॉर्पोरेट डिपॉजिट और शेयर एप्लीकेशन मनी के असली मालिकों को ढूंढना है। वरना ये अमाउंट IEPF में बढ़ता ही जा रहा। अक्टूबर में एक कमिटी ने सुझाव दिए कि लो-वैल्यू क्लेम्स के लिए डॉक्यूमेंटेशन आसान हो जाए। जैसे, फिजिकल सिक्योरिटीज के लिए 5 लाख तक, डीमैट के लिए 15 लाख तक, और डिविडेंड के लिए 10,000 रुपये तक के क्लेम्स में कम कागजात लगें। 6 अक्टूबर को IEPF अथॉरिटी ने फॉर्म IEPF-5 में अपडेट किया, जहां अब आप किसी ऑथराइज्ड रिप्रेजेंटेटिव की डिटेल्स दे सकते हैं। ये बदलाव क्लेम प्रोसेस को तेज बनाने के लिए हैं।
बीते 4 अक्टूबर को फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने ‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ कैंपेन लॉन्च किया था। ये तीन महीने की मुहिम RBI, SEBI, IRDAI और IEPFA के साथ मिलकर चल रही है। इसका फोकस लोगों को उनके अनक्लेम्ड एसेट्स ट्रेस करने में मदद करना है। नवंबर के आखिर तक, फाइनेंस मिनिस्ट्री और RBI एक सिंगल पोर्टल पर काम कर रहे हैं, जो बैंक डिपॉजिट, पेंशन, शेयर और डिविडेंड सबको एक जगह चेक करने देगा। ये UDGAM, MITRA और Bima Bharosa जैसे मौजूदा सिस्टम्स को लिंक करेगा। अभी IEPF में शेयरों की रिफंड रेट सिर्फ 1.8% है, यानी 21.8 मिलियन शेयर ही लौटे हैं। लेकिन ये नए स्टेप्स से ये संख्या बढ़ सकती है।
Also Read: Bonus Issue: हर एक शेयर पर मिलेंगे 24 शेयर! FMCG सेक्टर की कंपनी ने निवेशकों पर लुटाया प्यार
कई कंपनियां खुद अलर्ट भेजती हैं। जैसे, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने मई 2025 में नोटिस जारी किया कि 2016-17 या उससे पहले के अनक्लेम्ड डिविडेंड 4 अगस्त 2025 तक क्लेम करें, वरना IEPF में चले जाएंगे। उन्होंने एक डेडिकेटेड वेबपेज भी बनाया जहां शेयरहोल्डर्स चेक कर सकते हैं। इसी तरह, कनारा बैंक ने सितंबर 2025 में कहा कि 31 दिसंबर 2025 तक क्लेम न करने पर शेयर ट्रांसफर हो जाएंगे। बैंक ने अपनी साइट canarabank.com पर फुल डिटेल्स अपलोड की हैं।
2025 के अपडेट्स से प्रोसेस तेज हुआ है। लो-वैल्यू क्लेम्स में कम डॉक्स, और ऑथराइज्ड रिप के ऑप्शन से वारिस आसानी से क्लेम कर सकेंगे। कैंपेन के तहत RBI और IEPFA कैंप्स चला रहे हैं, जहां KYC अपडेट और हेल्प मिलती है। लेकिन याद रखें, क्लेम टाइमली करें – देरी से परेशानी बढ़ सकती है। बस, थोड़ी मेहनत से आपका भूला हुआ पैसा वापस आ जाएगा।